आर्मी जवान मामले में प्राथमिकी के बाद बढ़ी पुलिस की मुश्किलें
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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पूसा : असम में पदस्थापित आर्मी जवान जय किशोर सिंह जब तक पूसा बाजार और आसपास के इलाकों में भटकता रहा तब तक उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था लेकिन जैसे ही उसके पिता सारण जिला के तरैया अंतर्गत भरगाई निवासी मोसीद सिंह ने गत 10 अप्रैल को अपने पुत्र के साथ मारपीट का […]
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पूसा : असम में पदस्थापित आर्मी जवान जय किशोर सिंह जब तक पूसा बाजार और आसपास के इलाकों में भटकता रहा तब तक उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था लेकिन जैसे ही उसके पिता सारण जिला के तरैया अंतर्गत भरगाई निवासी मोसीद सिंह ने गत 10 अप्रैल को अपने पुत्र के साथ मारपीट का मामला दर्ज कराया पुलिस के कान खड़े हो गये. जब उसे ढूंढकर सामने लाने की बारी आयी तो उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा है.
थक हार कर स्थानीय पुलिस ने 15 अप्रैल को चौकीदार काशी महतो के बयान पर आर्मी जवान के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कर उसे ढूंढ निकालने के लिए मशक्कत करने में जुट गयी है.
लेकिन इसके 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आर्मी जवान का पता नहीं लग पाया है जिससे परिजनों के साथ स्थानीय पुलिस के उपर भी परेशानियों की स्पष्ट रेखा दिखने लगी है. मामले को उलझता हुआ देख कर तो स्थानीय पुलिस इस मसले पर किसी तरह की टिप्पणी करने से परहेज बरत रही है लेकिन आर्मी जवान के पिता अपने पुत्र को ढूंढने के लिए मुखर होते जा रहे हैं. बताते चलें कि गायब फौजी के पिता ने दर्ज प्राथमिकी में कहा है कि उसका पुत्र असम प्रांत में पुलिस बटालियन काहिल पारा गुवाहाटी में नौकरी करता है. अवकाश लेकर वह घर के लिए निकला था.
गत चार अप्रैल को उसने असम के गुवाहाटी से ट्रेन पकड़ा. समस्तीपुर तक उसका अपने पुत्र के साथ मोबाइल पर बातचीत होती रही. इसके बाद अचानक उसका मोबाइल संपर्क भंग हो गया. इसके बाद आशंकित परिजनों ने छपरा जीआरपी में इसकी सूचना दी.
जहां से इस मामले को अपराध शाखा में स्थानांतरित कर दिया गया. पुलिसिया छानबीन के क्रम में मोबाइल लोकेशन के आधार पर उन्हें जानकारी दी गयी कि उसका फौजी पुत्र पूसा थाना के महमदा गांव में विक्षिप्त हालत में है. इसके बाद पूसा थाने को इसकी जानकारी दी गयी. इस बीच फौजी जय किशोर सिंह पूसा के सैदपुर पुल पर जख्मी हो गया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फौजी को सैदपुर पूसा के कुछ असामाजिक तत्वों ने मारपीट कर कीमती सामान छीन लिये. थाने के सहयोग से उस फौजी को किसी तरह समस्तीपुर जाने वाली बस में बैठा दिया गया. लेकिन वह अब तक अपने घर नहीं पहुंचा. इसके बाद पिता की आशंका पर चौकीदार के बयान पर फौजी के अपहरण से संबंधित प्राथमिकी दर्ज करनी पड़ी. इसके बाद मामला और भी उलझता जा रहा है. इससे परिजनों के साथ स्थानीय पुलिस की मुश्किलें भी बढ़ती ही जा रही है.
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