Samastipur : गंगा में जलवृद्धि से आधा दर्जन विद्यालयों में अर्धवार्षिक परीक्षा स्थगित

Published by : ABHAY KUMAR Updated At : 12 Sep 2025 6:37 PM

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प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा नदी के जलस्तर में स्थिरता आई है. परंतु प्रभावित लोगों को इससे राहत नहीं मिली है.

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मोहिउद्दीननगर/मोहनपुर . प्रखंड क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा नदी के जलस्तर में स्थिरता आई है. परंतु प्रभावित लोगों को इससे राहत नहीं मिली है. करीब डेढ़ महीने से दियारांचल के हजारों लोगों की जिंदगी अस्त व्यस्त हो गई है. गंगा के सरारी कैंप पर तैनात जल संसाधन विभाग के सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को बताया कि गंगा का जलस्तर 46.95 मीटर तक पहुंच गया है जो खतरे के निशान 45.50 मीटर से 1.45 मीटर ज्यादा है. फिलवक्त जलस्तर में स्थिरता देखी जा रही है. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की बात मानें तो जलस्तर में कमी दिखने लगेगी. जिससे लोगों को राहत मिलेगी.स्थानीय लोगों का बताना है कि कई इसे क्षेत्र रहे हैं जहां नाव परिचालन की जरूरत थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन की ओर से तीसरी बार गंगा नदी में हुई जलवृद्धि के कारण प्रभावित क्षेत्र में नाव परिचालन की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई. स्थगित की गई अर्धवार्षिक परीक्षा गंगा में जल वृद्धि व विद्यालयों में पानी प्रवेश को देखते हुए प्रखंड शिक्षा विभाग ने आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में होनेवाली अर्द्ध वार्षिक परीक्षा सुरक्षा कारणों से स्थगित कर दी है. लेखा पाल अवधेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रभावित विद्यालयों में उत्क्रमित मध्य विद्यालय पतसिया, प्राथमिक विद्यालय बाहापर, प्राथमिक विद्यालय बिंदटोल आनंद गोलवा, प्राथमिक विद्यालय महावीर स्थान चकला, प्राथमिक विद्यालय मोहनापर व प्राथमिक विद्यालय बाबा पट्टी के नाम शामिल हैं. गंगा नदी का जलस्तर में कमी व स्थिति सामान्य होने पर से इन विद्यालयों में अर्द्ध वार्षिक परीक्षा ली जायेगी. वहीं जल जमाव की वजह से दर्जनों लोग जलजनित रोगों से संक्रमित हो रहे हैं. बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से बचाव के लिए दवा का वितरण नहीं किए जाने से प्रभावित लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है. पशुओं की चिकित्सा करने में जुटा विभाग मोहिउद्दीननगर व मोहनपुर प्रखंड से गंगा व वाया नदियों में जलवृद्धि से बीते डेढ़ महीने से हजारों पशुपालक प्रभावित हुए हैं. पशुपालकों को पास चारे की किल्लत है. पशुओं की जान बचाने व हरे चारे की व्यवस्था करने के लिए पशुपालकों को सुदूर उत्तरवर्ती क्षेत्रों में कई किलोमीटर की यात्रा करने की मजबूरी है. पशुपालन चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. हरीश कुमार व डॉ. सुषमा सुमन ने बताया कि बताया कि इस मौसम में पशुओं में होने वाले रोग जैसे डायरिया, कृमि सहित अन्य रोगों की चिकित्सा सरकारी स्तर से निःशुल्क की जा रही है. आपातकालीन स्थिति से निबटने के लिए पशु चिकित्सा वैन की सेवा प्रदान की जा रही है. सरकारी स्तर से उपलब्ध दवाओं का वितरण किया जा रहा है. पशुपालक रामचंद्र पासवान, भरत महतो, रामखेलावन दास आदि ने बताया कि पशुचारे की किल्लत के कारण काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही है. स्थानीय प्रशासन की ओर से पशुचारे की व्यवस्था करने की मांग की गई है.

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