हर सीट को ले दलों में कशमकश की स्थिति

धार्मिक, ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व से लबरेज तथा राज्य को कई मुख्यमंत्री व एक उप मुख्यमंत्री देने वाला सारण राजनैतिक रूप से काफी जागरूक है. जिले में विधानासभा की दस सीटें हैं. पिछले चुनाव में इनमें से सात सीटें एनडीए को और तीन सीटें राजद को मिलीं थीं. एनडीए में भाजपा के खाते में चार […]
धार्मिक, ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व से लबरेज तथा राज्य को कई मुख्यमंत्री व एक उप मुख्यमंत्री देने वाला सारण राजनैतिक रूप से काफी जागरूक है.
जिले में विधानासभा की दस सीटें हैं. पिछले चुनाव में इनमें से सात सीटें एनडीए को और तीन सीटें राजद को मिलीं थीं. एनडीए में भाजपा के खाते में चार और जदयू के खाते में तीन सीटें गयीं थीं. 2014 के उपचुनाव में भाजपा की एक सीट राजद ने झटक ली थी. इस लिहाज से जिले में अभी सबसे ज्यादा सीटें राजद के पास हैं. इस बार गंठबंधन का चुनावी समीकरण बदल चुका है. लिहाजा हर दल को अपनी ताकत का नये सिरे से मूल्यांकन करना पड़ रहा है.
सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे में विक्षुब्ध राजनीति से निबटने की होगी. टिकट से वंचित रहने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नेता चुनावी नतीजे का अहम कोण होंगे.
छपरा
प्रत्याशियों के नाम पर अटकलें
पिछले चुनाव में छपरा विधानसभा सीट पर भाजपा के जनार्दन सिंह सीग्रीवाल विजयी हुए थे. तब भाजपा-जदयू गठबंधन था.
सीग्रीवाल 2014 में महाराजगंज से लोकसभा का चुनाव लड़े और संसद पहुंचे. उनके सांसद बनने से खाली हुई इस विधानसभा सीट के लिए 2014 में उपचुनाव हुआ. इसमें राजद के रणधीर कुमार सिंह ने भाजपा के कन्हैया सिंह को हराया था. छपरा सीट पर 1956 से कांग्रेस और समाजवादियों का कब्जा रहा.
इस बार के चुनाव में सीटिंग गेटिंग के तहत महागंठबंधन में इस सीट के राजद के हिस्से में जाने की उम्मीद ज्यादा है. भाजपा फिलवक्त में टिकट के करीब आठ दावेदार हैं.
अब तक
पिछला चुनाव जीतने वाले जर्नादन सिंह सीग्रीवाल अब सांसद हैं. उपचुनाव में राजद ने यह सीट भाजपा से छीनी.
इन दिनों
जदयू के हर घर दस्तक के बाद महागंठबंधन की स्वाभिमान महारैली की तैयारी चल रही है. भाजपा का रथ गांव-गांव घूम रहा है.
मुद्दे
शहरी सुविधाओं का विकास
रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण
नगर निगम का दर्जा
खनुआ नाले का विकास
परसा
नजर अभी सीट बंटवारे पर
परसा पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय का चुनाव क्षेत्र रहा है. स्व राय यहां से 1952 से 1980 तक लगातार चुनाव जीतते रहे.बीच में, 1977 के जेपी लहर में एक बार वह मुख्यमंत्री रहते हुए जनता पार्टी के रामानंद राय से हार गये थे, परंतु 1980 में उनकी वापसी भी हुई थी. उनके निधन के बाद पत्नी पार्वती देवी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतीं एवं 1985 से 2005 तक उनके पुत्र चंद्रिका राय लगातार एमएलए रहे.
वह राजद सरकार में मंत्री भी रहे. 2005 में जदयू के छोटेलाल राय ने इस सीटपर कब्जा किया. वह 2010 में भी जीते. महागंठबंधन में इस बार यह सीट किसके हिस्से जाती है, अभी यह देखना दिलचस्प होगा.
महागठबंधन बनने पर राजद से चंद्रिका व जदयू से छोटेलाल की दावेदारी आमने-सामने है.
अब तक
यह सीट सबसे ज्यादा समय तक पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के परिवार के कब्जे में रही है. मंत्री के परिवार के दबदबा वाले क्षेत्र में जदयू के सीटिंग प्रतिनिधि है एवं राजद की जदयू की मजबूत दावेदारी है.
इन दिनों
भाजपा का परिवर्तन रथ क्षेत्र में घूम रहा है. जदयू का ही घर दस्तक कार्यक्रम पूरा हो चुका है. राजद बैंठकें जारी.
मुद्दे
चंवर क्षेत्र से जल निकासी
नहरों व राजकीय नलकूपों का जीर्णोद्धार
पेयजल, सड़क व बिजली की स्थिति में सुधार.
गड़खा
दावेदारों में पूर्व विधायक ज्यादा
गड़खा इस जिले का एक मात्र सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र हैं. पिछले चुनाव में भाजपा के ज्ञानचंद मांझी राजद के मुनेश्वर चौधरी को हराया था. यह उनकी लगातार दूसरी जीत थी.
चौधरी उससे पहले लगातार तीन बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके थे. महागंठबंधन में चौधरी की टिकट की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है. टिकट नहीं मिलने पर वह निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते हैं. उनका निर्दलीय लड़ने का इतिहास रहा है.
हालांकि लगातार चार बार विधायक रहे कांग्रेसी नेता रघुनंदन मांझी भी दावेदारी ठोंक रहे हैं. वहीं, ज्ञानचंद मांझी सीटिंग गेटिंग के आधार पर एनडीए के इस बार भी उम्मीदवार हो सकते हैं. फिलवक्त सीट के बंटवारे पर ही नेताओं की नजर है.
अब तक
इस क्षेत्र का एक से ज्यादा बार प्रतिनिधित्व का अवसर भाजपा, राजद व कांग्रेस तीनों को मिल चुका है.
इन दिनों
भाजपा का विस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं महासंपर्क अभियान जारी. महागंठबंधन स्वाभिमान महारैली की तैयारी में जुटा.
मुद्दे
छपरा-रेवा रेल लाइन निर्माण
गड़खा बाइपास का निर्माण
गड़खा बाजार को जाम की समस्या से निजात
पाने का पानी.
तरैया
टिकट की खातिर तेवर कड़े
इस विधानसभा सीट पर पिछले चुनाव में भाजपा के जनक सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी व पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह को हराया था.
इसके पहले, 1995 से लगातार राजद के रामदास राय चुनाव जीतते रहे थे. उनके निधन के बाद राजद ने छपरा के विधायक रामप्रवेश राय को 2010 में यहां से टिकट दिया था, लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे.
राय के भाई मुंद्रिका प्रसाद राय भी पिछली बार यहां से निर्दलीय उम्मीदवार थे. उन्हें तीसरा स्थान मिला था. इस बार महागठबंधन से राजद के संभावित प्रत्याशी के रूप में मुंद्रिका प्रसाद राय जनसंपर्क कर रहे है.
वहीं जदयू के प्रदेश महासचिव शैलेंद्र प्रताप भी दावेदारी पेश कर रहे हैं. भाजपा की सीटिंग सीट होने के कारण एनडीए में उसकी दावेदारी व जनक सिंह की उम्मीदवारी निश्चित मानी जा रहा है.
अब तक
पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे पूर्व विधायक व कांग्रेस प्रत्याशी तारकेश्वर सिंह भाजपा में शामिल हो गये हैं.
तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी मुंद्रिका प्रसाद राय ने राजद उम्मीदवार का दावा किया है.
इन दिनों
जदयू का कार्यकर्ता सम्मेलन व घर-घर दस्तक कार्यक्रम हो चुका है. राजद व भाजपा के प्रत्याशी जनसंपर्क कर रहे हैं.
मुद्दे
सड़कों की मरम्मतत्न सिंचाई की व्यवस्था त्नरोजगार के साधन
कृषि उपज की किसानों को सही कीमतत्ननियमित बिजली.
सोनपुर
हाइप्रोफाइल सीट रहा है सोनपुर
सोनपुर हाइप्रोफाइल सीट है. यहां से तीन पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास, लालू प्रसाद एवं राबड़ी देवी तथा एक पूर्व उप मुख्यमंत्री रामजयपाल सिंह यादव चुनाव लड़ चुके हैं.
2010 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के विनय कुमार सिंह ने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की पत्नी व पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 20 हजार 685 मतों के अंतर से पराजित किया था. यहां का वह दूसरी बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. यह राजद का मजबूत गढ़ माना जाता है.
इस बार पूर्व विधायक रामानुज प्रसाद भी सक्रिय है. राजग से भाजपा के विनय कुमार सिंह का टिकट तय माना जा रहा है. महागठबंधन में सब कुछ ठीक रहा, तो लालू प्रसाद के परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ सकता है.
अब तक
पिछली बार पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी यहां से चुनाव हारीं. पूर्व विधायक रामानुज प्रसाद भी सक्रिय है.
इन दिनों
महागंठबंधन की स्वाभिमान महारैली की तैयारी जारी. भाजपा प्रधानमंत्री का संदेश गांव-गांव पहुंचा रही है.
