Samastipur News:किसान नवंबर के अंत तक रबी मक्का की बोआई पूरी करें

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने किसानों के लिये समसामयिक सुझाव जारी किया है. इसके तरह किसान रबी मक्का की बोआई इस माह के अंत तक समाप्त करें
Samastipur News:समस्तीपुर : डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने किसानों के लिये समसामयिक सुझाव जारी किया है. इसके तरह किसान रबी मक्का की बोआई इस माह के अंत तक समाप्त करें. इसके लिए संकर किस्में शक्तिमान-1 सफेद, शक्तिमान 2 सफेद, शक्तिमान-3 पीला, शक्तिमान 4 पीला, शक्तिमान-5 पीला, गंगा 11 नारंगी पीला, राजेन्द्र संकर मक्का-1, राजेन्द्र संकर मक्का-2 एवं राजेन्द्र संकर मक्का दीप ज्वाला व संकुल किस्में देवकी सफेद, लक्ष्मी सफेद एवं सुआन पीला इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित है. खेत की जुताई में 100-150 क्विंटल कम्पोस्ट, 60 किलोग्राम नेत्रजन, 75 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. बीज दर 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर व दूरी 60 गुणा 20 सेमी रखें. अगात बोयी गयी मक्का की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. धान की कटाई के बाद राई की पिछेती किस्में राजेन्द्र अनुकूल, राजेन्द्र सुफलाम तथा राजेन्द्र राई पिछेती की बोवाई इस माह के अंत तक अवश्य कर लें. जिन खेतों में राई की फसल 20 से 25 दिन की हो गई है, वहां निकौनी व बछनी करते हुए पौधों के बीच की दूरी 12-15 सेमी रखें. साथ ही सभी सब्जी फसलों में समय पर निकाई-गुड़ाई करें और आवश्यकता अनुसार सिंचाई का प्रबंधन बनाए रखें. अक्टूबर माह में बोई गई लहसुन की फसल में खरपतवार की नियमित रूप से निकाई करें और कम अंंतराल पर हल्की सिंचाई देते रहें. साथ ही फसल में कीटों की सतत निगरानी सुनिश्चित करें, ताकि किसी भी प्रकार का संक्रमण समय रहते नियंत्रित किया जा सके. गेहूं की बोआई के लिए तापमान तथा अन्य मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल है. किसान प्राथमिकता देकर गेहूं की बोआई करें. खेत की तैयारी के समय 150-200 क्विंटल कम्पोस्ट, 60 किलोग्राम नेत्रजन, 60 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. बोआई के लिए एचडी-2967, एचडी-2733, एचडी-2824, डीडब्लू-187, डीडब्लू- 39, एचयुडब्लू- 468, सीबीडब्लू-38 किस्में उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. बीज को बोबाई से पहले बेबीस्टीन 2.5 ग्राम की दर से प्रति किलोग्राम बीज को उपचारित करें. दीमक से बचाव के लिए क्लोरपायरिफॉस 20 ईसी दवा का 8 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से अवश्य उपचारित करें. छिटकबां विधि से बोआई के लिए प्रति हेक्टेयर 125 किलोग्राम तथा सीड ड्रील से पंक्ति में बोआई के लिए 100 किलोग्राम बीज का व्यवहार करें. विगत माह बोई गई मटर, राजमा एवं सब्जियों वाली फसलें बैगन, टमाटर, मिर्च, पत्तागोभी एवं फूलगोभी में निकाई गुराई तथा आवश्यकतानुसार सिंचाई करें. मटर, बैगन, टमाटर एवं मिर्च की फसल में फल छेदक कीट की निगरानी करें. किसान आलू की राेपाई को प्राथमिकता दे कर पूरा करने का प्रयास करें. कुफरी चन्द्रमुखी,कुफरी अशोका, कुफरी बादशाह, कुफरी ज्योति, कुफरी सिंदुरी, कुफरी अरुण, राजेन्द्र आलू-1, राजेन्द्र आलू- 2 तथा राजेन्द्र आलू-3 इस क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्में है. बीज दर 20-25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखें. पंक्ति से पक्ति की दूरी 50-60 सेमी एवं बीज से बीज की दूरी 15-20 सेमी रखें. आलू को काट कर लगाने पर 2 से 3 स्वस्थ आंख वाले टुकडे़ को उपचारित कर 24 घंटे के अन्दर लगावें. बीज को एगलाॅल या एमीसान के 0.5 प्रतिशत घोल या डाइथेन एम-45 के 0.2 प्रतिशत घोल में 10 मिनट तक उपचारित कर छाया में सुखाकर रोपनी करें. समूचा आलू (20-40 ग्राम) लगाना श्रेष्ठकर है. खेत की जुताई में कम्पोस्ट 200-250 क्विटल,75 किलोगा्रम नेत्रजन, 90 किलोग्राम फॉस्फोरस एवं 100 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करें. चना की बोआई के लिए उपयुक्त समय चल रहा है. खेत की तैयारी के समय 20 किलोग्राम नेत्रजन, 45 किलोग्राम फॉस्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश एवं 20 किलोग्राम सल्फर प्रति हेक्टेयर की दर से व्यवहार करें. चना के लिए उन्नत किस्म पूसा–256, केपीजी-59(उदय), केडब्लूआर-108, पंत जी 186 एवं पूसा 372 अनुशंसित है. बीज को बेबीस्टीन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें. 24 घंटा बाद उपचारित बीज को कजरा पिल्लू से बचाव के लिए क्लोरपाईरीफॉस 8 मिली प्रति किलोग्राम की दर से मिलावें. पुन: 4 से 5 घंटे छाया में रखने के बाद राईजोबियम कल्चर (पांच पैकेट प्रति हेक्टेयर) से उपचारित कर बोआई करें. छोटे दानों की किस्मों के लिए बीज दर 75 से 80 किलोग्राम एवं बड़े दानों के लिए 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा दूरी 30 गुणा 10 सेमी रखें.
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