नगर पर्षद घोटाले की जांच रिपोर्ट कोर्ट की फाइल में नहीं

Updated at : 16 Jul 2019 6:00 AM (IST)
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नगर पर्षद घोटाले की जांच रिपोर्ट कोर्ट की फाइल में नहीं

छपरा(कोर्ट) : नगर पर्षद में चार वर्ष पूर्व हुए 56 लाख 72 हजार 404 रुपये के घोटाले में तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष ने जांच की थी और जांच रिपोर्ट कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा था. परंतु आश्चर्य की बात है कि उनकी रिपोर्ट कोर्ट के अभिलेख में मौजूद नहीं है. मामले में एक मई 2015 को दर्ज […]

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छपरा(कोर्ट) : नगर पर्षद में चार वर्ष पूर्व हुए 56 लाख 72 हजार 404 रुपये के घोटाले में तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष ने जांच की थी और जांच रिपोर्ट कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपा था. परंतु आश्चर्य की बात है कि उनकी रिपोर्ट कोर्ट के अभिलेख में मौजूद नहीं है.

मामले में एक मई 2015 को दर्ज प्राथमिकी में तत्कालीन नगर थानाध्यक्ष ने ढाई वर्ष बाद 20 जनवरी 2017 को अपनी जांच रिपोर्ट कार्यपालक पदाधिकारी को सौंपी थी. अपने रिपोर्ट में उन्होंने प्राथमिकी अभियुक्तों ध्रुव प्रसाद व भगवान बाजार के मनोज कुमार और पीएनबी के मैनेजर हरेराम ठाकुर के अलावा पूर्व नाजिर, परिषद के तत्कालीन लेखपाल और दो बैंक कर्मी अवध किशोर मिश्र और जगेश्वर राम को भी घोटाले में संलिप्त बताया था.
रिपोर्ट में कहा था कि पर्षद के व्ययन पदाधिकारी द्वारा चेक निर्गत नहीं किये जाने के बावजूद और उनके फर्जी हस्ताक्षर से जिन चेकों से पीएनबी की खाता से मनोज कुमार नामक व्यक्ति के खाता में रकम ट्रांसफर किया गया और निकासी कर ली गयी, उस मनोज कुमार का खाता आधा अधूरा पता पर खोला गया है.
अभियुक्तों ने योजनानुसार एक राय होकर सुनियोजित तरीके से पहले अधूरा पता पर मनोज का खाता खोलवाया फिर तीन चेक गायब किये और उस पर व्ययन पदाधिकारी का जाली हस्ताक्षर कर राशि का गबन किया, जिसमें बैंक के मैनेजर हरेराम ठाकुर और पूर्व नाजिर का स्पष्ट हाथ है.
अपनी रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पूर्व नाजिर ने पूर्व में भी इस प्रकार की धोखाधड़ी की थी और मामला सामने आने पर उनके द्वारा पैसा जमा कराया गया और उनपर विभागीय कार्रवाई भी हुई.
थानाध्यक्ष ने रिपोर्ट में कहा है कि तीनों चेक जो सफाईकर्मियों के मानदेय भुगतान के लिए था, जिसे पर्षद के लेखपाल विनोद सिंह ने बैंक से प्राप्त किया था. साथ ही जो तीन चेक से राशि का ट्रांसफर हुआ उस चेक को सत्यापित करने की जिम्मेदारी मैनेजर ठाकुर और अवधकिशोर मिश्र और जुगेश्वर राम की थी जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभायी.
थानाध्यक्ष ने नाजिर ध्रुव प्रसाद के बारे मे रिपोर्ट में कहा है कि कार्यपालक पदाधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनके द्वारा तीनो चेक निर्गत नहीं किया गया है, जबकि पदाधिकारी द्वारा निर्गत चेक ही नाजिर के पास होता है. साथ ही जांच के क्रम में किसी भी साक्षियों ने नाजिर की संलिप्तता नहीं बतायी है.
अनुसंधान में उपरोक्त व्यक्तियों जिनमें दो प्राथमिकी अभियुक्त और चार अन्य के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं. जबकि नाजिर ध्रुव प्रसाद के विरुद्ध गहराई से जांच के बाद निर्णय लिया जाना उचित प्रतीत होता है.
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