बस में करंट लगने के बाद मचा कोहराम

Published at :25 Apr 2017 4:24 AM (IST)
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बस में करंट लगने के बाद मचा कोहराम

बस में करंट लगने के बाद मचा कोहराम हादसा. मेजरगंज के विश्वनाथपुर गांव की घटना, 11 हजार वोल्ट बिजली हो रही थी प्रवाहित सीतामढ़ी : मेजरगंज थाना क्षेत्र के मेजरगंज बसविट्टा पथ में विश्वनाथपुर गांव में 11 हजार वोल्ट विद्युत प्रवाहित तार के संपर्क में आने के बाद रविवार की रात हुये हादसे में दर्जन […]

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बस में करंट लगने के बाद मचा कोहराम

हादसा. मेजरगंज के विश्वनाथपुर गांव की घटना, 11 हजार वोल्ट बिजली हो रही थी प्रवाहित
सीतामढ़ी : मेजरगंज थाना क्षेत्र के मेजरगंज बसविट्टा पथ में विश्वनाथपुर गांव में 11 हजार वोल्ट विद्युत प्रवाहित तार के संपर्क में आने के बाद रविवार की रात हुये हादसे में दर्जन भर लोग जख्मी हो गये. इनमें एक की हालत गंभीर बनी हुई है. बथनाहा थाना के खैरवी निवासी विक्की कुमार का एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में इलाज जारी है.
इधर, इस घटना के बाद बथनाहा के खैरवी में लोग दहशत में है. परिजन घायलों के शीघ्र ठीक होने की दुआ कर रहे है. बथनाहा थाना के खैरवी से मेजरगंज के हनुमाननगर जा रहीं बरातियों से भरी नंदजी बस के विश्वनाथपुर में करंट के संपर्क में आने के बाद रविवार की रात अफरातफरी मच गयी. बदहवास लोग बस से कूद कर भागने लगे. इनमें दर्जनों लोग चोटिल हुए. हालांकि बस के भीतर बैठे लोग बाल-बाल बच गये. लेकिन बस की छत पर बैठे लोग बुरी तरह झुलस गये.
थानाध्यक्ष व सीओ ने दिखायी सक्रियता: घटना की सूचना मिलते ही मेजरगंज थानाध्यक्ष सैफ अहमद , सहायक अवर निरीक्षक जितेंद्र सिंह व सीओ अमरनाथ चौधरी ने पूरी सक्रियता दिखायी. उक्त अधिकारियों ने पहले घायलों को रेफरल अस्पताल में भरती कराया. बाद में घायलों के लेकर तीनों अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे. जब तक घायलों का इलाज हुआ, उक्त अधिकारी सदर अस्पताल में कैंप करते रहे.
नानपुर हादसे की पुनरावृत्ति टली
मेजरगंज में रविवार की रात बस के विद्युत तार के संपर्क में आने की खबर मिलने के बाद सोमवार को जिले में हड़कंप मच गया. यह महज संयोग ही था की इस हादसे में किसी की जान नहीं गयी. हालांकि इस घटना के बाद लोगों के जेहन में एक बार फिर नानपुर थाना के कोइली हादसे की याद ताजा हो गयी. 5 मई 2009 को कोइली नानपुर में बिजली तार के संपर्क में आने के बाद यात्री बस धू-धू कर जल गयी थी. हादसे में 25 लोगों की मौत हुई थी. जबकि 30 से अधिक जख्मी हुए थे. यह महज संयोग ही था की मेजरगंज बस हादसे में किसी की जान नहीं गयी.
विद्युत व परिवहन विभाग की लापरवाही बरकरार: बार-बार होते हादसों के बावजूद न तो परिवहन विभाग कोई सीख ले रहा है और नहीं विद्युत विभाग हीं सबक ले रहा है. बिजली के तार सड़क के किनारे झूलते नजर आ रहे है जो हादसों का कारण बन रहे है, जबकि इलाके में दौड़ने वाली बसें अधिक कमाई के लोभ में यात्री के साथ मौत का साज-ओ-सामान लेकर सड़क पर दौड़ रहे है. एक तो झूलती हुई विद्युत तार हादसों का कारण बनी हुई है, उपर से बस संचालकों द्वारा बस की छत पर भी यात्रियों को खुलेआम बैठा कर ले जाया जा रहा है. परिणतिस्वरूप इस तरह के हादसे सामने आ रहे है.
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