Samastipur : लखनऊ बस हादसे में मधेपुर की मां-बेटी की जलकर मौत

Updated at : 15 May 2025 10:06 PM (IST)
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Samastipur : लखनऊ बस हादसे में मधेपुर की मां-बेटी की जलकर मौत

दिल्ली जा रही स्लीपर बस में लगी आग में मां-बेटी सहित पांच लोग जिंदा जल गये.

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Samastipur : लखनऊ- रायबरेली रोड पर शॉर्ट सर्किट से बस में लगी आग Samastipur : पुलिस और आम लोगों ने शीशा तोड़कर यात्रियों को निकाला Samastipur : हसनपुर (समस्तीपुर) दिल्ली जा रही स्लीपर बस में लगी आग में मां-बेटी सहित पांच लोग जिंदा जल गये. इनमें हसनपुर की औरा पंचायत की मां-बेटी भी शामिल हैं. खबर मिलते ही मधेपुर में कोहराम मच गया. उनकी पहचान मधेपुर के अशोक महतो की पत्नी लख्खो देवी व उसकी पुत्री सोनी कुमारी के रूप में बतायी गयी है. बताया जाता है कि बेगूसराय से दिल्ली की जा रही बस में लखनऊ के किसान पथ पर लखनऊ- रायबरेली रोड, मोहनलालगंज के ऊपर शॉर्ट सर्किट से आग लग गयी. परिजनों के मुताबिक आग लगने के बाद भी बस एक किलोमीटर तक दौड़ती रही. ड्राइवर और कंडक्टर तुरंत मौके से भाग निकले. बस में बैठे यात्रियों को पुलिस और आम लोगों की मदद से शीशा तोड़कर निकाला गया. इसमें जलकर मां-बेटी की मौत हो गयी. मृतका के पुत्र दीपक महतो ने बताया कि उसके पिता अशोक महतो उर्फ रामप्रकाश महतो, मां लख्खी देवी, बहन सोनी देवी व ढ़ाई साल के भांजे आदित्य को मुसरीघरारी में दिल्ली जाने वाली बस में बुधवार को ढाई बजे चढ़ाकर वापस लौटा था. रात में सभी से बात भी हुई थी. इसके बाद सुबह में मां व बहन की मौत की सूचना मिली. मां के इलाज को लेकर सभी लोग मुगलसराय जा रहे थे. लखनऊ के रास्ते सभी लोग इलाहाबाद में भाई गुड्डू महतो व रामप्रकाश महतो के यहां रुकने के बाद मुगलसराय रवाना होते. उसने बताया कि दो महीने पहले ही मां के पेट का ऑपरेशन मुगलसराय में हुआ था. वहां बड़ी बहन अर्चना देवी रहती है. दवा खत्म होने के साथ फिर से चेकअप कराने को लेकर सभी लोग जा रहे थे. गुरुवार को सुबह जब हादसा हुआ, तब पापा ने फोन करके जानकारी दी. दीपक बताता है कि पापा बता रहे थे कि वह खिड़की तोड़कर बस से निकले. भांजा आदित्य-आनंद साथ में थे. मेरी बहन की शादी विभूतिपुर में 2018 में हुई थी. उससे तीन बच्चे दो लड़की एक लड़का व दोनों भांजी दादी के साथ ही रहती है. 2022 में जीजा की मौत बीमारी से हो गई. बहन गांव में ही लोहिया स्वच्छ मिशन के तहत सफाईकर्मी के रूप में 2023 में बहाल हुई थी. पापा भी बीमार ही रहते हैं. दो बड़े भाई गुड्डू कुमार और बलवीर कुमार घर चलाते हैं. बड़ी बहन अर्चना मुगलसराय में ही रहती है. बैजनाथ झा, गौरी शंकर महतो बताते हैं कि अशोक कुमार महतो का परिवार बहुत ही गरीब है. सोनी कुमारी गांव में ही सफाई का काम करती है.

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