Samastipur : पपीता के बेहतर उत्पादन के लिए रोगरोधी प्रभेदों का चयन जरूरी : डॉ. रत्नेश
Published by : GIRIJA NANDAN SHARMA Updated At : 30 Oct 2025 5:44 PM
तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न हुआ.
पूसा . डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविधालय स्थित संचार केंद्र के पंचतंत्र सभागार में पपीता के बेहतर उत्पादन एवं कीट व्याधि प्रबंधन विषय पर चल रहे तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरण के साथ संपन्न हुआ. इस प्रशिक्षण में राज्य के कई जिले से एटीएम, बीटीएम तथा बीएचओ शामिल हुये. समस्या सत्र को संबोधित करते हुए प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रत्नेश कुमार झा ने कहा कि पपीता का बेहतर उत्पादन और कीट-व्याधि प्रबंधन के लिए उन्नत किस्मों रेड लेडी 786 का चयन करने की जरूरत है. खेत में जल निकासी और स्वच्छता का ध्यान रखना भी लाभकारी होता है. कीट-रोगों के लिए जैविक व रासायनिक तरीकों का संयोजन करना चाहिए. इसमें नियमित निकाई-गुड़ाई, मल्चिंग सही समय पर उचित पोषक तत्वों का छिड़काव और रोग ग्रसित पौधों को तुरंत हटाना शामिल है. रोपण के लिए जून-जुलाई (वर्षा ऋतु) या फरवरी-मार्च (बसंत ऋतु) में पपीता लगाना हितकर होता है. खेत में जल-जमाव नहीं होने देना चाहिए. यह रोगों को बढ़ावा देता है. सही समय पर यूरिया, पोटाश, मैग्नीशियम सल्फेट और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें. कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के वैज्ञानिक डॉ. बीरू त्रिपाठी ने कहा कि फलों और फूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भीम प्लस जैसे उत्पादों का उपयोग करें. बगीचे की नियमित सफाई करें, खरपतवारों को हटाएं और रोगी पौधों को तुरंत उखाड़कर जला दें. मल्चिंग से खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी की नमी बनाए रखने में मदद मिलती है. पौधों पर लगने वाली चोटों से बचाव करें, ये कीटों और रोगों के प्रवेश द्वार बन सकती. परजीवी और शिकारी का उपयोग करें. चींटियां मिलीबग के शहद पर निर्भर करती है. उसे नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है. वैज्ञानिक डॉ. सुमित कुमार सिंह ने कहा कि मिलीबग के नियंत्रण के लिए साबुन और तेल-आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करें. काले धब्बे और रोएंदार फफूंद के नियंत्रण के लिए थियोफानेट मिथाइल 70 प्रतिशत डबलूपी का उपयोग करें. काले धब्बे के लिए सुरक्षात्मक कवकनाशी का नियमित उपयोग करें. बेनेविया कीटनाशक जैसे अनुशंसित कीटनाशकों का लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार उपयोग करें. बीजों को विषाणु-रोधी उपचार देने से भी रोगों से बचाव हो सकता है. मौके पर रंजीत रंजन कुमार, निधि कुमारी, निशा किरण, मारुतनंदन शुक्ला, आदित्य पांडेय, चंद्रमौली आदि मौजूद थे.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










