अधिकांश स्कूलों में किशोरी मंच का सही ढंग से नहीं हो रहा संचालन

Updated at : 12 May 2024 11:32 PM (IST)
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अधिकांश स्कूलों में किशोरी मंच का सही ढंग से नहीं हो रहा संचालन

किशोरी मंच के तहत संचालित कार्यक्रमों का कार्यान्वयन अधिकांश स्कूलों में नहीं हो रहा है

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समस्तीपुर. बालिकाओं की उपस्थिति उच्च विद्यालयों में बढ़ाने व उन्हें सामाजिक बदलाव के लिए प्रोत्साहित करने के लिए जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में किशोरी मंच का गठन कमोबेश कुछ को छोड़ अधिकांश विद्यालयों में तो किया गया है, लेकिन यह अपने उद्देश्यों से भटक गया है. किशोरी मंच के तहत संचालित कार्यक्रमों का कार्यान्वयन अधिकांश स्कूलों में नहीं हो रहा है. कई स्कूलों में तो यह केवल कागजों और फाइलों में सिमट कर रह गया है. किशोरी मंच में कक्षा 9 की 35 छात्राएं व कक्षा 10 की पांच छात्राएं रहती हैं. कक्षा आठ का रिजल्ट मिलने व उच्च विद्यालय में कक्षा 9 में नामांकन लेनी वाली छात्राओं में किशोरी मंच में शामिल होने को लेकर काफी उत्साहित रहती है. माध्यमिक विद्यालयों में किशोरी मंच का गठन प्रधानाध्यापक द्वारा किया जाता है. प्रत्येक विद्यालय में चार छात्राओं को प्रेरक किशोरी के रूप में चयनित किया जाता है. उच्च विद्यालय की एक शिक्षिका किशोरी मंच का संचालन करती है. यदि किसी विद्यालय में शिक्षिका नहीं हैं तो शिक्षक को ही किशोरी मंच का नोडल शिक्षक बनाया जाता है. ये शिक्षक या शिक्षिका किशोरी मंच के सुगमकर्ता के रूप में काम करते हैं. किशोरी मंच के गतिविधियों की योजना बनाने व उस पर चर्चा के लिए उच्च विद्यालय में एक कक्ष उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अभी तक सभी स्कूलों में पूरा नहीं की गई है. इस निर्धारित कक्ष का उपयोग किशोरी मंच की बैठक के लिए किया जाता है. कक्ष उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की रहती है, लेकिन इसके प्रति अधिकांश स्कूलों के एचएम लापरवाही बरत रहे हैं. ऐसे में उक्त महत्वपूर्ण सार्थक कार्यक्रम अनुपयोगी बनता जा रहा है. उच्च विद्यालय रुपौली के शिक्षक रणजीत कुमार ने बताया कि जिन विद्यालय में इसका गठन किया गया है. वहां, महिला सशक्तीकरण की दिशा में अब सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की लड़कियां एक और कदम आगे बढ़ा रही है. यह मंच गांव की लड़कियों का झिझक तोड़कर उसे हर समस्या से लड़ने की ताकत और सहारा दोनों दे रहा है. सामान्य तौर पर किशोर उम्र में अधिकांश लड़कियां माहवारी और यौन अत्याचार जैसे मामलों को किसी के सामने रखने से झिझकती है. इसका उपाय किशोरी मंच ने ऐसे निकाला है कि लड़कियों के लिए हर विद्यालय में एक लेटर बाक्स लगेगा. कोई भी लड़की अगर समस्या बता नहीं पा रही है तो, वह लिखकर इसे उस बाक्स में डाल देगी. हर विद्यालय में किसी महिला शिक्षक को इस मंच का सुगमकर्ता बनाया जायेगा. सुगमकर्ता हर दिन इस बाक्स में प्राप्त पत्र को पढ़कर इसका समाधान लड़कियों को बतायेगी. मामला बड़ा होने पर इसे आगे तक पहुंचायेगी. साथ ही इसको लेकर स्वास्थ्य पर पड़ने वाले विभिन्न प्रभाव पर लड़कियों को सजग रखा जा रहा है. इससे आगे किशोरी का यह मंच बाल विवाह और बिन मर्जी के विवाह को भी रोकेगा, इसके लिए भी छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है. बेमेल या जबरन विवाह को रोकने के लिए भी इसके सदस्य सामने आयेंगे. अगर कोई अभिभावक गैरकानूनी तरीके से किसी लड़की की शादी निर्धारित से कम आयु में करायेगा तो उसके खिलाफ भी मोर्चेबंदी होगी. डीइओ ने बताया कि कामेश्वर प्रसाद गुप्ताछात्र-छात्राओं में आपसी सहयोग की भावना व नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से जिले के माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में किशोरी मंच का गठन किया गया है. साथ ही इस मंच को क्रियाशील रखा जायेगा ताकि छात्राओं में उत्कृष्ट व्यक्तित्व निर्माण के लिए जीवन कौशल विकसित हो सके. विद्यालय निरीक्षण के दौरान इससे जुड़े गतिविधियों की जांच की जायेगी.

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