सौरबाजार-बैजनाथपुर जोन में डीआइ नहीं रहने से कोरेक्स कारोबारियों की बल्ले-बल्ले

Updated at : 24 Sep 2019 8:07 AM (IST)
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सौरबाजार-बैजनाथपुर जोन में डीआइ नहीं रहने से कोरेक्स कारोबारियों की बल्ले-बल्ले

सहरसा : एक तरफ किसी तरह का अपराध होने पर लोग पुलिस को कोसना शुरू कर देते हैं. हरेक अपराध के बाद कोरेक्स की चर्चा लोगों की जुबान पर आ जाती है, लोग पुलिस पर कोरेक्स व नशीली पदार्थों के कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा देते हैं. लेकिन आखिर पुलिस के भी […]

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सहरसा : एक तरफ किसी तरह का अपराध होने पर लोग पुलिस को कोसना शुरू कर देते हैं. हरेक अपराध के बाद कोरेक्स की चर्चा लोगों की जुबान पर आ जाती है, लोग पुलिस पर कोरेक्स व नशीली पदार्थों के कारोबारियों पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगा देते हैं. लेकिन आखिर पुलिस के भी अधिकार की कोई सीमा है. वह उससे हट कर कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है. कोरेक्स जो प्रतिबंधित दवा है, दुकानदार को बिना चिकित्सीय पुर्जा का नहीं बेचना है.

लेकिन पैसे की लालच व युवाओं के बीच नशे के रूप में धड़ल्ले से उपयोग होने के कारण यह खूब फल फूल रहा है. पुलिस के द्वारा लगातार कार्रवाई के बाद भी कारोबारी अपने कारोबार से बाज नहीं आ रहे हैं. दो दिन पूर्व बैजनाथपुर पुलिस शिविर क्षेत्र में सौरबाजार पुलिस द्वारा कार्रवाई करने व कोरेक्स बरामद होने के बाद कई तरह की चर्चाएं सामने आयी है.
पुलिस ने कार्रवाई के बाद मामले की जानकारी ड्रग इंस्पेक्टर सहित सिविल सर्जन को दी. लेकिन उस क्षेत्र में बीते छह माह से अधिक से किसी भी ड्रग इंस्पेक्टर की पदस्थापना या प्रभार नहीं होने के कारण जिले में पदस्थापित तीन ड्रग इंस्पेक्टर हों या सिविल सर्जन के द्वारा अधिकृत अधिकारी, मामले की जांच पड़ताल को नहीं पहुंचे.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बात की जानकारी कारोबारियों को होने के कारण व इस मामले में पुलिस के द्वारा विशेष कार्रवाई नहीं किये जाने की बात पता रहने के कारण कारोबारी जमकर अपना कारोबार कर रहे हैं. उन्हें पता है कि पुलिस कार्रवाई के बाद ड्रग इंस्पेक्टर के लिखित आवेदन पर ही मामला दर्ज करती है. पुलिस इस तरह की कार्रवाई में उसके विशेषज्ञ या सिविल सर्जन के द्वारा अधिकृत अधिकारी के अनुसार ही अग्रतर कार्रवाई कर सकती है.
कई कार्रवाईओं की गवाह बन चुकी है पुलिस
सदर एसडीपीओ के नेतृत्व में इससे पूर्व जिला मुख्यालय में कई बड़ी कार्रवाई कफ सिरप के विरुद्ध हो चुकी है. फरवरी माह में रिफ्यूजी कॉलोनी से दर्जनों कार्टून, बीते मई माह में कायस्थ टोला से नौ सौ बोतल, जुलाई माह में पंचवटी चौक के समीप एक घर से लगभग दो दर्जन कार्टून कफ सिरप जब्त की गयी थी.
इससे पहले भी कई कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन कारोबारी अभी भी बाज नहीं आ रहे है. पुलिस ने इस तरह की कई कार्रवाई कर ड्रग इंस्पेक्टर को सूचित किया है. सूचना पर ड्रग इंस्पेक्टर ने पहुंच मामले की तहकीकात कर सदर थाना में मामला भी दर्ज कराया है. लेकिन ड्रग इंस्पेक्टर या अन्य अधिकारी के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. जिसका फायदा भी कारोबारी खूब उठा रहे हैं.
मामले की जानकारी उन्होंने स्वयं सिविल सर्जन व ड्रग इंस्पेक्टर को दी थी. उन्होंने उस क्षेत्र में किसी भी ड्रग इंस्पेक्टर की पोस्टिंग नहीं रहने व पदस्थापित ड्रग इंस्पेक्टर के पास प्रभार नहीं रहने के कारण मामले की जांच करने व अग्रतर कार्रवाई करने से मना कर दिया. उनके स्तर से विभाग को इस तरह की परेशानी से संबंधित पत्र भेजा जायेगा.
राकेश कुमार, पुलिस अधीक्षक
वह अभी मुख्यालय से बाहर हैं. पुलिस के द्वारा कोरेक्स पकड़ाने की सूचना मिली थी. उस क्षेत्र में किसी ड्रग इंस्पेक्टर की पोस्टिंग या प्रभार नहीं रहने के कारण अग्रतर कार्रवाई नहीं की जा सकती है. नियम के विपरीत कोई अधिकारी अपने क्षेत्र के अलावे दूसरे क्षेत्र में जांच या कार्रवाई नहीं कर सकते हैं. यदि पुलिस को लगता है कि गलत है तो वह मामला दर्ज कर जांच के लिए भेजेंगे तो सहयोग किया जायेगा.
मेडिकल दुकान से पांच-दस बोतल पकड़ाना गलत नहीं है. कोरेक्स प्रतिबंधित दवा है, लेकिन उसके क्रय-विक्रय पर रोक नहीं है. नियमानुसार दुकानदार क्रय-विक्रय कर सकते हैं. ड्रग इंस्पेक्टर मेडिकल की ही जांच कर सकते है. घर, गली व अन्य जगहों पर यदि इस तरह का कारोबार की जानकारी पुलिस को मिलती है तो जिस क्षेत्र में ड्रग इंस्पेक्टर है, वहां के सहयोग किया जाता है.
ललन प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन
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