मानवाधिकार आयोग से भी नहीं मिला न्याय

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मानवाधिकार आयोग से भी नहीं मिला न्याय अब आवेदक ने दी आत्मदाह की धमकीधान के एवज में रुपये नहीं मिल पाने का मामलासीतामढ़ी. परिहार प्रखंड के व्यापार मंडल अध्यक्ष मो. सऊद आलम शासन व प्रशासन की कार्यशैली से तंग आकर अब आत्मदाह करने का मन बनायें हैं. न्याय के लिए वे सबसे पहले मानवाधिकार आयोग, […]

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मानवाधिकार आयोग से भी नहीं मिला न्याय अब आवेदक ने दी आत्मदाह की धमकीधान के एवज में रुपये नहीं मिल पाने का मामलासीतामढ़ी. परिहार प्रखंड के व्यापार मंडल अध्यक्ष मो. सऊद आलम शासन व प्रशासन की कार्यशैली से तंग आकर अब आत्मदाह करने का मन बनायें हैं. न्याय के लिए वे सबसे पहले मानवाधिकार आयोग, बिहार के यहां गये थे. बाद में डीएम व डीसीओ समेत अन्य के यहां भी आवेदन दिये. अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला है. क्या है पूरा मामलावर्ष-2014-15 में राज्य सरकार ने व्यापार मंडल व पैक्सों से भी धान की खरीद करायी थी. परिहार व्यापार मंडल अध्यक्ष मो. सऊद आलम भी धान की खरीद किये थे. उन्होंने एसएफसी को धान का चावल तैयार करा कुल 2 सौ 70 क्विंटल धान दिये थे. रुपये भी मिला, लेकिन 1.52 लाख कम. इसको लेकर वे विभाग के यहां दौर लगाते रहे, पर उनकी नहीं सुनी गयी और राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है. सड़ गया 3 सौ क्विंटल धानअध्यक्ष का आरोप है कि परिहार के धान क्रय केंद्र प्रभारी रहे कार्यपालक सहायक द्वारा प्रति क्विंटल धान के एवज में उनसे सौ रुपये का डिमांड किया गया. रिश्वत देने से इनकार करने पर प्रभारी द्वारा केंद्र से तीन सौ क्विंटल धान वापस कर दिया गया था. बाद में वह धान सड़ गया. रिश्वत लेने का आरोपमो. सऊद आलम का आरोप है कि डीसीओ द्वारा एडवाइस पर हस्ताक्षर करने के लिए सौ रुपये प्रति क्विंटल धान के हिसाब से कुल 75 हजार रुपये रिश्वत के रूप में लिया गया. वही तत्कालीन सीओ अजय कुमार को रिश्वत के तौर पर 50 हजार नहीं दिये जाने पर उनके द्वारा इन्फोर्समेंट प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया गया था. अध्यक्ष का डिमांडअध्यक्ष ने सबसे पहले 30 मई 15 को मानवाधिकार आयोग से शिकायत की थी. उसके बाद 6 जून 15 को डीएम के यहां गये. 21 अगस्त 15 को जिला सहकारिता पदाधिकारी को आवेदन दिये. 22 सितंबर 15 को निबंधक, सहयोग समितियां को आवेदन देकर लंबित राशि का भुगतान कराने व पूरे मामले की जांच करा दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी. मो. सऊद आलम की माने तो तमाम अधिकारियों के स्तर पर उनका मामला अब तक लंबित है. उन्होंने एक बार फिर डीएम को आवेदन देकर कहा है कि एक सप्ताह के अंदर भुगतान नहीं मिलने पर वे आत्मदाह कर लेंगे. उनकी मांगों में एसएफसी के यहां बकाया 1.52 लाख रुपये ब्याज के साथ भुगतान कराने, तत्कालीन सीओ व केंद्र प्रभारी पर कार्रवाई करने व रिश्वत के रूप में लिये गये रुपये को डीसीओ से वापस कराने आदि शामिल है.

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