मौसम के अनुसार बदलने लगा भोजन का जायका

सहरसा मुख्यालय: ठंड का महीना अब विदागरी बेला में है और धीरे-धीरे गरमी का महीना प्रवेश करता जा रहा है. लोगों के शरीर से स्वेटर, जैकेट, मफलर, चादर जैसे गरम कपड़े उतर गये हैं. धूप की तपिश लगातार बढ़ती जा रही है. दिन में पंखा चलाने की नौबत आने लगी है. अभी सिर्फ रात में […]
धूप की तपिश लगातार बढ़ती जा रही है. दिन में पंखा चलाने की नौबत आने लगी है. अभी सिर्फ रात में हल्की रजाइयों से शरीर को ढकने की जरूरत हो रही है. मौसम में बदलाव के साथ अब भोजन का जायका भी बदलने लगा है. गरम भोजन की जगह पेट को ठंढक पहुंचाने वाले भोज्य पदार्थ रूचिकर लगने लगे हैं. फू लगोभी, पतगोभी से मन ऊब चुका है. बीम व सीम पुरानी लगने लगी है. समय के अनुरूप बाजार में मौसमी सब्जियां उतर चुकी हैं. लोगों का झुकाव उधर बढ़ता जा रहा है. हालांकि नयी हरी सब्जी की कीमत अभी सामान्य जेब के अनुकूल नहीं है. फिर भी स्वाद में बदलाव लाने के लिए कम मात्र में ही सही, लोग नई सब्जियां खरीद रहे हैं. इधर बाजार में रोज सब्जियों की कीमत गिरती जा रही है.
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