गरीबों के निवाले पर माफियाओं की नजर

Published at :15 May 2017 5:51 AM (IST)
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गरीबों के निवाले पर माफियाओं की नजर

मनमानी. नहीं थमी सरकारी अनाज की कालाबाजारी सीतामढ़ी : जिले में सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला थम नहीं रहा है. अक्सर अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आ रहा है. गरीब अनाज के लिए डीलर का चक्कर काट रहे है और डीलर डोर स्टेप डिलेवरी के जरिये अनाज आने का इंतजार कर रहे है, […]

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मनमानी. नहीं थमी सरकारी अनाज की कालाबाजारी

सीतामढ़ी : जिले में सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला थम नहीं रहा है. अक्सर अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आ रहा है. गरीब अनाज के लिए डीलर का चक्कर काट रहे है और डीलर डोर स्टेप डिलेवरी के जरिये अनाज आने का इंतजार कर रहे है, लेकिन इसके पूर्व ही एजीएम, डोर स्टेप डिलेवरी के अभिकर्ता व अनाज माफियाओं की तिकड़ी गरीबों के हक का अनाज कालाबाजारी में बेच रहे है. हर माह गरीबों के हक का सरकारी अनाज कालाबाजार में बिक रहा है.
अब तक अनाज के कालाबाजारी के जितने मामले सामने आये है, उनमें एजीएम स्तर के अधिकारी की भूमिका रही है. हैरत की बात यह कि जितने भी एजीएम अनाज के घोटाले में शामिल रहे है, वह विभागीय अधिकारी नहीं रहे है. उधार के अधिकारियों ने एसएफसी को केवल लूटा है, बल्कि गरीबों का हक भी कालाबाजार में बेच मोटी रकम जमा की है.
शनिवार की रात रून्नीसैदपुर में कालाबाजारी का पांच बारो सरकारी अनाज जब्त किये जाने के बाद जिले में एक बार फिर अनाज की कालाबाजारी का मामला सुर्खियों में है. इसके पूर्व इसी माह बेलसंड में 1.68 करोड़ के अनाज के गबन का मामला सामने आया था. जिसमें एसएफसी के जिला प्रबंधक ए आलिमी द्वारा बेलसंड थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. साथ हीं मेजरगंज, सोनबरसा, रून्नीसैदपुर व पुपरी में भी गोदाम से अनाज गायब मिले है. जिसकी जांच जारी है. इसके पूर्व सितंबर 2016 में 1.33 लाख क्विंटल सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आया था. सितंबर 2016 में गरीबों के हक के लिए आवंटित कुल 1.33 लाख क्विंटल सरकारी अनाज की कालाबाजारी का मामला सामने आया था. मामले को लेकर डीएम ने जांच टीम गठित की थी. जांच टीम ने रून्नीसैदपुर व सोनबरसा में छापेमारी कर व्यापक पैमाने में गड़बड़ी उजागर की थी. जांच टीम ने सोनबरसा में सरकारी अनाज को गोदाम में भेजने के बजाये एक डीलर के गोदाम में अनाज गिराते वाहन को जब्त किया था. मामले में एजीएम महेश झा, व डोर स्टेप डिलेवरी अभिकर्ता दिलीप साह के अलावा वाहन चालक व डीलर के खिलाफ बीडीओ कामिनी देवी द्वारा 20 अक्टूबर को सोनबरसा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. मामले में सोनबरसा बीडीओ के खिलाफ प्रपत्र क के तहत कार्रवाई की अनुशंसा की गयी थी. इसके जवाब में सोनबरसा बीडीओ ने डीलरों के संयुक्त हस्ताक्षरित पत्र के साथ भेजे गये जवाब में स्पष्ट किया था कि डीलरों को अतिरिक्त आवंटन मद का अनाज ही नहीं दिश गया था. जबकि डीलरों के नाम फर्जी परमिट बना कर एसएफसी के अधिकारी व कर्मी के अलावा डोर स्टेप डिलेवरी अभिकर्ता ने उक्त अनाज काला बाजार में बेच दिया था. जबकि रून्नीसैदपुर में सामने आये लाखों के अनाज के घोटाले के मामले में प्रभारी एजीएम सह प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारी नवीन किशोर अनाज के उठाव व वितरण से संबंधित संचिका लेकर ही फरार हो गये थे. एसएफसी पटना के अंकेक्षण व निगरानी विभाग की टीम तथा डीएम द्वारा गठित टीम ने भी अलग-अलग मामले की जांच में अनियमितता उजागर की थी. टीम ने गोदाम सील करते हुये 18 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन एजीएम नवीन किशोर व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी के बाद से नवीन किशोर फरार चल रहे है. जबकि 19 अक्टूबर को फर्जी एसआइओ पर करोड़ों के अनाज की हेराफेरी के मामले में एसएफसी मुख्यालय पटना के निर्देश पर एसएफसी के तत्कालीन जिला प्रबंधक बलागउद्दीन ने डुमरा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. जिसमें सहायक लेखा पदाधिकारी गजेंद्र प्रसाद सिंह व आइटी मैनेजर गौरव कुमार को आरोपित किया गया था. 20 अक्टूबर को अनाज के गबन के मामले में एक बार फिर सोनबरसा थाने में सोनबरसा एजीएम महेश झा, सहायक लेखा पदाधिकारी गजेंद्र प्रसाद सिंह व आइटी मैनेजर गौरव कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. बाद में जिला प्रबंधक बलागउद्दीन ने सहायक लेखा पदाधिकारी गजेंद्र प्रसाद सिंह व आइटी मैनेजर गौरव कुमार को सेवा से मुक्त कर दिया था. जबकि विभाग ने तत्कालीन जिला प्रबंधक बलागउद्दीन को मुख्यालय बुला लिया था. बावजूद इसके कार्रवाई की गति धीमी है. वहीं अनाज की कालाबाजारी जारी है.
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