रोसड़ा के स्वर्ण व्यवसायी की हत्या मामले में दोषी दंपति को उम्र कैद की सजा

रोसड़ा शहर के लक्ष्मीपुर निवासी स्वर्ण व्यवसायी शिवरथ कुमार की निर्मम हत्या मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार गुप्ता के कोर्ट ने साक्ष्यों एवं गवाहों के मद्देनजर अहम फैसला सुनाया है.
रोसड़ा : रोसड़ा शहर के लक्ष्मीपुर निवासी स्वर्ण व्यवसायी शिवरथ कुमार की निर्मम हत्या मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम अशोक कुमार गुप्ता के कोर्ट ने साक्ष्यों एवं गवाहों के मद्देनजर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने मामले के दोषी हसनपुर थाना क्षेत्र के मोहद्दीपुर निवासी दंपति मो शाहजहां एवं रौनक खातून को भादवि की धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थदंड देने व 201/34 के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये अर्थदंड देने की सजा का आदेश दिया है. अर्थदंड नहीं देने पर छह छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनायी है. इस संबंध में कोर्ट में एसटी नंबर 162/2022 चल रहा था. मामले के वादी मृतक के भाई रंजन कुमार के आवेदन पर गत 17 मई 2022 को जान मारने की नीयत से भाई का अपहरण कर लेने से संबंधित रोसड़ा थाना कांड संख्या 162/2022 दर्ज किया गया था. बता दें कि शहर के लक्ष्मीपुर मोहल्ला निवासी राजकिशोर ठाकुर के पुत्र शिवरथ कुमार की दोषी करार दंपति ने मिलकर युवक को अपने घर बुलाकर दुपट्टे से फांसी लगाकर हत्या कर दी थी. उसके बाद मृतक युवक शिवरथ की लाश को अपने ही घर के आंगन में जमीन में दफन कर दिया था. युवक निकटवर्ती जिला बेगूसराय के खोदावंदपुर बाजार में सोने-चांदी की दुकान चलाता था. आरोपी महिला से युवक का प्रेम-प्रसंग चल रहा था. घटना के दिन 14 मई को मृतक युवक बारात जाने के लिए घर से निकला था. 15 मई की सुबह उससे संपर्क करने पर उसका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा था. परेशान परिवार वालों ने इस संबंध में थाने को सूचना दी. तत्कालीन थानाध्यक्ष ने युवक का मोबाइल लोकेशन आरोपी दंपति के घर का पाया. तत्पश्चात पुलिस ने घटनास्थल पहुंच जब आरोपी को गिरफ्तार किया. तब पूछताछ के दौरान घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार करते हुए युवक के लाश को घर में दफन किये जाने की बात कही. इसके बाद पुलिस ने युवक के लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था. तत्कालीन अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सहिरयार अख्तर ने भी प्रेसवार्ता कर घटना में आरोपी दंपति की संलिप्तता की बात कही थी. कोर्ट में फैसला के दौरान अपर लोक अभियोजक अधिवक्ता शिवशंकर प्रसाद एवं बचाव पक्ष से अधिवक्ता अब्दुल समद मौजूद थे.
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