दोषी बैंकों के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई

Published at :31 Mar 2015 1:03 AM (IST)
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दोषी बैंकों के खिलाफ होगी कानूनी कार्रवाई

छपरा (सदर) : प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत स्वीकृत आवेदनों का 31 मार्च तक माजिर्न मनी सह अनुदान राशि का क्लेम बैंकों द्वारा अपने नोडल बैंक से कर लिया जाये, अन्यथा इस योजना में प्रगति नहीं करने का दोषी बैंकों को मानते हुए प्रधान सचिव उद्योग द्वारा निर्देशित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के […]

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छपरा (सदर) : प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत स्वीकृत आवेदनों का 31 मार्च तक माजिर्न मनी सह अनुदान राशि का क्लेम बैंकों द्वारा अपने नोडल बैंक से कर लिया जाये, अन्यथा इस योजना में प्रगति नहीं करने का दोषी बैंकों को मानते हुए प्रधान सचिव उद्योग द्वारा निर्देशित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को बाध्य होना पड़ेगा.
यह निर्देश जिला पदाधिकारी सह अध्यक्ष जिलास्तरीय टास्क फोर्स समिति (पीएमइजीपी) दीपक आनंद ने अपने पत्रंक 176 के द्वारा दिये है. गत दिन पीएमइजीपी तथा वार्षिक शाख योजना के तहत स्टेट बैंक द्वारा 43 आवेदकों की सूची को अलाभप्रद कह कर लौटाये जाने के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. बैठक में यह बात स्पष्ट तौर पर आयी कि स्टेट बैंक तथा सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा मनमाने ढंग से ऋण आवेदन को अलाभप्रद करार दिया जा रहा है. इस पर डीएम ने 10 दिनों के भीतर इन सभी आवेदनों को नोट वाइयेबुल एवं रद्द करने का कारण स्पष्ट करते हुए जवाब तलब किया है.
अन्य बैंक जिन आवेदनों को लाभप्रद बताते हैं एसबीआइ व सेंट्रल बैंक अलाभप्रद :बैठक में यह बात भी आयी कि महाप्रबंधक द्वारा प्रस्तुत सूची में 75 फीसदी आवेदन बैंकों द्वारा ही प्रायोजित हैं. ऐसी स्थिति में उन्हीं आवेदकों को पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा लाभप्रद करार दिया जाता है, तो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया गैर लाभप्रद बताते हैं. उन्होंने कहा कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के असंतोषजनक प्रगति के पीछे एलडीएम के द्वारा अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन नहीं किया जाना है.
वार्षिक शाख योजना के तहत ऋण धारकों का नाम बताने से किया इनकार :जिला पदाधिकारी द्वारा वार्षिक शाख योजना के एमएसएमइ सेक्टर में हुई प्रगति के संबंध में अभी तक बैंकों द्वारा ऋण स्वीकृत लाभुकों की सूची उपलब्ध कराने के संबंध में कहे जाने पर बैंक के प्रतिनिधियों द्वारा ऋण धारकों का नाम नहीं बताने के रिजर्व बैंक के निर्देश की एक प्रति दिखायी गयी. इस पर डीएम ने कहा कि तब तो इसका स्थल जांच भी नहीं हो सकता.
उन्होंने उद्योग विभाग के महाप्रबंधक रविभूषण सिन्हा को रिजर्व बैंक के आयोजन ऋण विभाग के इस पूरे मामले की जानकारी का निर्देश दिया. बैंकों की कार्यशैली से संबंधित पत्र डीएम ने उद्योग विभाग के निदेशक, उद्योग विभाग के प्रधान सचिव के अलावा सभी बैंकों के समन्वयक व अग्रणी बैंक प्रबंधक को भी भेजा है.
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