पुपरी पीएचसी में सुविधाओं का घोर अभाव

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पुपरी पीएचसी में सुविधाओं का घोर अभाव फोटो नंबर- 41 पीएचसी, पुपरी पुपरी : स्थानीय पीएचसी में सुविधाओं का घोर अभाव है. दिन व दिन यहां की व्यवस्था चौपट होती जा रही है, पर कोई भी अधिकारी इस बदतर व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रति गंभीर नहीं है. हालांकि पीएचसी की बदतर व्यवस्था के पीछे […]

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पुपरी पीएचसी में सुविधाओं का घोर अभाव फोटो नंबर- 41 पीएचसी, पुपरी पुपरी : स्थानीय पीएचसी में सुविधाओं का घोर अभाव है. दिन व दिन यहां की व्यवस्था चौपट होती जा रही है, पर कोई भी अधिकारी इस बदतर व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रति गंभीर नहीं है. हालांकि पीएचसी की बदतर व्यवस्था के पीछे कई सवाल खड़ा होने लगा है. जानकारों का कहना है कि जो सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है, वह मरीजों को नहीं मिल रहा है, पर जो सुविधा है, वह भी यहां के अधिकारी व कर्मियों की लापरवाह कार्यशैली के चलते नसीब नहीं हो रहा है. — बैठने की जगह नहीं जदयू नेता सरोज कुमार यादव, शिव सेना के जिलाध्यक्ष दिलीप कुमार यादव, स्थानीय उमेद पासवान, अरविंद कुमार अमित व अमरेंद्र पांडेय समेत कई अन्य ने बताया कि पीएचसी की व्यवस्था ऐसी हो गयी है कि दूर-दराज से आये रोगियों व उनके परिजनों को बैठने तक के लिए यहां जगह नहीं है. दवाओं का घोर अभाव है. बाह्य कक्ष में पुरजा कटाने व दवा लेने के स्थानों पर शेड का अभाव है. महिला व प्रसव कक्ष में लगा पंखा एक माह से खराब है. ओटी में रौशनी की समुचित व्यवस्था नहीं है. जगह-जगह लगे नल का टोटी महीनों से खराब है. बाह्य कक्ष, विभिन्न जांच कक्ष व ओटी कक्ष की दीवारों पर धूल की परतें बैठी हुई है. बेड शीट नहीं बदला जाता है, दवा का घोर अभाव है, सर्पदंश से पीडि़त के लिए दो माह से दवा नहीं है, अस्पताल परिसर आवारा पशुओं का चारागाह बना हुआ है, पर इस व्यवस्था को देखने वाला कोई नहीं है. — प्रबंधक रहते हैं गायब नाम न छापने के शर्त पर एक कर्मी ने बताया कि अस्पताल प्रबंधक मनोज कुमार अक्सर गायब रहते हैं. उनके यहां आने का कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है. अक्सर विलंब से आना और समय से पहले चला जाना उनकी दिनचर्या है. अस्पताल में किस चीज की कमी है इससे उनको कोई बहस नहीं है. उनसे मुलाकात करना भी टेढ़ी खीर के बराबर है. — सर्पदंश के मरीजों की हो जाती है मौत बताया गया है कि अनुमंडल क्षेत्र के पुपरी, चोरौत, नानपुर, बाजपट्टी के अलावा जाले, बेनीपट्टी व मधवापुर प्रखंड के रोगी भी यहां उपचार के लिए आते हैं, पर दवा व समुचित उपचार के अभाव में उन्हें सदर अस्पताल या डीएमसीएच रेफर कर दिया जाता है. करीब दो माह में सर्पदंश के आधा दर्जन मरीजों की मौत दवा के अभाव में हो गयी है, पर इस बात पर कोई अधिकारी या कर्मी गंभीर नहीं है. बताया गया कि यहां जून माह में सर्पदंश के 28, जुलाई में 60, अगस्त में 52, सितंबर में 49 व अक्तूबर में 43 मरीज पहुंचे थे. — कहते हैं पीएचसी प्रभारी इस बाबत पीएचसी प्रभारी डॉ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि करीब दो माह से पीएचसी में सर्पदंश की दवा की आपूर्ति नहीं करायी गयी है. इसके लिए कई बार जिला में प्रतिवेदन भेजा जा चुका है. इधर, अस्पताल प्रबंधक श्री कुमार के मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका ताकि उनका पक्ष लिया जा सके.

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