..आखिर कब तक भरे जाएंगे शक्षिकों के रक्ति पद!
..आखिर कब तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद! फोटो नंबर-9, 10 हाइस्कूल सोनबरसा व छात्रों को पढ़ाते शिक्षक. 11 मार्च से मैट्रिक की परीक्षा होने वाली है. इससे पूर्व 24 फरवरी से इंटर की परीक्षा होनी है. छात्र-छात्राएं कोचिंग कर कोर्स पूरा करने में लगे हुए हैं. एक ओर जहां हाइस्कूलों में कई विषयों […]
..आखिर कब तक भरे जाएंगे शिक्षकों के रिक्त पद! फोटो नंबर-9, 10 हाइस्कूल सोनबरसा व छात्रों को पढ़ाते शिक्षक. 11 मार्च से मैट्रिक की परीक्षा होने वाली है. इससे पूर्व 24 फरवरी से इंटर की परीक्षा होनी है. छात्र-छात्राएं कोचिंग कर कोर्स पूरा करने में लगे हुए हैं. एक ओर जहां हाइस्कूलों में कई विषयों के शिक्षक नहीं है तो जो शिक्षक हैं, उनसे पढ़ने के लिए बच्चे हीं नहीं जाते हैं. यह हाल हर हाइस्कूल का है. नंदीपत जीतू उच्च विद्यालय में शनिवार को वर्ग दशम के 635 व इंटर के 120 छात्र-छात्राओं में से एक भी क्लास करने नहीं पहुंचे थे. वर्ग नवम के 809 में से मात्र पांच छात्र स्कूल आये थे. पेश है उक्त स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था की पूरी रिपोर्ट. इंटर विज्ञान के किसी भी के शिक्षक नहीं इंटर कला के मात्र दो विषयों के हैं शिक्षक हाइस्कूल में पांच विषयों के शिक्षक की बहाली नहीं 1645 में से मात्र पांच छात्र आये थे क्लास करने सोनबरसा. मैट्रिक व इंटर के परीक्षार्थियों का कोर्स पूरा नहीं होना चिंता का विषय है. इसके लिए सरकार व स्कूल प्रबंधन के साथ-साथ छात्र-छात्राएं भी जिम्मेवार हैं. नंदीपत जीतू उच्च विद्यालय, सोनबरसा में वर्ग दशम में 635 व इंटर के दोनों संकाय में 120 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. शनिवार को उक्त छात्र-छात्राओं में से एक भी कक्षा में नहीं आये थे. वर्ग नवम के 809 में से पांच छात्र लालबाबू, कृष्ण, राजीव, मनीष व मन्नू कक्षा में मौजूद थे. पांच विषयों के शिक्षक नहीं विभिन्न विषयों के शिक्षक नहीं होने के चलते भी बच्चे स्कूल आना नहीं चाहते हैं. महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चे शायद स्कूल आना नहीं चाहते हैं. इसलिए बच्चे बेहतर पढ़ाई के लिए कोचिंग में जाना पसंद करते हैं. हाइस्कूल में दशम तक के छात्रों को पढ़ाने के लिए संस्कृत, अंग्रेजी, भौतिकी, रसायन व अर्थशास्त्र विषय के शिक्षक ही नहीं है. इंटर में मात्र दो शिक्षक इंटर में 120 छात्र-छात्रा नामांकित हैं, जिसमें कला के 56 शामिल हैं. मात्र हिंदी व इतिहास के शिक्षक विनीता कुमारी व रंजीत कुमार कार्यरत हैं. रंजीत कुमार अवकाश पर थे. विज्ञान विषयों के एक भी शिक्षक नहीं हैं. यही कारण है कि इंटर के एक भी छात्र-छात्रा कक्षा करने नहीं आते हैं. कंप्यूटर है, पर शिक्षक नहीं हाइस्कूल में दो वर्षों से कंप्यूटर खरीद कर रखा हुआ है लेकिन कंप्यूटर शिक्षक नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को कंप्यूटर की शिक्षा से वंचित रहना पड़ रहा है. पुस्तकालय भी व्यवस्थित नहीं हैं. वही प्रभारी विनोद कुमार महतो का कहना है कि पुस्तकों की कमी है. वर्ग कक्ष संचालन के लिए नौ कमरा है, लेकिन कभी भी ऐसा नहीं हुआ है कि छात्र-छात्राओं से सभी कमरा भरा रहा हो. किसी हाइस्कूल में कमरे की कमी है तो यहां की स्थिति ठीक विपरीत है. छह शौचालय व चार चापाकल हैं. प्रयोगशाला में कुछ सामान है, लेकिन उसका भी उपयोग नहीं हो पाता है. वर्ग कक्ष में नहीं लगता मन वर्ग नवम के पांचों छात्रों ने बताया कि दोस्तों को बार-बार कहने के बावजूद वह क्लास करने नहीं आता है. क्लास में साथियों की संख्या न के बराबर होने के कारण उन सबों का भी पढ़ने में मन नहीं लगता है. इसी कारण एक-दो क्लास कर घर लौट जाते हैं. कोचिंग पर पूरी तरह निर्भर है. कहते हैं प्रधान शिक्षक प्रधान शिक्षक लक्ष्मी महतो कहते हैं कि अधिक से अधिक बच्चे स्कूल आये और वह भी नियमित, की कोशिश की जा रही है. जो नहीं आते हैं वे सरकारी लाभ से वंचित रह जाते हैं. कोशिश होगी कि अनियमित आने वाले छात्र-छात्राओं को अगले वर्ग कक्ष में जाने से रोके.
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