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Rajendra Prasad Central Agricultural University, Pusa, Samastipur: रिमझिम बारिश के बाद लोगों को उमस भरी गर्मी से मिली निजात

मौसम का मिजाज रविवार को अचानक बदल गया. लोग कई दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान थे. रविवार को सुबह तकरीबन नौ बजे बूंदाबांदी शुरू हुई, उसके बाद घंटों रिमझिम बारिश होती रही.

Rajendra Prasad Central Agricultural University, Pusa, Samastipur: पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 6.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज

पिछात धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के कार्य को प्राथमिकता देने की सलाह मौसम वैज्ञानिकों ने दी है. सितम्बर में अरहर की बोआई ऊंचास खेत में करने को कहा गया है. अरहर की पूसा-9 व शरद प्रभेद उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित किस्में हैं. बोआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने को कहा गया है. ताकि पौधा स्वस्थ निकल सके.

समस्तीपुर : मौसम का मिजाज रविवार को अचानक बदल गया. लोग कई दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान थे. रविवार को सुबह तकरीबन नौ बजे बूंदाबांदी शुरू हुई, उसके बाद घंटों रिमझिम बारिश होती रही. बारिश के कारण तापमान में गिरावट आयी. आज अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.5 डिग्री सेल्सियस कम रहा. वहीं न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.6 डिग्री कम रहा. बारिश के कारण पिछले 24 घंटे में अधिकतम तापमान में 6.5 डिग्री से-सेल्सियस की गिरावट आयी है. शनिवार को अधिकतम 35.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था, जो सामान्य से 2.2 डिग्री सेल्सियस अधिक था. वहीं न्यूनतम तापमान में महज 0.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आयी है. शनिवार को न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस रहा. बारिश से किसानों के खेतों में लगी खरीफ फसलों, सब्जी की फसलों को लाभ हुआ है. हालांकि बारिश के कारण शहर की सड़कें पूरी तरह किचकिच हो गयी. पैदल चलने वालों को परेशानी हुई. शहर की सड़कों के किनारे जगह-जगह पड़े कचरों की ढेर पर बारिश का पानी करने के कारण बदबू निकलने से लोग परेशान रहे. डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के मुताबिक 4 सितंबर तक उत्तर में कहीं-कहीं हल्की बारिश के आसार है. इस अवधि में भारी बारिश की संभावना नहीं है. इधर डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा मौसम को देखते हुये किसानों को जरूरी सुझाव दिये गये हैं. धान की फसल में पत्ती लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट की निगरानी करने की सलाह दी गयी है. इस कीट के पिल्लू धान के पत्तियों के दोनों किनारों को रेशमी धागे से जोड़कर उसके अन्दर रहते हैं तथा पत्तियों की हरीत्तिमा को खाते हैं. इस प्रकार का लक्षण दिखने पर बचाव के लिए करताप हाईड्रोक्लोराईड दानेदार दवा का 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से व्यवहार करने की सलाह दी गयी है. वहीं पिछात धान की फसल में खरपतवार नियंत्रण के कार्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी गयी है. सितम्बर अरहर की बोआई ऊंचास खेत में करने को कहा गया है. अरहर की पूसा-9 तथा शरद प्रभेद उत्तर बिहार के लिए अनुशंसित है. बोआई के 24 घंटे पूर्व 2.5 ग्राम थीरम दवा से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने को कहा गया है.

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Prabhat Khabar News Desk
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