शुष्क मौसम को देखते हुये दहलन व तेलहन की करें बोआई

Published by : GIRIJA NANDAN SHARMA Updated At : 25 Oct 2025 6:46 PM

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डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों के लिये सामसायिक सुझाव जारी किया गया है.

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प्रतिनिधि, समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय,पूसा के द्वारा किसानों के लिये सामसायिक सुझाव जारी किया गया है. वैज्ञानिक ने कहा है कि शुष्क मौसम की संभावना को देखते हुये किसान राई, मसूर, सूर्यमुखी, लहसुन, शरदकालीन गन्ना, मटर, राजमा की बोआई प्राथमिकता से करें. सब्जियों में आवश्यकतानुसार निकाई-गुड़ाई करें. कीट तथा रोग-व्याधि का नियमित रुप से निरीक्षण करें. सूर्यमुखी की बाेआई करें. बोआई के समय खेत की जुताई में 30 से 40 किलोग्राम नत्रेजन, 80-90 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटास का व्यवहार करें. उत्तर बिहार के लिए सूर्यमुखी की उन्नत सकुंल प्रभेद मोरडेन, सयूर, सीओ-1 एवं पैराडेविक तथा संकर प्रभेद के लिए केबीएसएच-1, केबीएसएच-1, केबीएसएच-44, एमएसएफएच-1, एमएसएफएच-8 एवं एमएसएफएच-17 अनुशंसित है. सकंर किस्मों के लिए बीज दर 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा संकुल किस्मों के लिए 8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. बोआई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम थीरम या कैप्टाफ दवा से उपचारित कर बोआई करें. मसूर के मल्लिका(के-75), अरुण (पीएल 77-12), केएलएस- 218, एचयूएल-57, पीएल-5 एवं डब्लूबीएल- 77 किस्मों की बोआई करें. बोआई के समय खेत की जुताई में 20 किलोग्राम नत्रेजन, 45 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटास एवं 20 किलोग्राम सल्फर का व्यवहार करें. बोआई के 2 से 3 दिन पूर्व कार्बेन्डाजीम फफूंदनाशक दवा का 1.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से शोधित करें. उसके बाद कीटनाशी दवा क्लोरपाईरीफॉस 20 ईसी का 8 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. बोआई के ठीक पहले उपचारित बीज को उचित राईजोबियम कल्चर (5 पैकेट प्रति हेक्टेयर) से उपचारित कर बोआई करें. रबी प्याज की बोआई नर्सरी में करें. इसके लिए एग्रीफाउंड लाईट रेड, अर्का निकेतन, एन 2-4-1, नासिक रेड, पूसा रेड एवं भीमासुपर किस्में अनुशंसित है. 20 से 25 दिनों के नर्सरी से खरपतवार की निकासी करते रहें. रबी फसल की बोआई के लिए खेत की तैयारी करें. खेत के आसपास के मेड़, नालियां एवं रास्तों में उगे जंगलों की सफाई करें. गोबर की सड़ी खाद 150-200 क्विंटल प्रति हेक्टयेर की दर से पूरे खेत में अच्छी प्रकार बिखेड़कर एवं जुताई कर मिला दें. किसान राजमा की बोआई करें. इसके लिए उदय (पीडीआर-14), अम्बर (आईआईपीआर-96-4) एवं उत्कर्ष (आईपीआर-98-5) किस्में अनुशंसित है. बीज बोआई की दूरी 30गुणा10 सेमी रखें. बोआई से पहले खेत की जुताई में 50 किलोग्राम नत्रेजन, 50 किलोग्राम फॉस्फोरस, 30 किलोग्राम पोटास एवं 20 किलोग्राम सल्फर का प्रयोग करें. बीज को 2 ग्राम बेविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. किसान मटर की बोआई करें. इसके लिए रचना, मालवीय मटर-15, अपर्णा, हरभजन, पूसा प्रभात एवं भी ऐल-42 किस्में अनुशंसित है. बीज दर 75-80 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा लगाने की दूरी 30गुणा10 सेमी रखें. बीज को उचित राइजोबियम कल्चर (5 पैकेट प्रति हेक्टेयर) से उपचारित कर बोआई करें. धनियां की बोआई करें. राजेन्द्र स्वाती, पंत हरितिमा, कुमारगजं सलेक्षन, हिसार आंनद धनियां की अनुशंसित किस्में हैं. पंक्ति में लगाने पर बीज दर 18 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा लगाने की दूरी 30 गुणा 20 सेमी रखें. बीज को 2.5 ग्राम बेविस्टीन प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. अच्छे जमाव के लिए बीज को दरर कर दो भागों में विभाजित कर बोआई करें. किसान लहसुन की बोआई करें. गोदावरी (सलेक्सन-1), श्वेता (सलेक्सन-10), एग्रीफाउंड डार्करडे (जी-11), एग्रीफाउंड व्हाईट (जी-41), एग्रीफाउंड पार्वती (जी-313), जमुना सफेद-2 (जी-50), जमुना सफेद-3 (जी-282), जमुना सफेद-4 (जी-323) एवं आरएयू (जी-5) लहसुन की अनुशंसित किस्में है. बीज दर 300-500 किलोग्राम जावा प्रति हेक्टयेर तथा लगाने की दूरी 15गुणा10 सेमी रखें.

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