Samastipur News:राजस्व महाभियान : कागजात जुटाने में किसानों के छूट रहे पसीने

Published by : ABHAY KUMAR Updated At : 09 Sep 2025 7:19 PM

विज्ञापन

रैयतों को भूमि संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने के लिये चलाये गये राजस्व महाभियान में फिलवक्त किसानों को माथपच्ची करनी पड़ी रही है.

विज्ञापन

Samastipur News:समस्तीपुर : रैयतों को भूमि संबंधी समस्याओं से निजात दिलाने के लिये चलाये गये राजस्व महाभियान में फिलवक्त किसानों को माथपच्ची करनी पड़ी रही है. किसानों को काजगात जुटाने में पसीने छूट रहे हैं. जिन किसानों के पास जमीन के पूराने दस्तावेज है, वे या तो कैथी लिपी में है, या उर्दू में हैं. राजस्व महाभियान के तहत लगाये जा रहे शिविर में रैयतों को कैथी व उर्दू के दस्तावेजों को हिन्दी में कराकर लाने के लिये कहा जा रहा है. कैथी और उर्दू अनुवादन के यहां भारी भीड़ है. भीड़ को देखते हुये अनुवादक रैयतों से मनमाना पैसा मांग रहे हैं. उर्दू का दस्तावेज का हिन्दी में अनुवाद कराने समस्तीपुर कचहरी पहुंचे लदौरा के मो. मिस्टर ने बताया कि एक दस्तावेज को हिन्दी में ट्रांसलेट करने के लिये 1200 रुपये की मांग की गयी है.

– कैथी व उर्दू को हिन्दी कराने के लिये देने पर रहे मनमाने पैसे

जितवरिया के अरविन्द कुमार राय ने बताया कि कैथी दस्तावेज को ट्रांसलेट कराने के लिये 12 से 15 सौ रुपये प्रति दस्तावेज की मांग की जा रही है. वहीं रैयतों को खतियान नहीं रहने, केवाला की कॉपी आग, बाढ़ आदि के कारण नष्ट होने जाने और खो जाने के कारण बहुत परेशानी हो रही है. वहीं कई रैयत के कागजात उनके फरिकेन के पास है, जो दबा के रखे हुये व अन्य फरिकेन को नहीं दे रहे हैं. मुजौना के कृष्ण मोहन पाठक ने बताया कि उनके पूवर्जों के नाम की जमीन से संबंधित खो चुका है, महाभियान में उन जमीनों का कोई जिक्र नहीं था, जमाबंदी पर्ची भी मिला है. इस स्थिति में उन्होंने करीब आधा दर्जन जानकारों से संपर्क कर दरभंगा से खतियान का नकल निकलवाने की कोशिश में कई दिनों से लगे हैं, इसमें उनकी कट्ठे दो कट्ठे जमीन की कीमत भी जा चुकी है, बावजूद उन्हें सफलता नहीं मिली है. सर्चिंग में कहा जा रहा है कि आपके मौजा का खतियान नहीं मिल रहा है. ऐसे में उन्हें कोई आगे का रास्ता नहीं दिख रहा है. इससे भी रैयतों को बहुत अधिक परेशानी होती है. नकल निकालने के नाम पर समस्तीपुर जिला अभिलेखागार से लेकर दरभंगा अभिलेखागार तक रैयत चक्कर लगा रहे हैं, उन्हें वहां भी लूट का शिकार होना पड़ रहा है. सर्चिंग के नाम पर भी मनमाना पैसा लग रहा है. इस जगहों पर दलालों का बोलबाला है. राजस्व महाअभियान कितना सफल होगा यह तो भविष्य के गर्भ में है. इसके सफलता के बाद भले ही किसानों को लाभ मिले लेकिन फिलहाल खेती की ताक पर यह रैयतों के लिये सिर दर्द बना हुआ है. रैयतों के साथ एक और भी समस्या है, उनका जमाबंदी पर्ची कोई और ले गया है, वे पंचायत से लेकर अंचल कार्यालय तक इसके लिये चक्कर लगा रहे हैं. वहीं फार्म और जमाबंदी पर्ची भरवाने लिये उन्हें अमीन के यहां दरबार लगाना पड़ रहा है. अमीन भी उनसे मनमाना पैसा वसूल रहे हैं. विदित हो कि इस राजस्व महाभियान के तहत किसानों को परिमार्जन, आपसी सहमति से बंटवारा, नामांतरण, ऑफ लाइन जमाबंदी को ऑनलाइन कराने की सुविधा प्रदान की गयी है. कई रैयत आपसी सहमति नहीं बनने के कारण परेशान हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
ABHAY KUMAR

लेखक के बारे में

By ABHAY KUMAR

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन