झारखंडी मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, सोन का किनारा हर-हर महादेव से गूंजा

ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर में जलाभिषेक के लिए पहुंचे श्रद्धालु | Prabhat Khabar Network
सावन माह की पहली सोमवार को डेहरी-डालमियानगर का ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर आस्था के सैलाब से सराबोर हो गया. लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र सोन नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन शिवालय में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर मन्नतें मांगीं.
डेहरी (रोहतास) से मुकेश पांडेय की रिपोर्ट
Jharkhandi Mandir Dehri : सावन माह की पहली सोमवारी पर पवित्र सोन नदी के तट पर स्थित ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर सहित पूरे डेहरी-डालमियानगर क्षेत्र के शिवालयों में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा. अहले सुबह से ही श्रद्धालु हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प और पूजन सामग्री लेकर भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए मंदिरों की ओर बढ़ते रहे. पूरे दिन "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से मंदिर परिसर तथा आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा.
सोन नदी के एनिकट के समीप स्थित ऐतिहासिक झारखंडी मंदिर में श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली. महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा श्रद्धालु लंबी कतारों में अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हुए पूरी श्रद्धा एवं अनुशासन के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक करते रहे. श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की.
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे. मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए लगातार व्यवस्था संभाले रखी. महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे दर्शन-पूजन शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ.
भीड़ नियंत्रण के लिए प्रशासन की विशेष सतर्कता
झारखंडी मंदिर जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर लगभग 500 मीटर पहले से ही वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी. इससे मंदिर परिसर में अनावश्यक भीड़ और जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई. श्रद्धालुओं ने पैदल चलकर मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया. यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में पुलिसकर्मियों ने पूरे दिन मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारी निभाई.
केवल झारखंडी मंदिर ही नहीं, बल्कि शहर के 12 पत्थर मुहल्ला स्थित शिव मंदिर, कैनाल रोड स्थित शिव मंदिर, कलकतिया पुल के समीप स्थित शिव मंदिर, रत्तू बिगहा स्थित शिवालय, डालमियानगर सब्जी मंडी के समीप स्थित शिव-हनुमान मंदिर, वार्ड संख्या-एक स्थित शिव मंदिर सहित आसपास के गांवों के सभी प्रमुख शिवालयों में भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही. अनेक श्रद्धालुओं ने उपवास रखकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की तथा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जल, दूध एवं बेलपत्र अर्पित किए.
आस्था का प्रमुख केंद्र है झारखंडी मंदिर
सोन नदी के पावन तट पर स्थित झारखंडी मंदिर क्षेत्र की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. वर्षों पुराना यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्ता के कारण दूर-दराज के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन माह, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्राकृतिक वातावरण और सोन नदी के तट पर स्थित होने के कारण यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है. प्रत्येक वर्ष सावन की सोमवारी पर यहां लगने वाला श्रद्धालुओं का जनसैलाब इस मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और लोगों की अटूट आस्था का प्रमाण बनता है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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