प्याज की बढ़ी कीमत से बिगड़ा जायका

Published at :27 Aug 2015 11:52 PM (IST)
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प्याज की बढ़ी कीमत से बिगड़ा जायका

सावन में है यह हाल, तो आगे क्या होगा, लोगों की जेबें हो रहीं ढीली छपरा (सारण) : प्याज की बढ़ती कीमत से सभी परेशान हैं. सावन में प्याज की खपत आम तौर पर काफी कम होती है, फिर भी प्याज का दाम 70 रुपये प्रति किलो पार कर गया है, तो आनेवाले महीने में […]

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सावन में है यह हाल, तो आगे क्या होगा, लोगों की जेबें हो रहीं ढीली
छपरा (सारण) : प्याज की बढ़ती कीमत से सभी परेशान हैं. सावन में प्याज की खपत आम तौर पर काफी कम होती है, फिर भी प्याज का दाम 70 रुपये प्रति किलो पार कर गया है, तो आनेवाले महीने में प्याज की कीमत कहां पहुंचेगी.
सावन में जब यह हाल है तो, आगे क्या होगा, यह सवाल न केवल गृहिणियों बल्कि आम लोगों के जेहन में कौंध रहा है. प्याज की मूल्यों में आयी उछाल ने लोगों के घरों का बजट बिगाड़ दिया है और इसको लेकर गृहिणियां विशेष रूप से परेशान हैं. इसने लोगों का जायका ही बिगाड़ दिया है. प्याज काटने से नहीं, इसका दाम पर सुन कर ही लोगों के आंसू निकल रहे हैं. यहां के बाजारों में आयातित प्याज पर ही कारोबार निर्भर है. खपत के अनुपात में प्याज का उत्पादन जिले में काफी कम है.
सावन में प्राय: अधिकतर हिंदू परिवार के लोग प्याज नहीं खाते हैं. कई जगह लहसून-प्याज रहित भोजन ही पकता है. मांसाहारी भोजन तो बिल्कुल ही नहीं बनता है. खास कर मीट या मुरगा बनाने में प्याज का प्रयोग किया जाता है. यहां तक कि कई होटलों में प्याज रहित खाना बनाया जाता है.
आयातित प्याज निर्भर है बाजार : जिले की सब्जी मंडी आयातित प्याज पर निर्भर है. यहां मुख्य रूप से मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश तथा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से प्याज का आयात किया जाता है. जिले के थोक व्यवसायी दूसरे राज्यों से मंगाये गये प्याज को ही सभी खुदरा विक्रेताओं को उपलब्ध कराते हैं. वैसे, सबसे अधिक महाराष्ट्र और तमिलनाडु के प्याज की मांग अधिक होती है.
खपत के अनुपात में कम है उत्पादन : जिले में खपत के अनुपात में प्याज का उत्पादन काफी कम है. कम उत्पादन तथा खपत अधिक होने के कारण भी प्याज की कीमत अधिक होने की बात कही जा रही है. इस जिले में मुख्य खाद्यान्न का उत्पादन ही होता है और जलजमाव वाला इलाका रहने के कारण प्याज की खेती कम होती है. यहां प्याज भंडारण की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.
इसका असर प्याज की कीमतों पर पड़ रहा है. खपत पूरा करने के लिए दूसरे राज्यों से प्याज आयातित करने से कीमतें बढ़ जाती हैं.
जमाखोरी की है आशंका : प्याज की कीमतों में आयी उछाल के कारण लोगों में इस बात की आशंका है कि जमाखोरी की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है. प्याज के बड़े व्यवसायियों के गोदाम में भी प्याज भरा पड़ा है. जिले के कोल्ड स्टोरेज में रखे गये प्याज की भी अभी निकासी नहीं हो रही है, जिसे प्याज की कीमत बढ़ने का कारण माना जा रहा है.
25 मीटरिक टन के हैं 10 भंडार : राष्ट्रीय बागबानी मिशन के द्वारा पिछले वर्ष 25 मीटरिक टन क्षमता के 10 गोदाम बनवाये गये हैं. इसके लिए 10 किसानों को गोदाम बनवाने के लिए अनुदान दिया गया था, उन किसानों ने नवनिर्वाचित गोदामों में प्याज का भंडारण किया है. हालांकि इस वर्ष उत्पादन कम होने के कारण लक्ष्य के अनुरूप भंडारण नहीं हो सका है.
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