कपरूरीग्राम में काठगोदाम एक्स. को रोका

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 May 2015 9:54 AM

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समस्तीपुर : कपरूरीग्राम माल गोदाम के चौबीस घंटे कार्यकाल के विरोध में शुक्रवार को व्यापारियों ने एकजुट होकर स्टेशन परिसर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया. इस क्रम में स्टेशन पर पहुंची काठ गोदाम एक्सप्रेस ट्रेन के आगे कई अज्ञात व्यक्ति के खड़े हो जाने के कारण ट्रेन को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. हालांकि […]

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समस्तीपुर : कपरूरीग्राम माल गोदाम के चौबीस घंटे कार्यकाल के विरोध में शुक्रवार को व्यापारियों ने एकजुट होकर स्टेशन परिसर में सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया. इस क्रम में स्टेशन पर पहुंची काठ गोदाम एक्सप्रेस ट्रेन के आगे कई अज्ञात व्यक्ति के खड़े हो जाने के कारण ट्रेन को कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. हालांकि रेल प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ट्रेन को तत्काल स्टेशन से रवाना कर दिया. इससे ट्रेन में सवार यात्रियों को कुछ खास परेशानी नहीं हुई.

इधर, स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक पर कपरूरीग्राम रैक हैंडलिंग एजेंट एसोसिएशन के बैनर तले जुटे व्यापारियों का कहना था कि जिस तरह से चौबीस घंटे वर्किग आवर का नियम लागू किया जा रहा है उससे सीधे सीधे उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा. इससे खासकर छोटे और मध्यम दर्जे के व्यवसायी प्रभावित होंगे जो अधिकांश इसी रैक प्वाइंट से जुड़ कर अपना माल बाहर से मंगवाते हैं.

व्यवसायियों के मुताबिक रैक प्वाइंट पर मजदूरों की कमी के कारण लगातार काम कराना संभव नहीं है. ऐसे में उन्हें माल अनलोडिंग में विलंब होने पर भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसे वे अधिक दिनों तक नहीं सह सकते हैं. इस नियम को बदलना ही होगा. अन्यथा व्यवसायी अपना माल किसी दूसरे माध्यम से ही मंगवाने के लिए बाध्य हो जायेंगे. रेलवे का नया नियम अव्यवहारिक है. यह मजदूरों और व्यवसायियों को कतई रास नहीं आ रहा है. रेल प्रशासन ने इस पर यदि गंभीरतापूर्वक विचार नहीं किया तो समस्या गहरायेगी. बाद में व्यवसायियों ने माल अधीक्षक और स्टेशन मास्टर को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंप कर उस पर गंभीर विचार करते हुए पुरानी व्यवस्था को बहाल करने का अनुरोध किया. अन्यथा अपना माल कपरूरीग्राम मंगवाने से हाथ खींच लेने का संकेत दिया.

गिनायीं समस्याएं

स्टेशन परिसर में मौजूद व्यवसायियों ने चौबीस घंटे काम के दौरान आने वाली परेशानियों को गिनाते हुए कहा कि यहां पर मजदूरों की सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त नहीं है. रात में बिजली और विधि व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जरूरतों का भी अभाव है. रेलवे इस पर बिना गौर किये ही नया नियम लागू करने पर आमदा है जिसे किसी भी सूरते हाल में सहा नहीं जा सकता है. इसके अलावा कई अन्य समस्याओं का जिक्र करते हुए भी उसे दूर करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की गयी.

व्यवसायियों का कहना था कि माल भाड़ा में निरंतर वृद्धि के कारण रैक की आवक भी पहले की अपेक्षा काफी कम हुई है. व्यवसायी घाटा को पाटने के लिए पहले ही अन्य साधनों के माध्यम से अपना माल मंगाने को विवश हैं. यदि नयी व्यवस्था को लागू किया गया तो माल आवक में और ह्रास होगा. इससे रेलवे को नुकसान होगा. इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की जरूरत है. लेकिन इसके विपरीत नयी व्यवस्था को थोप कर रेलवे अपना नियम लागू करना चाहती है.

जुर्माने का है प्रावधान

व्यापारियों द्वारा मंगवाये गये माल की अनलोडिंग में देर होने पर जुर्माने का प्रावधान है. जानकारी के अनुसार एक रैक में 42 बैगन होते हैं. यदि इसे निर्धारित समयसीमा के अंदर उतारा नहीं जाता है तो भारी जुर्माना चुकाना होगा. देर होने की अवस्था में एक रैक के लिए प्रति घंटे की दर से 63 सौ रुपये जुर्माने का नियम है. समय आगे बढ़ने पर जुर्माने की रकम भी बढ़ती चली जाती है. ऐसे में व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना होगा.

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