सात अरब 50 करोड़ का हिसाब नहीं दे रहे सीतामढ़ी के डीडीसी

Updated at : 21 Feb 2020 1:27 AM (IST)
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सात अरब 50 करोड़ का हिसाब नहीं दे रहे सीतामढ़ी के डीडीसी

सीतामढ़ी : जिप के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी प्रभात कुमार कतिपय कारणों से पंचायती राज विभाग से आवंटित सात अरब 50 करोड़ एक लाख 24 हजार रुपये का हिसाब नहीं दे रहे है. विभाग बार-बार पत्र भेज उक्त राशि के खर्च का हिसाब-किताब मांग रहा है, पर तमाम पत्र जिप कार्यालय में पहुंचते ही […]

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सीतामढ़ी : जिप के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह डीडीसी प्रभात कुमार कतिपय कारणों से पंचायती राज विभाग से आवंटित सात अरब 50 करोड़ एक लाख 24 हजार रुपये का हिसाब नहीं दे रहे है. विभाग बार-बार पत्र भेज उक्त राशि के खर्च का हिसाब-किताब मांग रहा है, पर तमाम पत्र जिप कार्यालय में पहुंचते ही फाइलों में बंद हो जा रहा है.

डीएम के स्तर से भी डीडीसी को एक बार नहीं, कई बार पत्र भेजकर राशि के उपयोगिता प्रमाण-पत्र की मांग की जा चुकी है, लेकिन स्थिति ज्यों कि त्यों है. इसकी खबर मिलने पर डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा ने पुन: नाराजगी प्रकट करते हुए डीडीसी को पत्र भेज उपयोगिता प्रमाण-पत्र विभाग को भेजने के साथ ही विलंब के लिये स्पष्टीकरण देने को कहा है.
अगली किस्त की राशि पर रोक
सात अरब 50 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब नहीं मिलने से कारण राज्य सरकार ने पंचम वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अगली किस्त की राशि देने पर रोक लगा दिया है. द्वितीय किस्त में 53.03 करोड़ का आवंटन मिलना था.
पंचायती राज के प्रधान सचिवने पांच फरवरी 2020 को डीएम को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र के अभाव में राशि रोकी गयी है. प्रधान सचिव के पत्र के आलोक में डीडीसी को पत्र भेज डीएम ने कहा है, स्वाभाविक है कि राशि के आभाव में योजनाओं का कार्यान्वयन प्रभावित हो रहा होगा. कहा है, जिला में अंकेक्षण कार्य के लिए अंकेक्षक की नियुक्ति की जा चुकी है. बावजूद अंकेक्षण नहीं होना चिंताजनक है.
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