दूसरे ठेकेदार ने भी छोड़ा काम
Updated at : 06 Dec 2019 12:39 AM (IST)
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वर्ष 2016 में करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से योजना परशुरू हुआ था काम सीतामढ़ी : चार साल पूर्व वर्ष 2016 में जब शहर में नल से जल की आपूर्ति मिलने की खबर शहरवासियों को मिली थी, तब नगरवासियों को लगा था कि देर से ही सही, अब उन्हें भी दूसरे विकसित शहरों की […]
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वर्ष 2016 में करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से योजना परशुरू हुआ था काम
सीतामढ़ी : चार साल पूर्व वर्ष 2016 में जब शहर में नल से जल की आपूर्ति मिलने की खबर शहरवासियों को मिली थी, तब नगरवासियों को लगा था कि देर से ही सही, अब उन्हें भी दूसरे विकसित शहरों की तरह नल से जल की आपूर्ति मिलेगी. योजना पर काम शुरू हुए करीब चार साल बीतने को है, लेकिन शहरवासियों का नल से जल का सपना पूरा नहीं हो सका है.
बताना जरूरी है कि वर्ष 2016 में करीब 24 करोड़ की लागत से नगरवासियों को नल से जल की आपूर्ति कराने की योजना बनी थी. बिहार जल निगम बोर्ड द्वारा जेएस इंटरप्राइजेज नामक कंपनी को शहर के हर घर में नल से जल की आपूर्ति कराने की जिम्मेदारी दी गयी थी. नगर के अलग-अलग वार्डों में चार जलमीनार का निर्माण भी कराया गया. संवेदक द्वारा नगर के अधिकतर वार्डों में पाइप लाइन भी बिछाया गया. नगरवासियों को राह देखते-देखते चार साल बीतने को है, लेकिन उन्हें नल से जल की आपूर्ति नहीं मिल सकी है.
आंखें थक चुकी हैं इंतजार करके : नगर के उपमुख्य पार्षद दीपक मस्करा, पार्षद संजु गुप्ता, संजय शर्मा, मो इरशाद अहमद व मनीष कुमार समेत कई वार्ड पार्षदों की शिकायत है कि ठेकेदार जेएस इंटरप्राइजेट द्वारा एक तो कछुये की गति से काम किया गया, उसमें भी आधा-अधूरा काम छोड़ दिया गया. कई वार्डों में पाइप लाइन बिछाने का काम आज भी अधूरा ही है.
योजना पूरा होने का इंतजार करते-करते अब शहरवासियों की आंखें भी थक चुकी है, लेकिन उन्हें नल से जल की आपूर्ति नहीं मिल सकी है. हालांकि, पार्षदों समेत आम जनता की बार-बार शिकायत मिलने के बाद बोर्ड द्वारा अधूरे कामों को पूरा करने की जिम्मेदारी रामआधार साह नामक एक नये ठेकेदार को दी गयी. नये ठेकेदार ने काम भी शुरू किया.
नगरवासियों की एक बार फिर उम्मीद बढ़ गयी थी कि देर से ही सही अब उन्हें योजना का लाभ जरूर मिलेगा, लेकिन नगर वासियों को एक बार फिर निराशा हाथ लगी. नगरवासियों को आज भी नल से जल की आपूर्ति का इंतजार है.
कुछ माह पूर्व जब नये ठेकेदार से प्रभात खबर की बात हुई थी, तब उन्होंने बताया था कि अधूरे काम को पूरा करने के लिए उन्हें करीब पांच करोड़ रुपये का ठेका मिला है.
लेकिन, भुगतान की प्रक्रिया में समस्या उत्पन्न होने के कारण काम की गती धीमी है. करीब 50 लाख रुपये का व्यय करने के बाद भी भुगतान लटका दिया गया, जिसके चलते योजना को पूरा करने में देरी हो रही है. उन्होंने बताया था कि यदि समय से भुगतान हो जाता तो योजना को पूरा करने में छह माह से अधिक समय नहीं लगता.
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