Samastipur News:एक साल बाद भी नहीं खुला हत्या का राज

अब यह मामला फाइल में दबकर रह गई है क्योंकि तीन अनुसंधानकर्ताओं के बदले जाने के बावजूद अब तक मामले की गुत्थी नहीं सुलझ सका है.
Samastipur News:मोरवा : एक साल बीत जाने के बाद भी पुलिस के लिए अपराधियों की पहचान करना चुनौती बना हुआ है. हालांकि अब यह मामला फाइल में दबकर रह गई है क्योंकि तीन अनुसंधानकर्ताओं के बदले जाने के बावजूद अब तक मामले की गुत्थी नहीं सुलझ सका है. पुलिस की तमाम कोशिश अब तक नाकाम साबित हो रही है. बताया जाता है कि दिन भर शिक्षण कार्य सम्पन्न करने के बाद थका हारा शिक्षक अपनी घर की ओर जा रहा था. मन में तो इच्छा थी कि घर जाकर आराम करने की लेकिन ऐसा हो ना सका. बीच रास्ते में ही अपराधियों की गोली का शिकार हो गया. मामला शिक्षक से जुड़ा है. जिसकी हत्या के एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक गुत्थी सुलझती नजर नहीं आ रही है. पुलिस के द्वारा ताबड़तोड़ कार्रवाई किए जाने की बात बताई जा रही है लेकिन न जाने कि मांद में शिक्षक का हत्यारा छुपा है. घटना के बारे में बताया जाता है कि मध्य विद्यालय जोरपुरा में कार्यरत शिक्षक मोहिउद्दीननगर थाना क्षेत्र के मदुदाबाद निवासी आनंद दास का बेटा चितरंजन कुमार अन्य दिनों की भांति विद्यालय से दरबा के रास्ते अपने घर को जा रहे थे. इसी क्रम में इंद्रवारा बांध के समीप कुछ युवकों ने हाथ देकर उन्हें रोका. थोड़ी देर बातचीत की हाथापाई हुई. तीन गोली उनके सीने में दाग दी. घटना की क्या वजह थी इसका अब तक खुलासा नहीं हुआ. क्योंकि अपराधियों के द्वारा ना तो बाइक ली गई और ना ही अन्य सामानों की छिनतई की गई. मामले की तफ़्तीश करने के लिए खुद एसपी अशोक मिश्रा घटनास्थल पर पहुंचे. डीएसपी, इंस्पेक्टर और थाना अध्यक्ष के द्वारा लगातार घटना की मॉनिटरिंग की जाती रही. स्थानीय लोगों के बयान कलम बंद किए गए घटना को लेकर सभी दिशाओं में डॉग स्क्वायड से लेकर पुलिस की टीम ने छानबीन की लेकिन हत्यारों का सुराग नहीं मिला. घटना को लेकर शिक्षक संघ के द्वारा काला बिल्ला लगाया गया. मौन प्रदर्शन किए गए. प्रशासनिक अधिकारियों से शिष्ट मंडल मिला लेकिन पुलिस के कार्रवाई के आगे सब दब गई. नतीजा यह है कि अब तक पुलिस की कार्रवाई में सफलता मिलना तो दूर अब तक अपराधियों की पहचान भी नहीं हो सकी है. निवर्तमान थाना अध्यक्ष के द्वारा मामले को लेकर लगातार मॉनिटरिंग किए जाने की बात बताई जा रही थी. अपराधियों की गर्दन तक पुलिस के हाथ पहुंचने की संकेत दिए जा रहे थे. लेकिन अब तक ऐसा कुछ सामने नहीं हुआ जिससे कि मृतक शिक्षक के पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके. घटना की असली वजह आखिर क्या थी यह जानने को लेकर आज भी लोग बेताब हैं. पुलिस की जांच मंथर गति से चल रही है. अपराधी न जाने कब का ठिकाना बदल चुका है। अब पुलिस के सामने चुनौती है कि इस मामले को पर्दाफाश किया जाए. नए थाना अध्यक्ष शैलेश कुमार के सामने इस मामले को सुलझाना एक चुनौती होगा. हालांकि पुलिस के जुनून के सामने किसी भी अपराधी का कुछ नहीं चल सका है. कुछ करिश्मा ऐसे ही इस कार्य में भी होगा जिससे कि शिक्षक की हत्याकांड की गुत्थी सुलझेगी.
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