सहरसा में बच्चों ने सीखी सुजनी कला, भरतनाट्यम और रंगमंच की बारीकियां
सहरसा - भरतनाट्यम सिखते बच्चे
Saharsa Kilkari Summer Camp : सहरसा के किलकारी समर कैंप में बच्चे सिर्फ छुट्टियां नहीं बिता रहे, बल्कि लोक कला, शास्त्रीय नृत्य और रंगमंच की बारीकियां सीखकर अपनी प्रतिभा को नई उड़ान दे रहे हैं.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Saharsa Kilkari Summer Camp : किलकारी बिहार बाल भवन, सहरसा में आयोजित ‘चक धूम-धूम’ समर कैंप बच्चों के लिए रचनात्मकता और सांस्कृतिक सीख का केंद्र बन गया है. समर कैंप में बच्चों को बिहार की पारंपरिक लोक कलाओं, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और रंगमंच की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास को भी नई दिशा मिल रही है.
सुजनी कला से जुड़ रहे बच्चे, जान रहे बिहार की सांस्कृतिक विरासत
चित्रकला विधा के तहत आयोजित सुजनी कला कार्यशाला में बच्चों को बिहार की प्रसिद्ध पारंपरिक लोक कला सुजनी से परिचित कराया गया. मिथिला अंचल की यह कला अपनी विशिष्ट कढ़ाई शैली और लोक जीवन के चित्रण के लिए जानी जाती है.

कार्यशाला में बच्चों को सुजनी कला का इतिहास, उसका सांस्कृतिक महत्व, डिज़ाइन निर्माण, रंग संयोजन और हस्तकला की तकनीकों की जानकारी दी गई. विशेषज्ञ सविता सुमन, अभिभावक खुशबू कुमारी और चित्रकला प्रशिक्षिका अन्नू कुमारी बच्चों को इस कला की बारीकियां सिखा रही हैं.
रंगमंच से बढ़ रहा आत्मविश्वास
समर कैंप के अंतर्गत आयोजित सात दिवसीय प्रस्तुति आधारित नाट्य कार्यशाला में नाट्य विशेषज्ञ राहुल कुमार राज बच्चों को श्रमदान के रूप में प्रशिक्षण दे रहे हैं. कार्यशाला में अभिनय, संवाद अदायगी, मंच संचालन, भाव-भंगिमा, शारीरिक अभिव्यक्ति और चरित्र निर्माण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
राहुल कुमार राज ने कहा कि रंगमंच बच्चों में आत्मविश्वास, टीम भावना और सामाजिक समझ विकसित करने का प्रभावी माध्यम है. उनके मार्गदर्शन में बच्चे नाटक तैयार कर रहे हैं, जिसकी प्रस्तुति समर कैंप के समापन समारोह में की जाएगी.
यह भी पढ़ें: Bihar Township Land Ban: जमीन बेचनी है तो मत घबराइए, बंदी के बीच अब आवास बोर्ड खरीदेगा आपकी जमीन
Saharsa Kilkari Summer Camp: भरतनाट्यम की मुद्राएं सीख रहे नन्हे कलाकार
15 दिवसीय भरतनाट्यम कार्यशाला में विशेषज्ञ साहिल कुमार बच्चों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली का प्रशिक्षण दे रहे हैं. वे बच्चों को मूलभूत मुद्राएं, हस्तमुद्राएं, ताल-लय, भावाभिव्यक्ति और मंचीय प्रस्तुति की तकनीकों से परिचित करा रहे हैं.

साहिल कुमार स्वयं किलकारी से अपनी कलात्मक यात्रा शुरू कर चुके हैं और अब विशेषज्ञ के रूप में बच्चों का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
यह भी पढे़ं: बिहार: कौन हैं IAS योगेश सागर और अभिलाषा शर्मा? जिनके ठिकानों पर SVU ने की बड़ी छापेमारी
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर किलकारी का जोर
प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक प्रणव भारती ने कहा कि किलकारी का उद्देश्य बच्चों को केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें कला, संस्कृति और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के विविध अवसर प्रदान करना भी है.
उन्होंने कहा कि सुजनी कला, भरतनाट्यम और रंगमंच जैसी गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
यह भी पढ़ें: Bihar Township Land Ban: जमीन बेचनी है तो मत घबराइए, बंदी के बीच अब आवास बोर्ड खरीदेगा आपकी जमीन
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










