न सफाई न पानी, चलने के काबिल नहीं है चलंत शौचालय

Updated at : 21 Nov 2019 7:13 AM (IST)
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न सफाई न पानी, चलने के काबिल नहीं है चलंत शौचालय

विष्णु स्वरूप, सहरसा : भारत सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय द्वारा प्रायोजित स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में जगह बनाने के लिए तत्कालीन पदाधिकारी नीलाभ कृष्ण व सिटी मैनेजर राजीव कुमार ने कहा था कि सहरसा को ओडीएफ करने की तैयारी की जा रही है. शहर कचरा मुक्त और खुले में शौच से मुक्त होगा. […]

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विष्णु स्वरूप, सहरसा : भारत सरकार के हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स मंत्रालय द्वारा प्रायोजित स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में जगह बनाने के लिए तत्कालीन पदाधिकारी नीलाभ कृष्ण व सिटी मैनेजर राजीव कुमार ने कहा था कि सहरसा को ओडीएफ करने की तैयारी की जा रही है. शहर कचरा मुक्त और खुले में शौच से मुक्त होगा.

वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी प्रभात रंजन ने इस दिशा में काम किया और सहरसा को ओडीएफ बनाने अर्थात खुले में शौच से मुक्त करने की दिशा में गंभीर प्रयास भी किये हैं. स्वच्छता के लिए शहर में बड़े प्रयास किये जा रहे हैं. नगर परिषद के बजट में सभी जरूरतों का प्रावधान भी रखा गया था.
वर्ष 2018-19 का अनुमानित व्यय एक अरब 15 करोड़ रुपये से ज्यादा था. इस बजट में 25 करोड़ से अधिक का लाभ भी दिखाया गया. अन्य बातों और मुख्य बिंदु के अतिरिक्त शहर में पार्किंग एरिया डेवलपमेंट, महापुरूषों की मूर्ति, पेड़ पौधे लगाने के वास्ते और सीवरेज ड्रेनेज के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान था. साथ ही चलंत शौचालय या मोबाइल टॉयलेट सहित अन्य के लिए व इनके रखरखाव के लिए नब्बे लाख रुपये का प्रावधान था.
स्थिति है चिंताजनक
शहर के कई स्थानों पर खड़े चलंत शौचालयों की स्थिति स्थिति चिंताजनक है. इसका रखरखाव नहीं होता है और ना ही पानी की कोई व्यवस्था है. जबकि नगर परिषद ही इसकी साफ-सफाई का जिम्मा उठाता है. वार्ड नंबर 11 में रखे चलंत शौचालय का उपयोग कोई नहीं करता, स्थानीय लोग कहते हैं कि यहां सभी के घरों में शौचालय हैं.
यहां इसकी उपयोगिता नहीं है, किसी बाजार, बस स्टैंड या रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर लगे तो इसका बेहतर उपयोग होगा. कचहरी रोड में स्टेडियम के पीछे एक मलिन बस्ती है, आसपास की बड़ी आबादी शौच के लिए स्टेडियम के दीवारों का सहारा लेती है और शहर को खुले में शौच से मुक्त करने के उद्देश्यों पर पानी फेर देती है.
आसपास के लोगों का कहना है कि इन चलंत शौचालयों का कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है. इसमें पानी नहीं है, इसके नलके टूटे पड़े हैं और रखरखाव भी नहीं होता है. ताज्जुब की बात यह है कि इसके उपयोग के प्रति जागरूकता का भी अभाव है. लोग इसका बेहतर उपयोग नहीं कर पा रहे हैं.
कहते हैं अधिकारी: कार्यपालक अधिकारी प्रभात रंजन बताते हैं कि इस शहर के 13,242 व्यक्तिगत शौचालय बनाने का लक्ष्य था. जिसे हमने ससमय पूरा कर लिया और हमारा शहर खुले में शौच से मुक्त है. मलिन बस्ती और भीड़-भाड़ की जगहों को चिह्नित कर वहां भी मोबाइल शौचालय लगा दिया गया है. सभी जरूरत की जगहों पर 10 मोबाइल टॉयलेट लगाया गया है. जिसका मेंटेनेंस नगर परिषद करता है.
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