युवराज से कैसे संकटग्रस्त नेता बन गये अभिषेक बनर्जी, ममता दीदी के भतीजे की 4 सबसे बड़ी चुनौतियां
अभिषेक बनर्जी. फाइल फोटो
Abhishek Banerjee TMC Split: कभी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अघोषित उत्तराधिकारी माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी आज अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े संकट से जूझ रहे हैं. 20 सांसदों की बगावत, एयरपोर्ट पर कथित हमला और केंद्रीय एजेंसियों के छापों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट.
खास बातें
Abhishek Banerjee TMC Split: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक समय था, जब ममता बनर्जी के बाद अभिषेक बनर्जी का नाम सबसे ऊपर आता था. उन्हें तृणमूल कांग्रेस का ‘भावी कप्तान’ और उत्तराधिकारी माना जाता था. लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद जैसे ही राज्य में 15 साल पुरानी पार्टी टीएमसी का किला ढहा, अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक सितारे गर्दिश में आ गये. आज वे एक ऐसे नेता के रूप में संघर्ष कर रहे हैं, जिनकी अपनी ही पार्टी के भीतर और बाहर से घेराबंदी हो चुकी है.
चुनौती नंबर 1: 20 सांसदों की बगावत और एनसीपीआई में विलय
अभिषेक बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकसभा में अपनी पार्टी के अस्तित्व को बचाना है. टीएमसी के 29 निर्वाचित सांसदों में से 20 सांसदों ने बगावत कर दी है. बागी सांसदों ने एक अनजान पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का ऐलान कर संसद में अलग बैठने की जगह मांगी है. हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर अभिषेक बनर्जी ने सभी 20 सांसदों की सदस्यता रद्द करने की याचिका (Disqualification Petition) दी है. उनका कहना है कि पार्टी सिंबल पर जीतकर धोखा देने वालों की संसद सदस्यता तुरंत जानी चाहिए.
चुनौती नंबर 2: कोलकाता एयरपोर्ट पर कथित जानलेवा हमला
अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें सिर्फ सियासी नहीं हैं, बल्कि अब उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गये हैं. हाल ही में दिल्ली से कोलकाता लौटते समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों ने एक सशस्त्र व्यक्ति को पकड़ा, जो कपड़े के नीचे बंदूक छिपाने की कोशिश कर रहा था. टीएमसी ने इसे अभिषेक बनर्जी की हत्या की साजिश करार दिया. राज्य में सत्ता बदलने के बाद से अभिषेक बनर्जी, कुणाल घोष समेत कई टीएमसी नेताओं पर आम जनता और विरोधी गुट के लोग लगातार हमले और नारेबाजी कर रहे हैं. बड़े-बड़े नेताओं पर अंडे फेंके जा चुके हैं.
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चुनौती नंबर 3: केंद्रीय एजेंसियों का कसता शिकंजा
भ्रष्टाचार के आरोपों और केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED-CBI) का दबाव अभिषेक बनर्जी के लिए जी का जंजाल बना हुआ है. खुद अभिषेक बनर्जी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पिछले 7 दिनों के भीतर उन्हें 5 बार समन जारी किया जा चुका है. यही नहीं, जांच एजेंसियों ने उनके और ममता बनर्जी के आवास पर भी छापेमारी की है. अभिषेक का आरोप है कि बागी सांसद केंद्रीय एजेंसियों के डर से या फिर पैसों के लालच में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पाले में जा रहे हैं.
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चुनौती नंबर 4: कोर्ट का नोटिस और पार्टी के भीतर सीनियर नेताओं से टकराव
अभिषेक बनर्जी के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं. कलकत्ता हाई कोर्ट ने एक पुरानी रैली के दौरान सड़क जाम करने के मामले में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को अवमानना का नोटिस जारी किया है. दूसरी तरफ, पार्टी के भीतर कल्याण बनर्जी जैसे कद्दावर और पुराने नेता अब खुलकर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली को चुनौती दे रहे हैं. पुराने नेताओं का मानना है कि अभिषेक की रणनीतियों के कारण ही पार्टी आज इस मोड़ पर पहुंची है.
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By Mithilesh Jha
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