निजी जमीन पर बना लिया आंगनबाड़ी केंद्र
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Feb 2016 5:11 AM
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सीओ को आवेदन देकर लगायी न्याय की गुहार सीतामढ़ी/बथनाहा : थाना क्षेत्र के कमलदह में निजी जमीन पर जबरन आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण करा लेने का मामला प्रकाश में आया है. विरोध करने पर गत दिनों पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की गयी. मामले को लेकर अनुसूचित जाति थाना में प्राथमिकी कांड संख्या-4/16 […]
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सीओ को आवेदन देकर लगायी न्याय की गुहार
सीतामढ़ी/बथनाहा : थाना क्षेत्र के कमलदह में निजी जमीन पर जबरन आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण करा लेने का मामला प्रकाश में आया है. विरोध करने पर गत दिनों पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की गयी. मामले को लेकर अनुसूचित जाति थाना में प्राथमिकी कांड संख्या-4/16 दर्ज करायी गयी है. पीड़ित राजेंद्र पासवान द्वारा मामले को लेकर सीओ को भी आवेदन देकर न्याय की गुहार लगायी गयी है. पीड़ित के अनुसार वर्ष 1988 में उसके नाम से उक्त जमीन का बंदोबस्ती हुआ था,
जिसका बंदोबस्ती वाद संख्या-579/88 है. वर्ष 2012 में तत्कालीन सीओ रामबचन राम द्वारा सरकारी भूमि समझ कर उक्त जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र बनाने के लिए मुखिया को स्वीकृति दे दी गयी. मुखिया द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र बनाने का काम शुरू कर दिया गया. भवन निर्माण का कार्य शुरू होने पर पीड़ित राजेंद्र पासवान द्वारा मुखिया को भवन बनाने से रोक दिया गया. तब मुखिया द्वारा 15.11.12 को पत्रांंक -83 के माध्यम से पीड़ित से पूछा गया कि यदि आपकी जमीन है,
तो संबंधित कागजात प्रखंड, अंचल या ग्राम पंचायत कार्यालय में प्रस्तुत करें, अन्यथा उक्त भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण कराया जाएगा. नोटिस मिलने के बाद पीड़ित पासवान ने अंचल कार्यालय में अपना बंदोबस्ती परचा जमा करा दिया. परचा के आलोक में सीओ रामबचन राम द्वारा 11.4.13 को पत्रांक-287 के द्वारा मुखिया को जांच का हवाला देकर भवन निर्माण पर रोक लगा दिया गया. जांच के बाद 7.1.15 को पीड़ित राजेंद्र पासवान के नाम से लगान रसीद काट दिया गया.
इस बीच गांव के ही दूसरे जगह पर आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण करा लिया गया, जिसकी जानकारी सीडीपीओ को भी नहीं है. लगान रसीद कटने के बाद भी सेविका पति व मुखिया द्वारा पीड़ित की जमीन पर ही जबरन भवन निर्माण कराया जाने लगा, जिसका विरोध करने पर पीड़ित परिवार के साथ मारपीट की गयी. मामले को लेकर सदर डीएसपी का सुपरविजन भी हो गया, लेकिन स्थानीय हल्का कर्मचारी छेदी राम द्वारा अब तक जांच कर प्रतिवेदन नहीं सौंपा गया है. यहां तक कि कर्मचारी छेदी राम का मोबाइल नंबर भी लगातार बंद पाया जा रहा है. जिसके कारण पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पा रहा है.
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