एक बार फिर डाउन हुआ मौसम का पारा

एक बार फिर डाउन हुआ मौसम का पारा सर्द हवा और कंपकंपी का बढ़ गया जोरअलाव की नहीं है व्यवस्था, लोग हो रहे परेशानप्रतिनिधि, सहरसा/ सिमरी बख्तियारपुर गर्म धूप से ताजगी का अहसास करने वाले लोगों को एक बार फिी मौसम का पारा डाउन होने से परेशानी बढ़ गयी है. सोमवार को एक बार फिर […]
एक बार फिर डाउन हुआ मौसम का पारा सर्द हवा और कंपकंपी का बढ़ गया जोरअलाव की नहीं है व्यवस्था, लोग हो रहे परेशानप्रतिनिधि, सहरसा/ सिमरी बख्तियारपुर गर्म धूप से ताजगी का अहसास करने वाले लोगों को एक बार फिी मौसम का पारा डाउन होने से परेशानी बढ़ गयी है. सोमवार को एक बार फिर सर्द हवाओं ने वातावरण को जकड़ लिया था. जिसका जोर मंगलवार को भी रहा. सुबह से घना कुहासा और पछुआ हवा की बयार ने फिर से ठंड की बढ़ोतरी का अहसास दिला दिया. देर तक लोग रजाई में दुबके रहे. जबकि जिला प्रशासन द्वारा अभी तक शहर के चौक चौराहों पर अलाव की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. हालांकि दिन भर सूरज के आसमान पर रहने के कारण दिन भर ठंढ़ का अहसास थोड़ा कम महसूस होता रहा, लेकिन सूरज के ढ़लते ही ठंडी हवाओं ने पूरे परिवेश पर अपना कब्जा जमा लिया और लोग ठिठुरने को मजबूर होने लगे. शुक्रवार को होने वाली मकर संक्रांति को लेकर बाजार में चहल पहल शुरू हो गयी है. ठंड में ठिठुरते लोगों को खरीदारी करने में परेशानी का सामना करना पड़ा. बाजार में न तो प्रशासन के द्वारा और न ही किसी संस्था या व्यक्ति विशेष द्वारा ही अलाव की व्यवस्था की गयी थी. इधर, सिमरी बख्तियारपुर प्रतिनिधि के अनुसार, अनुमंडल के सिमरी बख्तियारपुर सलखुआ एवं बनमा इटहरी प्रखंड में गत एक सप्ताह से जारी शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. इस कारण हाट बाजार, कोर्ट कचहरी, अस्पताल, निबंधन कार्यालय, रेलवे स्टेशनों पर लोगों की आवाजाही कम हो गयी है. बावजूद प्रशासन द्वारा चौक चौराहे पर अलाव की व्यवस्था हवा हवाई साबित हो रही है. इस कड़ाके की ठंड में गरीब एवं मजदूर लोगों पर ज्यादा असर पड़ रहा है. गरीबों के बीच कंबल वितरण सिर्फ सपना रह गया है. भीषण कंपकंपी एवं भारी शीतलहर में बच्चे स्कूल एवं कोचिंग में पढ़ने जाने को मजबूर है. इस कड़ाके की ठंड में बस गर्म कपड़े बेचने वालों की चेहरे पर मुस्कान है. विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों ने प्रशासन से पर्याप्त मात्रा में अलाव की व्यवस्था करने की मांग की है. दिख रही थी बाध्यतासुबह जब तापमान गिरता जा रहा था और बड़े बूढे अपने-अपने घरों में रजाइयों के अंदर दुबके थे. तब छोटे-छोटे मासूम नन्हें-मुन्ने स्कूल की ओर जाने के लिये लंबे-लंबे डग भर रहे थे. सुबह आठ बजे के करीब जब सड़कों पर सिर्फ धुंध व कुहासे का अतिक्रमण था. आम व्यक्ति भी नदारद थे. ऐसे समय में सिर्फ और सिर्फ निजी स्कूलों के बस, भान व रिक्शा ही दौड़ लगा रहे थे. कई बच्चों को तो उनके अभिभावक मोटरसाइकिल पर बिठा स्कूल पहुंचाते देखे गये. ऐसे में जब ठंड बढ़ रही है और बच्चों को स्कूल जाने की मजबुरी बनी हुई है. खासकर अभिभावकों को सावधान और निगाह बनाये रखने की जरूरत है. बच्चों को सर से पैर तक ढ़ंक कर ही स्कूल भेजने की कोशिश करें. साथ ही घर में भी उनके कपड़ों व गतिविधि पर खास ध्यान रखें.फोटो – ठंड 7 – कंपकंपाती ठंड में बाइक से जाता एक परिवारफोटो – ठंड 8 – शहर का व्यस्त रहने वाला डीबी रोड पर सुबह आठ बजे छायी धुंध
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