दहेज प्रताड़ना में पति समेत पांच दोषी करार

Published at :09 May 2017 12:45 AM (IST)
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दहेज प्रताड़ना में पति समेत पांच दोषी करार

डुमरा कोर्ट : अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सीतामढ़ी सदर विक्रम कुमार ने दहेज प्रताड़ना के मामले में पति समेत पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए मामले को सीजेएम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है. अब इस मामले में मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में सुनवाई होगी. बताते चले की बैरगनिया थाना के घीपट्टी निवासी गिरधारी प्रसाद […]

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डुमरा कोर्ट : अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सीतामढ़ी सदर विक्रम कुमार ने दहेज प्रताड़ना के मामले में पति समेत पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए मामले को सीजेएम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है. अब इस मामले में मंगलवार को सीजेएम कोर्ट में सुनवाई होगी.

बताते चले की बैरगनिया थाना के घीपट्टी निवासी गिरधारी प्रसाद की पुत्री गार्गी कुमारी ने आठ जुलाई 2010 को बैरगनिया थाने में दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था.
जिसमें नगर थाना के भवदेपुर चमरा गोदाम निवासी पति श्याम चंद्र गोयल, उसके पिता नशा मुक्ति केंद्र सदर अस्पताल में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात बाबूनंदन प्रसाद, मां काशी देवी बहनोई सह शिक्षक उमेश कुमार आलोक व बहन सह शिक्षिका प्रतिमा कुमारी को आरोपित किया था.
दर्ज प्राथमिकी में बताया था की उसके पिता से बतौर दहेज पांच लाख एक हजार 100 रुपये एकाउंट के माध्यम से लिये गये. गार्गी की शादी बाबूनंदन प्रसाद के पुत्र श्यामचंद्र गोयल के साथ हुई थी. शादी के बाद ससुराल वाले बतौर दहेज तीन लाख रुपये की मांग करने लगे. इनकार करने पर पति समेत आरोपियों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू किया. वहीं मारपीट कर घर से भगा दिया. इतना हीं नहीं पति ने दूसरी शादी रचा ली. इसके बाद उसने बैरगनिया थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
एसडीजेएम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद 17 अप्रैल को फैसले के लिए तिथि तय की थी. साथ ही आरोपी समेत वादी को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था. लेकिन उक्त तिथि पर पांचों आरोपी कोर्ट में उपस्थित नहीं हो सके. लिहाजा एसडीजेएम ने पांचों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था. इसके आलोक में तीन मई को पांचों आरोपियों ने कोर्ट में आत्म समर्पण कर दिया था. जहां से कोर्ट ने पांचों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी विक्रम कुमार ने पांचों को दोषी करार दिया.
एसडीजेएम ने अपने आदेश में कहा है कि डीपी एक्ट में पांच साल के सजा का प्रावधान है. लेकिन उन्हें तीन साल तक की हीं सजा देने का अधिकार है. लिहाजा उन्होंने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का मामला बताते हुए सीजेएम कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है.
अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी सीतामढ़ी सदर विक्रम कुमार
ने दिया दोषी करार
मामले को किया सीजेएम कोर्ट में स्थानांतरित
सजा के बिंदु पर सीजेएम कोर्ट में सुनवाई आज
पांचों आरोपितों ने तीन मई को कोर्ट में किया था आत्मसमर्पण
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