मुद्दे
दियारा क्षेत्र का विकासत्न सोनपुर मेले में स्थानीय लोगों की भागीदारी
शहरी क्षेत्र में ड्रेन सिस्टम व जलापूर्ति की व्यवस्था.
मांझी
राजनीति में रिश्ते भी दावं पर
मांझी विधानसभा सीट पर अभी जदयू का कब्जा है. इसके गौतम सिंह लगातार तीन बार यहां से विधायक चुने गये हैं. सिंह राज्य सरकार में मंत्री भी रहे हैं.
उन्होंने 2010 के चुनाव में राजद के हेमनारायण सिंह को मतों के बड़े अंतर से पराजित किया था. अब महागठबंधन में राजद-जदयू एक साथ हैं. सीटिंग एमएलए होने के नाते जहां अपनी उम्मीवारी तय मान रहे हैं, वहीं हेमनारायण सिंह भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं.
ऐसे में महागंठबंधन में टिकट को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है. हेम के बागी होने की भी संभावना जतायी जा रही है. वहीं, पूर्व मंत्री कांग्रेस के रवींद्रनाथ मिश्र ‘हम’ में शामिल हो गये हैं. रालोसपा व लोजपा भी सक्रिय है. भाजपा से दर्जन भर नाम चर्चा में हैं.
अब तक
पूर्व मंत्री रवींद्रनाथ मिश्र कांग्रेस छोड़ ‘हम’ में शामिल हो चुके हैं. राजद के हेमनारायण सिंह भी ताल ठोंक रह हैं.
इन दिनों
भाजपा की मंडल स्तरीय बैठकें व रथ से प्रचार चल रहा है. जदयू का परचा पर चर्चा व घर-घर दस्तक हो चुका है.
मुद्दे
क्षेत्र में उद्योग व उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापनात्न सिंचाई एवं स्वास्थ्य सेवा का विस्तार
दाउदपुर को प्रखंड का दर्जा
पेयजल व बिजली.
बनियापुर
एनडीए में कई दावेदार
बनियापुर विधानसभा क्षेत्र से महागंठबंधन के प्रत्याशी के रूप में वर्तमान विधायक केदारनाथ सिंह का चुनाव लड़ना तय है. वहीं राजग में एक अनार सौ बीमार वाली हालत है.
राजग के सहयोगी दल के नेता अपने-अपने सुप्रीमो को हवा का रूख अपने पक्ष में बता सीट को अपने खाते में डलवाने की सिफारिश कर रहे हैं.
गठबंधन में सीट किसी एक पार्टी को ही जायेगी. ऐसे में भितरघात एवं बगावत की आशंका बनी हुई है. 2010 के चुनाव में नये परिसीमन में विलुप्त मशरक विधानसभा के विधायक केदारनाथ सिंह ने जदयू के वीरेंद्र ओझा को पराजित किया था.
ओझा अब ‘हम’ में चले गये हैं. उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ता सम्मेलन में जीतन राम मांझी को बुला कर अपना टिकट कंफर्म कराने की कवायद की है. वहीं, भाजपा के खाते से पूर्व विधायक तारकेश्वर सिंह, बृजमोहन सिंह, आनंद शंकर समेत आधा दर्जन दावेदार हैं.
इन दिनों
हम का कार्यकर्ता सम्मेलन एवं भाजपा का विधानसभा कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित हो चुका है. महागंठबंधन स्वाभिमान महारैली की तैयारी में है.
मुद्दे
एनएच 101 से क्षेत्र की सीमा तक सड़क निर्माण
बिजली और पीने की पानी की सुविधा
सिंचाई व रोजगार के साधन.
एकमा
टिकट को ले लगा रहे दौड़
एकमा विधानसभा क्षेत्र परिसीमन के बाद 2008 में अस्तित्व में आया. यह मांझी व बनियापुर विधानसभा क्षेत्र के हिस्सों को काट कर बना है. 2010 के चुनाव में जदयू के मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह ने राजद के कामेश्वर सिंह उर्फ मुन्ना को 36 हजार 273 मतों से पराजित किया था.
धूमल उसके पूर्व 2000 व फरवरी 2005 के आम चुनाव तथा नवंबर 2005 के उपचुनाव में, लगातार तीन बार, बनियापुर से चुनाव जीते थे.
इस प्रकार वह लगातार चौथी बार विधायक हैं. इस बार यहां की राजनीतिक परिस्थिति में बदलाव आया है. पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रह राजद के कामेश्वर सिंह मुन्ना भाजपा में चले गये हैं.
महागंठबंधन से धूमल का उम्मीदवार होना तय माना जा रहा है. भाजपा में मुन्ना सहित कई चेहरे उभर रहे हैं. इनमें पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजेश सिंह रमण एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामबहादुर सिंह के पुत्र संजय सिंह के भी नाम शामिल हैं.
