कोसी की चुनावी राजनीति: बैलेट नहीं, यहां बुलेट से तय होते हैं मुखिया जी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jan 2016 1:46 AM (IST)
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पंचायत चुनाव की बढ़ी सरगरमी, दियारा में तय होने लगे प्रत्याशी सहरसा नगर : वोट से चोट कर लोकतंत्र में मजबूत भागीदारी दिखाने का जनता का दावा कोसी के दियारा क्षेत्र में हवा हवाई साबित होता है. यहां पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर की जगह बुलेट की भूमिका ज्यादा प्रभावी होती है. इसकी गूंज चुनाव […]
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पंचायत चुनाव की बढ़ी सरगरमी, दियारा में तय होने लगे प्रत्याशी
सहरसा नगर : वोट से चोट कर लोकतंत्र में मजबूत भागीदारी दिखाने का जनता का दावा कोसी के दियारा क्षेत्र में हवा हवाई साबित होता है. यहां पंचायत चुनाव में बैलेट पेपर की जगह बुलेट की भूमिका ज्यादा प्रभावी होती है.
इसकी गूंज चुनाव बाद भी सुनायी देती रहती है. बीते चुनाव बाद भी चिड़ैया ओपी क्षेत्र में मुखिया विकास चौधरी के भाई राजेश की हत्या चुनावी रंजिश का ही परिणाम था. इस क्षेत्र की खास बात यह है कि काश व पटेर को लेकर रंक्तरंजित रहने वाले दियारा में नक्सली से लेकर अपराधी तक पंचायत चुनाव में अपनी गोटी लाल करने की फिराक में रहते हैं. दबंगों द्वारा क्षेत्र में भावी प्रत्याशी भी तय किये जाने लगे हैं.
अब शुरू हो चुकी है तैयारी: पंचायत चुनाव का बिगुल बजते ही कोसी का दियारा फिर माफियाओं के निशाने पर आ चुका है. क्षेत्र में नये-नये चेहरों का आना शुरू हो गया है. अवैध हथियारों की आवाजाही से भी इंकार नहीं की जा सकती है. सलखुआ प्रखंड के कबीरा, चानन, अलानी, साम्हरखुर्द सहित अन्य पंचायतों में मतदाता भी खामोश हो गये हैं. भावी प्रत्याशियों के भय से लोग रास्ता बदलने लगे हैं.
सीमावर्ती क्षेत्र का मिलता है फायदा : सहरसा-खगड़िया की सीमा पर स्थित दियारा में हमेशा से ही अपराधी व आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का बोलबाला रहा है. बालू और पानी क्षेत्र की पहचान रही है. घोड़ी व नाव को समृद्ध लोग यातायात के साधन के रूप में उपयोग करते हैं. सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण अपराधी दोनों जिले की सीमा को केंद्र बना सरकार व प्रशासन को चुनौती देते हैं.
फरकिया का इलाका चारों तरफ से पानी से घिरे होने की वजह से नाव द्वारा कहीं भी आसानी से आया जाया जा सकता है.
चुनाव तक ही सीमित रहती है सरकार: कोसी दियारा की भूमि हमेशा से अपराध की भूमि मानी गयी है. यहां नक्सलियों से लेकर रमेश यादव, छबि लाल यादव, रामपुकार यादव आदि कई ऐसे कुख्यात हुए, जिन्होंने इस दियारा इलाके को रक्त रंजित कर दिया.
पुलिस अपराध को रोकने में नाकाम रही है, इसके पीछे अपराधियों को जनता का मौन समर्थन मिलना बताया जाता है. ज्ञात हो कि पूर्वी कोसी तटबंध के भीतर बसे चानन, अलानी, कबीरा, साम्हरखुर्द ,टेंगराहा, गोरीडीह, पिपरा, सितुआहा, हरिणसारी, सतवेर, कोपरिया पंचायत के लोग विकास की बाट देख रहे है. जनता महज चुनावी प्रक्रिया से ऊब चुकी है. फरकिया के नाम से जाना जाने वाला तटबंध के अंदर बसने वाले लोग एक बार फिर पंचायत चुनाव के बहाने अपनों को खोने की आशंका से डरे हुए हैं.
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