खड़का बैंक में बढ़ सकती है गबन की राशि
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Dec 2015 6:46 PM
खड़का बैंक में बढ़ सकती है गबन की राशि बीडीओ के खाते से भी 6.10 लाख की निकासी ग्रामीण बैंक की खड़का शाखा का मामला सीतामढ़ी/बोखड़ा. ग्रामीण बैंक की खड़का शाखा में अब तक 78.25 लाख के गबन का मामला सामने आ चुका है. आशंका व्यक्त की जा चुकी है कि गबन की राशि बढ़ […]
खड़का बैंक में बढ़ सकती है गबन की राशि बीडीओ के खाते से भी 6.10 लाख की निकासी ग्रामीण बैंक की खड़का शाखा का मामला सीतामढ़ी/बोखड़ा. ग्रामीण बैंक की खड़का शाखा में अब तक 78.25 लाख के गबन का मामला सामने आ चुका है. आशंका व्यक्त की जा चुकी है कि गबन की राशि बढ़ सकती है. वैसे इस बिंदु पर बैंक के अधिकारी साफ तौर पर कुछ भी बताने से परहेज कर रहे हैं. सब के सब अपने से वरीय अधिकारी का नाम बता और उनसे कोई जानकारी लेने की बात कह रहे हैं. कतिपय कारणों से बैंक के अधिकारी चुप्पी साध रखे हैं और अंदर ही अंदर कागजी कार्रवाई कर रहे हैं. गबन के बाद उठ रहे सवाल गबन का मामला सामने आने के बाद लोगों द्वारा सवाल उठाए जा रहे हैं. पहला सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब लिपिक गजेंद्र झा द्वारा वरीय अधिकारी को गबन का संकेत दिया गया तो उस पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया? आखिर क्यों वरीय अधिकारी चुप्पी साध लिये. यही चुप्पी 78 लाख 25 हजार रुपये के गबन का कारण बताया जा रहा है. सूत्रों ने बताया कि लिपिक गजेंद्र झा ने वरीय अधिकारी को बताया था कि एमएनबीसी के अधिकांश खाते में बैलेंस जीरो शो कर रहा है. श्री झा काफी सशंकित थे और इसी कारण वरीय अधिकारी से संपर्क साधे, पर कुछ नहीं हुआ. आज की तारीख में गबन की दर्ज प्राथमिकी में श्री झा भी आरोपित हैं. लिपिक में मिला प्रमोशन उक्त शाखा में श्री झा चतुर्थवर्गीय कर्मी थे. बाद में उन्हें प्रमोशन देकर उनको लिपिक बना दिया गया. साथ ही पूरी शाखा उनके हवाले कर दी गई. 25 मइ 14 से सात अक्तूबर 14 तक श्री झा चतुर्थवर्गीय कर्मी, लिपिक व शाखा प्रबंधक आदि तीन भूमिका में रहे. जब उन्हें लिपिक बनाया गया तो उस दौरान तक या उसके बाद उन्हें कंप्यूटर का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया. वे कहते हैं कि कंप्यूटर की उन्हें कोई विशेष जानकारी नहीं है. अधिकांश खाते में जीरो बैलेंस शो करने पर वे वरीय अधिकारी को इसकी जानकारी दिए थे और शाखा प्रबंधक के पद पर किसी अधिकारी की नियुक्ति करने की मांग किए थे. एक कारण यह भी था कि शाखा में खाताधारियों की संख्या अधिक होने के चलते उन्हें काफी परेशानी होती थी. 400 शिक्षक का भी खाता उसी शाखा में है. आरबीआइ की नियमों की अवहेलना श्री झा के अनुसार आरबीआइ के नियमों की अवहेलना कर अधिकारियों द्वारा उन्हें शाखा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. किसी भी शाखा का मुख्य ताला व कैश के ताला का चाबी अलग-अलग दो कर्मी को रखना है. कर्मी की जगह कोई अधिकारी भी हो सकते हैं, मगर इस शाखा में श्री झा को ही दोनों चाबी रखना पड़ता था. इस सच्चाई को उन्होंने स्वीकार किया है. यह भी बताया कि पूरी राशि का गबन अवैध रूप से कार्यरत रहे नीतीश चंद्र झा ने किया है. पूर्व प्रबंधक एसएन अब्बास के तबादला के बाद लिपिक श्री झा ने भी दो-तीन दिन नीतीश से काम लिये थे. चार पर हुई प्राथमिकी बता दें कि गबन की बाबत पहली प्राथमिकी लिपिक श्री झा ने नीतीश के खिलाफ दर्ज करायी थी. दूसरी प्राथमिकी नये शाखा प्रबंधक विजय कुमार ने गजेंद्र झा, पूर्व कैशियर मृगनेंद्र झा, नीतीश झा व पूर्व प्रबंधक एसएन अब्बास के खिलाफ दर्ज करायी है. दोनों मामले के दो पुलिस अधिकारी अनुशंधानकर्ता हैं. बता दें कि कैशियर रहे श्री झा अब सेवानिवृत्त भी चुके हैं. कहते हैं अधिकारी गबन की बाबत शाखा प्रबंधक विजय कुमार ने वरीय अधिकारी से संपर्क करने की बात कही. जब क्षेत्रीय प्रबंधक बीके जायसवाल से पूछा गया तो उन्होंने भी जवाब दिया कि सीनियर अधिकारी ही कुछ बता सकते हैं.
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