तरैया के पूर्वी भाग की छह पंचायतों के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क भंग

Updated at : 30 Sep 2020 1:38 AM (IST)
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तरैया के पूर्वी भाग की छह पंचायतों के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क भंग

तरैया प्रखंड में दूसरी बार बाढ़ की भीषण विभीषिका ने लोगों पर कहर बरपा रही है. बाढ़ के पानी की तेज रफ्तार के आगे किसी का बस नहीं चला.

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तरैया : तरैया प्रखंड में दूसरी बार बाढ़ की भीषण विभीषिका ने लोगों पर कहर बरपा रही है. बाढ़ के पानी की तेज रफ्तार के आगे किसी का बस नहीं चला. तरैया बाजार से पूर्वी भाग में स्थित लगभग आधा दर्जन पंचायतों के दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क मात्र 12 घंटे में भंग हो गया. इस बार की बाढ़ के पानी में काफी तेज रफ्तार होने के कारण व्यवसायियों को दुकानों से सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला. तरैया में सोमवार को बाढ़ का पानी दस्तक दिया. सभी कार्यालयों के पदाधिकारियों व कर्मियों द्वारा मंगलवार को कार्यालय से जरूरी कागजात व फाइल निकाल कर अस्थायी कार्यालय खोलकर चलाने की चर्चा हुई. तब तक सोमवार को रात में ही बाढ़ का पानी ने चारों तरफ से घरे लिया व सड़क से संपर्क भंग हो गये.

सड़क पर बह रहा है तीन से चार फुट पानी

तरैया बाजार से सिरमी शितलपट्टी, उसरी रोड में सिरमी बिनटोली के समीप सड़क पर तीन से चार फुट पानी बह रहा है. वहीं तरैया से लौंवा पिपरा सड़क पर चार फुट पानी बह रहा है. तरैया बाजार स्थित भूतनाथ चौक- मध्य विद्यायल के मुख्य गेट पर तीन फुट पानी बह रहा है. खदरा नदी किनारे से गुजरने वाली मुख्य सड़क देवरिया हाइस्कूल रोड में चार फुट पानी बह रहा है. तरैया-पानापुर मुख्य सड़क में खराटी गांव से लेकर पोखरेड़ा तक एसएच सड़क 104 को पार कर पानी गिर रहा है. देवरिया रोड स्थित आधा दर्जन प्राइवेट नर्सिग होम बाढ़ के पानी में डूबा हुआ है. तरैया रेफरल अस्पताल तक पहुंचने का कोई साधन नहीं है. 27 जुलाई को आयी बाढ़ के अपेक्षा दूसरी बार आयी बाढ़ अधिक है.

बाढ़पीड़ित भगवान भरोसे, किसी प्रकार की सरकारी सुविधा नहीं

प्रखंड क्षेत्र में आयी भीषण बाढ़ की विभीषिका में सरकारी तंत्र फेल है. सरकारी स्तर पर किसी भी तरह की सुविधाएं नदारत है. बाढ़पीड़ितों के लिए मोटर बोट की कौन कहे, नाव तक कि सुविधा नहीं मुहैया करायी गयी है. बाढ़पीड़ितों के बीच त्राहिमाम मचा हुआ है. बाढ़पीड़ित लोग कमर भर पानी हेल कर तरैया पहुंचकर सरकारी पदाधिकारी को खोज रहे है. सरकारी पदाधिकारी व कर्मी ढूंढने से नहीं मिल रहे है. सरकारी तंत्र फेल है. वहीं जनप्रतिनिधि चुनाव आचार सहिंता के कारण बाढ़पीड़ितों को मदद करने के लिए आगे नहीं आ रहे है. 24 घंटे बीत जाने के बाद भी बाढ़पीड़ितों को चूड़ा-मीठा तक नहीं नसीब हुए .

posted by ashish jha

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