ब्लड . पांच निगेटिव ग्रुप का नहीं है खून, जरूरत पड़ने पर ढूंढ़े जाते हैं दानवीर

Published at :11 Apr 2016 6:06 AM (IST)
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ब्लड . पांच निगेटिव ग्रुप का नहीं है खून, जरूरत पड़ने पर ढूंढ़े जाते हैं दानवीर

सदर अस्पताल में नहीं है ब्लड बैंक सदर अस्पताल में ब्लड बैंक की समस्या काफी अर्से से है. इस कारण मरीज के परिजनों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. इस दिशा में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है. समस्तीपुर : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक को ब्लड […]

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सदर अस्पताल में नहीं है ब्लड बैंक

सदर अस्पताल में ब्लड बैंक की समस्या काफी अर्से से है. इस कारण मरीज के परिजनों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है. इस दिशा में अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है.
समस्तीपुर : सदर अस्पताल के ब्लड बैंक को ब्लड की जरूरत है. जरूरत मंद लोगों को ब्लड देने के समय अक्सर कर्मी ब्लड नहीं होने की बात कह कर अपने हाथ खड़े कर देते हैं. इस कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
एक यूनिट खून के लिए परिजन ब्लड बैंक के हर शर्त को मानने को तैयार रहते हैं. बावजूद भी सुविधा नहीं मिलती है. जानकारी के मुताबिक ब्लड बैंक में इन दिनों मात्र पांच यूनिट ही खून है. जिसमें ए पॉजिटिव के 2, बी पॉजिटिव के 2 एवं एबी पॉजिटिव के मात्र एक यूनिट ही शामिल हैं. इसके अलावे यहां किसी भी ग्रुप का खून मौजूद नहीं है.
खुद खोजते हैं डोनर
ब्लड बैंक में खून नहीं रहने के कारण मरीज के परिजनों को स्वयं ब्लड दान करनेवालों की खोजबीन करनी पड़ती है. इस प्रक्रिया में काफी समय भी गुजर जाता है. जिससे मरीजों की कठिनाई और बढ़ जाती है.
खून के बदले मिलता है खून
ब्लड प्राप्त करने के लिए पहले उतनी ही मात्रा में ब्लड जमा करना पड़ता है. या यूं कहें कि खून के बदले मरीज के परिजनों से खून लिया जाता है. साथ ही ब्लड के रखरखाव के लिए मरीजों से प्रति यूनिट पांच सौ रुपये ब्लड बैंक लेती है. हालांकि इस लेनदेन की प्रक्रिया में ग्रुप आड़े नहीं आती है.
जिस ग्रुप के ब्लड की जरूरत होती है उन्हें नियमानुकुल वही ब्लड मुहैया कराया जाता है.
35 दिन बाद खराब हो जाता है ब्लड : ब्लड बैंक के कर्मचारियों से मिली जानकारी के मुताबिक ब्लड 35 दिनों के बाद खराब हो जाता है. क्योंकि शरीर से खून निकलने के बाद करीब 35 दिनों तक ही उसके जीवाणु जीवित रहते हैं. जिससे खून खराब हो जाती है. इस कारण या तो 35 दिनों के अंदर खून का इस्तेमाल कर लिया जाता है या उसे समय रहते ही पटना भेज दिया जाता है.
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