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Samastipur : प्रैक्टिकल नहीं हो रहे, केवल परीक्षा के समय होती है खानापूर्ति

Updated at : 23 Dec 2025 6:03 PM (IST)
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Samastipur : प्रैक्टिकल नहीं हो रहे, केवल परीक्षा के समय होती है खानापूर्ति

सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है.

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– निरीक्षण में हो चुका है खुलासा, साइंस लैब का नहीं हो रहा उपयोग

समस्तीपुर .

सरकारी स्कूलों में विज्ञान की पढ़ाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. स्कूलों में विज्ञान के प्रयोगों के लिए लैब तो है मगर उनके हाल ठीक नहीं है. अधिकांश स्कूलों में खाली कमरे में लैब चल रही है. लेकिन वहां प्रयोग करने के लिए प्लेटफॉर्म ही नहीं है. प्रयोगशालाओं में सामान तालों में बंद कर रखा जा रहा है. इनमें से अधिकांश सामान कई साल पुराना हो चुका है. कई उपकरण तो केवल दिखावे के लिए अलमारियों में ताले के भीतर रखा हुआ है. यह हाल जिले के अधिकांश माध्यमिक/उच्च माध्यमिक स्कूलों के हैं. जिन स्कूलों में प्रयोगशालाओं के हाल बेहाल हैं, उनसे वैज्ञानिक कैसे निकलेंगे. यह कटु सच है. हाल ही में वारिसनगर प्रखंड स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय हजपुरवा के निरीक्षण के दौरान डीपीओ एसएसए ने पाया कि साइंस लैब में सभी सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद उपयोग नहीं किया जा रहा था. शहर के कुछ विद्यालयों की पड़ताल की गई तो विद्यार्थी बताते हैं कि सिर्फ बोर्ड परीक्षाओं के समय दो-तीन दिन में ही कक्षा 9 से 10वीं में व कक्षा 11 व 12वीं में प्रैक्टिकल कराकर औपचारिकता निभा दी जाती है. पूरे शैक्षणिक सत्र में लैब की तरफ कोई भी झांकने नहीं जाता है. अब ऐसे में सवाल यह है कि आखिर स्कूलों में यही हालात रहे तो भविष्य के वैज्ञानिकों की नींव मजबूत कैसे होगी. शहर के आरएसबी इंटर विद्यालय के एचएम डा. ललित कुमार घोष बताते है कि 11वीं व 12वीं में हफ्ते में विद्यार्थियों को चार प्रैक्टिकल अनिवार्य हैं. फिजिक्स-केमेस्ट्री में चार, फिजिक्स, केमेस्ट्री और बॉयोलॉजी में छह प्रैक्टिकल पीरियड होने चाहिए. ग्रुप प्रैक्टिकल में चार से छह विद्यार्थी शामिल होने चाहिए. चूंकि संसाधन नहीं हैं, ऐसे में 15-20 विद्यार्थियों के ग्रुप बनाए जा रहे हैं. जिले के प्लस टू विद्यालयों की दसवीं व इंटर में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान व जीव विज्ञान विषय की प्रायोगिक शिक्षा अनिवार्य की गई है. मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहे रंजीत कुमार, आकाश कुमार व अखिलेश ने बताया कि जब वह पढ़ेंगे ही नहीं, तो प्रायोगिक परीक्षा कैसे दे पाएंगे. सिर्फ प्रायोगिक विषयों की कॉपियां तैयार कर पाते हैं, जिसे परीक्षा के दौरान जमा करना होता है.

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“सभी डीपीओ को निरीक्षण के दौरान लैब की जांच पड़ताल करने का निर्देश दिया गया है. लैब का उपयोग नहीं करने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई.

कामेश्वर प्रसाद गुप्ता,

डीइओ, समस्तीपुर “B

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Ankur kumar

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Ankur kumar is a contributor at Prabhat Khabar.

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