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Chhapra News : न्यायालय कर्मियों की हड़ताल से नहीं हुई सुनवाई व रिहाई, लोगों के हाथ लगी निराशा

Updated at : 16 Jan 2025 9:56 PM (IST)
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Chhapra News : न्यायालय कर्मियों की हड़ताल से नहीं हुई सुनवाई व रिहाई, लोगों के हाथ लगी निराशा

Chhapra News : व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाने से व्यवहार न्यायालय के सारे न्यायालीय कार्य ठप हो गये.

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छपरा (कोर्ट). व्यवहार न्यायालय के कर्मचारियों द्वारा अपनी लंबित मांगों को लेकर गुरुवार से अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाने से व्यवहार न्यायालय के सारे न्यायालीय कार्य ठप हो गये. न्यायालय में न्यायिक पदाधिकारी अधिवक्ता व पक्षकार तो आये लेकिन न्यायालय कर्मियों के कार्य पर नहीं रहने के कारण किसी भी कार्य का संपादन नहीं हो सका और समस्त न्यायालीय कार्य ठप रहे. न्यायालय कर्मियों ने न्यायालय परिसर में घूम घूम कर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से जहां समूचे अदालतों के न्यायिक कार्य ठप हो गये वहीं इसका असर जिलावासियों पर भी पड़ा. अपने मामलों की सुनवाई, गवाही जमानत की फाइलिंग जमानत पर सुनवाई व जेल में बंद अभियुक्तों की रिहाई को लेकर आये हजारों पक्षकार दुःखी मन से न्यायालय से घर को लौट गये. बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष हिरानाथ ठाकुर ने बताया कि राज्य भर के अदालतों के कर्मचारी पटना उच्च न्यायालय की उनकी मांगों पर उदासीनता और राज्य सरकार की हठधर्मिता के कारण हड़ताल पर जाने को विवश हो गए हैं. बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश्वर तिवारी ने बताया कि पूर्व में एक जुलाई 2024 को घोषित हड़ताल का कार्यक्रम पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के आश्वासन के बाद टाल दिया गया था कि उनकी मांगों पर दो माह के भीतर ठोस निर्णय लिया जायेगा परन्तु कोई निर्णय नहीं लिया गया. अध्यक्ष ने बताया कि उनकी चार सूत्री मांगों यथा स्नातक योग्यता के मुताबिक स्नातक वेतनमान, अनुकम्पा नियुक्ति, कालबद्ध प्रोन्नति एवं सेवा शर्त नियमावली में संशोधन पर विचार करने की जगह उल्टे कर्मचारियों को दमनात्मक कार्रवाई का धौंस दिखा उन्हें डराया जाने लगा. उन्होंने कहा कि अदालतों में कर्मचारियों की हड़ताल से न्यायिक सेवा चरमरा गयी हैं, कैदियों को जेल भेजने, रिहाई आदेशों, जमानत आवेदनों पर सुनवाई जैसे कई अत्यावश्यक न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ हैं. जिसका जिम्मेदार संयुक्त रूप से पटना उच्च न्यायालय व बिहार सरकार के विधि विभाग और वित्त विभाग है. न्याय के मंदिर में सेवा देने वाले कर्मचारियों को दशकों से स्नातक स्तर का वेतनमान व प्रोन्नति,अनुकंपा पर नियुक्ति, चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की कालबद्ध प्रोन्नति और विशेष राज्य न्यायिक कर्मचारी व अधिकारी कैडर का निर्माण आदि में कोई कार्रवाई नहीं कि गई है, नतीज़तन न्याय के मंदिर में ही न्यायिक कर्मचारी अपनी मांगों की पूर्ति तक हड़ताल पर जाने को विवश हो गये है न्यायालय के कर्मचारियों ने आज अपनी मांगों को लेकर न्यायालय गेट पर रोषपूर्ण प्रदर्शन भी किया. इस अवसर पर राजेश्वर तिवारी अध्यक्ष बिहार राज्य व्यवहार न्यायालय कर्मचारी संघ, श्रवण कुमार जिला सचिव हीरा नाथ ठाकुर जिला अध्यक्ष, राजीव कुमार, चमन कुमार, विभूति त्रिवेदी, रवि प्रकाश, विकास रंजन, विकास चंद्रा, मनीष तिवारी, राहुल कुमार, मनोहर प्रसाद, रघुबंश सिंह, सरोज कुमार सिंह, विकास कुमार, विशाल कुमार, अटल बिहारी सिंह, चंदन कुमार, संजय कुमार, अश्वनी कुमार, राजेंद्र भगत, दीनानाथ प्रसाद, ब्रजेश कुमार, जीवछ कुमार, रामकृपाल पासवान सहित सभी कर्मचारियों ने बैनर पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया.

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