चुनाव ने दिया अप्रैल में बजने वाली शहनाइयों पर ''''''''टेंशन''''''''

Updated at : 15 Apr 2024 9:31 PM (IST)
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चुनाव ने दिया अप्रैल में बजने वाली शहनाइयों पर ''''''''टेंशन''''''''

इस बार लोकसभा चुनाव और शादी के मुहूर्त साथ-साथ टकरा गये हैं. यही कारण है कि अप्रैल माह में शादी का दिन तय करने वाले वर-वधू पक्ष परेशान हैं.

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नोखा. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद भले ही नेताओं के वाहन शहर की सड़कों से लेकर गांव की टूटी-फूटी सड़कों पर फर्राटे के साथ दौड़ने लगे हों, लेकिन चुनाव की तारीख को घोषणा ने उन लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, जिन्होंने इस दौरान विवाह की तिथियां तय कर ली हैं. अब ऐसे लोग अपनी तय तिथियां बदलने लगे हैं. इस बार लोकसभा चुनाव और शादी के मुहूर्त साथ-साथ टकरा गये हैं. यही कारण है कि अप्रैल माह में शादी का दिन तय करने वाले वर-वधू पक्ष परेशान हैं. भले ही चुनाव होने में अभी एक माह से अधिक समय बाकी हैं. लेकिन जिनके घर अप्रैल माह में शादी है, उन्हें विवाह समारोह की व्यवस्था करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जिला प्रशासन ने इलेक्शन के लिए गाड़ियों के कागजात जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. वाहनों की धरपकड़ के डर से वाहन मालिक बरात ले जाने व लाने की बुकिंग करने से कतरा रहे हैं. उन्हें डर है कि गाड़ी की बुकिंग की गयी और चुनाव के लिए गाड़ी पकड़ी गयी, तो परेशानी आ सकती है. हालांकि, कुछ गाड़ी वाले महंगे व मुंहमांगे दामों पर गाड़ी की बुकिंग कर रहे हैं. चुनाव के साथ ही अप्रैल माह में अब की बार खूब शहनाइयां भी बजेंगी. नोखा प्रखंड में सैकड़ों शादियां भी होंगी. वहीं, मतदान की तिथियों ने अब की बार विवाह के शुभ मुहूर्त को भी बदलने पर मजबूर कर दिया है.

18 से 28 अप्रैल तक है विवाह का शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों का कहना है कि इस वर्ष अप्रैल में विवाह के कई शुभ मुहूर्त हैं. पंडित चंद्रानंद मिश्रा ने बताया कि अप्रैल माह में शादी का शुभ मुहूर्त 18, 19, 20, 21, 22, 23, 26 व 28 अप्रैल को है. अपने पुत्र का विवाह तय कर चुके शहर के कई लोगों ने बताया कि चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा संकट वाहनों का होगा. मालिक वाहन की मुंहमांगी कीमत मांगेंगे. यहीं नहीं, वाहनों को ले जाने के लिए प्रमाणपत्र की भी आवश्यकता होगी. अप्रैल 21 व 26 को सबसे अधिक शादियां हैं. इन शादियों के लिए काफी पहले से मंडप, धर्मशाला व रेस्टोरेंट आदि बुक करा दिये गये हैं. बसों की धरपकड़ तेज होने के कारण शादियों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. पंडित अनिल त्रिपाठी ने बताया कि जिन लोगों ने पूर्व में अपनी बेटी या बेटे की शादी की तिथि तय कर दी थी. वे वे चुनाव की घोषणा के बाद से अब नयी तिथि के बारे में जानकारी लेने के लिए आ रहे हैं.

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