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दो दिनों में हुई 96.60 एमएम बारिश

Updated at : 04 Aug 2025 10:14 PM (IST)
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दो दिनों में हुई 96.60 एमएम बारिश

अगस्त में प्रतिदिन बारिश हो रही है. कृषि कार्यालय के मुताबिक अगस्त माह के शुरुआत के चार दिनों में 103.87 एमएम बारिश हुई है. सबसे अधिक तीन व चार अगस्त को 51.59 एमएम तथा 45.01 एमएम यानी 96.60 एमएमए बारिश हुई है.

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प्रतिनिधि सीवान.अगस्त में प्रतिदिन बारिश हो रही है. कृषि कार्यालय के मुताबिक अगस्त माह के शुरुआत के चार दिनों में 103.87 एमएम बारिश हुई है. सबसे अधिक तीन व चार अगस्त को 51.59 एमएम तथा 45.01 एमएम यानी 96.60 एमएमए बारिश हुई है. एक अगस्त को 5.61 तथा दो अगस्त को 1.66 एमएम बारिश हुई. जिसके चलते खरीफ फसल को नया जीवन मिला है. वहीं धान की रोपनी की रफ्तार में भी बढ़ी है. अगर मौसम ऐसे ही मेहरबान रहा तो कृषि विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार धान सहित अन्य खरीफ की फसलों का आच्छादन हो जायेगा. साथ ही खरीफ फसल के अच्छी पैदावार से किसानों की स्थिति में भी सुधार होगा. अगस्त माह के शुरू होते ही बीच बीच में हो रही बारिश ने अब रफ्तार पकड़ ली है. बारिश ने धान की रोपनी करने के लिए व्याकुल किसानों को काफी राहत दी है.झमाझम बारिश के बाद कई दिनों की तपिश और उमस भरी गर्मी से जहां राहत मिली है. वही धान की रोपनी करने वाले किसानों के चेहरे पर भी मुस्कुराहट लौट आई है. किसानों को बारिश का साथ मिलने से धान की रोपनी में तेजी आ गई है. किसानों ने बताया कि यदि इसी रफ्तार से बारिश का साथ मिला तो निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक धान की रोपनी होगी. अगर तीन-चार दिनों तक और मौसम का साथ किसानों को मिला, तो धान की रोपनी का आंकड़ा तेजी से बढ़ेगा. किसानों ने बताया कि धान के बिचड़े तैयार हो गए थे, लेकिन खेतों में पानी नहीं रहने के कारण धान की रोपनी में तेजी नहीं आ रही थी. जून व जुलाई माह में बारिश पर्याप्त मात्रा में नही हुई.किसानों ने मोटर पंप की सहायता से रोपनी की थी. धान की फसल को मिली संजीवनी जो किसान अपने संसाधनों से धान रोपनी कर चके थे,वे बारिश नहीं होने से चिंतित थे. अनियमित बारिश की वजह से धान की फसल को नियमित रुप से सिंचाई नहीं हो पा रही थी. जिस वजह से धान सहित अन्य खरीफ फसलों के पौधे मुरझा रहे थे. इधर अगस्त माह में प्रतिदिन बारिश होने से धान की फसल को नया जीवन मिला है. जुलाई माह में कड़ाके की हुई धूप और उमस भरी गर्मी के कारण धान की फसल में रोग व खरपत वार पनपने लगा था. जिसके कारण फसलें के तने पीले पड़कर सूखने लगे थे. जैसे ही मौसम में ठंडक आई, वर्षा की बौछारें फसल पर पड़ी वह रोग स्वतः समाप्त होने लगा है. जिससे किसान राहत महसूस किए. किसान सहित अन्य लोगों ने बताया कि उमस के कारण फसल पर अन्य मौसमी रोग प्रभावी हो रहे थे, उससे भी अब निजात मिल जाएगी. पिछले जून व जुलाई माह में पड़ रही तीखी धूप और उमस भरी गर्मी के कारण आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ था.अब मानसून के सक्रिय होन से राहत मिली है.हालांकि अभी भी औसत से कम बारिश हुई है. लक्ष्य से पिछड़ गयी थी खेती जून व जुलाई में मॉनसून के निष्क्रिय रहने के चलते जिले की खेती लक्ष्य से पिछड़ गयी थी. किसान सूखा पड़ने की आशंका से चिंतित हो उठे थे. इधर अगस्त माह में मॉनसून सक्रिय हुआ. जिससे धान रोपनी की रफ्तार बढ़ी. जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में जिले में वर्ष 2025-26 में खरीफ फसल का लक्ष्य 126850 हेक्टेयर निर्धारित है. जबकि खरीफ फसल का आच्छादन 84003 हेक्टेयर ही हो सका. वही धान के लिए 102246 हेक्टेयर लक्ष्य रखा गया है. अधिकांश किसान धान की बुआई के लिए बारिश पर निर्भर है. जुलाई के अंत तक में 140 एमएम बारिश हुई है. जबकि इस माह में औसत वर्षापात 321 एमएम है. अगस्त माह की बारिश से धान की रोपनी का रफ्तार मिलेगी. उम्मीद की जा रही है कि लक्ष्य के अनुसार धान की रोपनी होगी. बारिश से सड़कों पर भरा पानी, आवागमन में परेशानी बारिश होने से इधर कुछ दिनों से पड़ रही गर्मी से लोगों को राहत मिली है. साथ ही खरीफ की प्रमुख फसल धान की फसल के लिए यह बारिस उपयोगी है. वही इस बारिश ने लोगों के जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है.बारिश के कारण कई सड़कें कीचड़मय व जलमग्न दिखी. जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न होती है. जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.सड़क पर जल जमाव से लोग परेशान है. कहने को तो क्षेत्रों में पक्की सड़कों का जाल बिछा है लेकिन कई सड़कें पुरानी और जर्जर हो चुकी है. सड़कों से गिट्टी निकल जाने के बाद सड़कों पर छोटे-बड़े गड्ढे बन चुके हैं.जिस कारण बारिश होते ही इन गढ्डे में जल जमाव की समस्या उत्पन्न हो जाती है.दूसरी तरफ सड़कों पर धूल मिट्टी और छोटे-छोटे गिट्टी के टुकड़े रहने से बारिश में सड़कों पर कीचड़ पसर जाता है. जिसके बाद राहगीरों को पैदल चलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अधिकांश सड़कों के किनारे नाला का निर्माण किए गया है पर आउटलेट सही नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर ही कई-कई दिनों से जमा रह जाता है. कई नालों में सही ढंग से निकासी नहीं होने के कारण बारिश होते ही उल्टे नाले की गाद सड़कों पर पसर जाता है .जिसके बाद उन सड़कों पर बारिश के बाद पैदल चलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.इन सड़कों पर लोगों के साथ ही दिन भर आला अधिकारियों का आवागमन रहता है. लेकिन किसी अधिकारी का इस ओर ध्यान नहीं जाता है. रख रखाव के अभाव के कारण सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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DEEPAK MISHRA

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DEEPAK MISHRA is a contributor at Prabhat Khabar.

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