सदर अस्पताल में दूसरे दिन भी सिमरन का इलाज जारी

Published at :24 Apr 2017 12:45 AM (IST)
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सदर अस्पताल में दूसरे दिन भी सिमरन का इलाज जारी

जांच. मेडिकल कराने पहुंची सिमरन शनिवार को हुई थी बीमार सीतामढ़ी : वक्त व हालात के बीच उलझी तथा अपनों की मारी सिमरन का सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दूसरे दिन भी इलाज जारी रहा. सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा के घेरे के बीच सदर अस्पताल में रविवार को भी वह अर्द्ध बेहोशी की हालत में […]

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जांच. मेडिकल कराने पहुंची सिमरन शनिवार को हुई थी बीमार

सीतामढ़ी : वक्त व हालात के बीच उलझी तथा अपनों की मारी सिमरन का सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में दूसरे दिन भी इलाज जारी रहा. सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा के घेरे के बीच सदर अस्पताल में रविवार को भी वह अर्द्ध बेहोशी की हालत में रहीं. चिकित्सकों की टीम समय-समय पर उसके सेहत की जांच के साथ उपचार करती रहीं.
शनिवार को बाजपट्टी पुलिस उसे महिला अल्पावास गृह से लेकर सीतामढ़ी सदर अस्पताल पहुंची थी. जहां मेडिकल के बाद उसे फिर मुख्यालय डुमरा के कैलाशपुरी स्थित महिला अल्पावास गृह पहुंचाने की तैयारी हीं थी, कि वह बीमार पड़ गयी थी. लिहाजा उसे सदर अस्पताल में भरती करना पड़ा था. जहां दूसरे दिन भी उसका इलाज जारी है.
आरोपित मामा अब भी फरार
इधर, 18 अप्रैल को सामने आये यौनशोषण के मामले में मुख्य आरोपी सिमरन के मामा दिग्विजय सिंह की तलाश में पुलिसिया छापेमारी रविवार को भी जारी रहीं. हालांकि आरोपी मामा फरार चल रहा है. बताया जा रहा है कि आरोपी तत्काल मुंबई में है. जो शीघ्र हीं सरेंडर करेगा. इस मामले में पुलिस सिमरन की मामी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
डुमरा थाना के एक गांव की रहनेवाली व वर्षों तक पूर्वी चंपारण जिले के ढाका में एक कमरे के तहखाने में बंधक बनाकर यौन शोषण की शिकार बनी सिमरन 25 फरवरी 2015 को ढाका पुलिस द्वारा मुक्त करायी गयी थी. जहां से उसे उसके नाना के घर बाजपट्टी पहुंचा दिया गया था. तहखाने से मुक्त होने के पूर्व शमीम नामक उसके मां के प्रेमी ने मां-बाप व भाई की हत्या कर सिमरन को दुनियां की भीड़ में अकेला कर दिया था. 25 नवंबर 2016 को शमीम की गिरफ्तारी के बाद सिमरन को न्याय की आस जगी.
लेकिन ढाका से बाजपट्टी आने के बाद भी उसे जुल्म झेलने पड़े. सितंबर 2016 में सिमरन पर गांव के हीं एक युवक ने कातिलाना हमला व दुष्कर्म का प्रयास किया. शमीम के गुंडे भी उसकी हत्या करने में लगे रहे. स्थानीय स्तर पर उसे पुलिसिया सुरक्षा दी गयी. उसकी सुरक्षा में एक महिला व तीन पुरूष गार्ड समेत तीन लोग लगे रहे. बावजूद इसके उसका अपना मामा ही उसकी अस्मत से वैसे हीं खेलते रहा, जैसे ढाका का शमीम. शमीम की तरह मामा भी उसके जिस्म को गैरों में पड़ोस पैसा कमाना चाहता था.
वहीं विरोध करने पर तेजाब डाल हत्या की धमकी देता था. वह जुल्म सहती रहीं. लेकिन उसने मामा के करतूतों को मोबाइल में कैद कर लिया. और 18 अप्रैल की रात उसके मामा द्वारा दुष्कर्म करने के बाद मामले का भंडा फूट गया. 19 अप्रैल को पुपरी डीएसपी ने मामले की जांच की. पुलिस ने मामा दिग्विजय सिंह व मामी लक्ष्मी देवी समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज करते हुये मामी को जेल भेज दिया. वहीं मामा की गिरफ्तारी को छापेमारी जारी है.
मामले में एसपी के आदेश पर बाजपट्टी थाने में गुरूवार को प्राथमिकी दर्ज करते हुए पुलिस ने सिमरन की मामी लक्ष्मी देवी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. मुख्य आरोपी मामा दिग्विजय सिंह की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी थी. वहीं सिमरन को महिला अल्पावास गृह भेज दिया था. तब से वह महिला अल्पावास गृह डुमरा में रह रहीं थी. शनिवार को मेडिकल कराने के लिए उसे सदर अस्पताल लाया गया था. जहां वह बीमार पड़ गयी.
सिमरन के सहयोग को उठे हाथ
सिमरन के इलाज व न्याय दिलाने के साथ अब सहयोग के लिए भी हाथ उठने लगे है. जदयू खेल प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष आनंद बिहारी सिंह ने जहां सिमरन को इंसाफ के साथ इलाज के लिए वरीय अधिकारियों को पत्र भेजा है, वहीं अम्बेदकर कल्याण छात्रावास के पूर्व छात्र सह सामाजिक कार्यकर्ता मनोज पासवान व संतोष राम ने रविवार को सदर अस्पताल पहुंच कर सिमरन को कपड़ा व जरूरी सामान उपलब्ध कराये. साथ ही अन्य सहयोग का भी आश्वासन दिया.
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