जबकि लोजपा जिले में लड़ने के लिये जहां एक सीट एकमा को चिन्हित कर रही है, वहीं राजद नेता व समाजसेवी रंजीत सिंह युद्ध स्तर पर जनसंपर्क चला रहे हैं. एनडीए के टिकट का फैसला तो आने वाला समय बतायेगा, परंतु उम्मीदवार जो भी हो उसे टकराना धूमल से ही पड़ेगा.
इन दिनों
भाजपा का विस कार्यकर्ता सम्मेलन एवं परिवर्तन रथ के जरिये महासंपर्क जारी. जदयू का विस कार्यकर्ता सम्मेलन हो चुका है. स्वाभिमान महारैली की तैयारी.
मुद्दे
अनुमंडल का दर्जा
नहर व स्टेट बोरिंग का जीर्णोद्धार
डिग्री कॉलेजों की स्थापना
रोजगार की व्यवस्था
बिजली और पानी.
मढ़ौरा
भितरघात का सता रहा डर
मढ़ौरा विधानसभा सीट अभी राजद के कब्जे में हैं. पिछले चुनाव में पूर्व विधायक यदुवंशी राय के पुत्र जीतेंद्र कुमार राय ने जदयू के लालबाबू राय को कड़े संघर्ष में हराया था.
2005 के फरवरी व नवंबर, दोनों चुनाव में निर्दलीय लालबाबू राय ने राजद के यदुवंशी राय व जीतेंद्र को हराया था. 2010 का चुनाव उन्होंने जदयू के टिकट पर लड़ा था. उनके इस बार भाजपा में जाने की चर्चा है. सीटिंग विधायक होने के आधार पर राजद से जितेंद्र राय की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है.
यह भी तय माना जा रहा है कि यह सीट महागंठबंधन में राजद के हिस्से में रहेगी. भाजपा में लालबाबू समेत दर्जनों नेता अपनी उम्मीदवारी का दावा कर रहे हैं.
वहीं, रालोसपा की भी इस सीट पर नजर है. देखना दिलचस्प होगा कि एनडीएम यह सीट किसे मिलती है. वैसे गंठबंधन के नये समीकरण में सभी दलों को भितरघात का भी डर सता रहा है.
लेकिन उम्मीदवारों की नाराजगी एवं पार्टियों को भीतरघात से जुझना महत्वपूर्ण होगा.
इन दिनों
भाजपा का कार्यकर्ता सम्मेलन हो चुका है. अब परिवर्तन रथ इलाके में घूम रहा है. जदयू का कार्यकर्ता सम्मेलन हो चुका है. राजद बूथ स्तर पर तैयारी में जुटा है.
मुद्दे
बंद चीनी मिल को चालू करनात्न घोषित रेल इंजन कारखाने का निर्माण
सरकारी डिग्री कॉलेज की स्थापनात्नरोजगार के साधन.
अमनौर
उम्मीदवारी पर संशय बरकार
अमनौर 2010 में परसा, मढ़ौरा एवं तरैया विधानसभा क्षेत्रों को काट कर अस्तित्व में आया. यहां के पहले चुनाव में जदयू के कृष्ण कुमार उर्फ मंटू सिंह ने निर्दलीय सुनील कुमार को 10 हजार 517 मतों के अंतर से पराजित किया था.
पिछले चुनाव में राजद-लोजपा गठबंधन से चुनाव लड़े शैलेंद्र प्रताप अब जदयू में आ चुके हैं.
हालांकि उनके किसी और विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है. लिहाजा कृष्ण कुमार मंटू का एक बार फिर यहां से जदयू का उम्मीदवार होना तय माना जा रहा है. उधर सुनील भी राजद से दावा ठोंक रहे हैं. इससे मंटू की मुश्किलें बढ़ेंगी.
भाजपा से टिकट पाने के लिए करीब 10 नेता पटना-दिल्ली की दौड़ लगा रहे हैं. टिकट किसे मिलेगा, यह साफ नहीं है. केंद्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद राजीव प्रताप रूडी का गृह विधानसभा क्षेत्र होने के कारण यह एनडीए के लिए प्रतिष्ठा की सीट है.
उधर लोजपा भी अपनी दावेदारी पेश करने से चूक नहीं रही है.
इन दिनों
भाजपा का पर्विन रथ प्रधानमंत्री के संदेशों को गांव-गांव पहुंचा रहा है. महागंठबंधन स्वाभिमान महारैली की तैयारी में जुटा है.
मुद्दे
रोजगारपरक और तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संस्थानात्नसिंचाई की सुविधा
बिजली, पानी, सड़क.
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