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13 से 15 जून तक मानसून आने की है संभावना

Updated at : 09 Jun 2024 9:09 PM (IST)
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13 से 15 जून तक मानसून आने की है संभावना

जून महीना शुरू होते ही लोगों को सूरज के प्रचंड तेवरों का सामना करना पड़ रहा है. जिसको लेकर रविवार को सुबह से ही जिले में भीषण उमस भरी गर्मी से लोगों की हालत बिगाड़ रही है.

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शिवहर: जून महीना शुरू होते ही लोगों को सूरज के प्रचंड तेवरों का सामना करना पड़ रहा है. जिसको लेकर रविवार को सुबह से ही जिले में भीषण उमस भरी गर्मी से लोगों की हालत बिगाड़ रही है. गर्मी से राहत पाने के लिए लोग विभिन्न प्रकार के उपाय करते देखे गए. वहीं डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा और भारत मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो 13 से 15 जून तक मानसून आगमन की संभावना है. तथा किसान सुगंधित धान का बिचड़ा नर्सरी में 20 जून से 10 जुलाई तक गिराए. सुगंधित किस्मों का बिचड़ा बीजस्थली में पहले से गिरने से उसकी सुगंध खत्म हो जाती है. जबकि अल्प अवधि वाले धन का बिचड़ा भी अच्छी उपज के लिए इसी अवधि में नर्सरी में गिराए. तथा मध्यम अवधि के धान के किस्मों को बीजस्थली में गिराने का काम करें. इसके लिए संतोष, सीता, सरोज, राजश्री, प्रभात, राजेंद्र सुवासनी, राजेंद्र कस्तूरी, राजेंद्र भगवती, कामिनी, सुगंधा किस्में अनुशंसित है.जो एक हेक्टर क्षेत्रफल में रोपाई के लिए 800- 1000 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बीज गिरायें. नर्सरी में क्यारी की चौड़ाई 1.25- 1.5 मीटर व लंबाई सुविधा अनुसार रखें. बीज को गिरने से पहले बालिस्टन 2.0 ग्राम प्रति किलो ग्राम की दर से बीजोपचार करें. जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा प्राप्त हो तथा लंबी अवधि वाले धान लगाना चाहते हैं. वे राजश्री, राजेन्द्र मंसूरी, राजेन्द्र स्वेता, किशोरी, स्वर्णा, स्वर्णा सब-1, वीपीटी- 5204 एवं सत्यम आदि किस्में 10 जून तक बीजस्थली में गिराने का प्रयास करें. अल्प अवधि वाले धान एवं सुगंधित धान बोने के लिए अनुशंसित है 20 जून से 10 जुलाई तक जितने क्षेत्र में धान का रोप करना हो.उसके दशांश हिस्सों में बीज गिराये.तथा बीज को गिरने से पहले 1.5 ग्राम बाविस्टिन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें.अल्प अवधि वाले धान की किस्म एवं सुगंधित धान का किस्म का बिचड़ा बीजस्थली में 20 जून से 10 जुलाई तक बोने के लिए अनुशंसित है. तथा हल्दी एवं अदरक की बोआई करें. हल्दी की राजेंद्र सोनिया, राजेंद्र सोनाली किस्में व अदरक की मरान एवं नदियां किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. हल्दी के लिए बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं अदरक के लिए 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. बीज प्रकंद का आकार 30 से 35 ग्राम जिसमें 3 से 5 स्वस्थ कलियां हो और रोपाई की दूरी 30 गुणा 20 सेमी रखें. बीज को उपचारित करने के बाद बोआई करें.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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