बारिश से बढ़ा बाढ़ का खतरा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :17 Aug 2016 5:59 AM (IST)
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लापरवाही. जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से शहरवासी बेहाल बेतरतीब मकानों के बनने से समस्या बढ़ी सासाराम (नगर) : शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है. अब और थोड़ी सी बारिश होने पर स्थिति भयावह हो सकती है. यह परिस्थिति के पैदा होने का एक कारण शहर में जलनिकासी की व्यवस्था का नहीं […]
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लापरवाही. जलनिकासी की व्यवस्था नहीं होने से शहरवासी बेहाल
बेतरतीब मकानों के बनने से समस्या बढ़ी
सासाराम (नगर) : शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है. अब और थोड़ी सी बारिश होने पर स्थिति भयावह हो सकती है. यह परिस्थिति के पैदा होने का एक कारण शहर में जलनिकासी की व्यवस्था का नहीं होना भी है़ फिलहाल शहर का 70 प्रतिशत इलाका जलमग्न हो गया है.
शहर के कई वार्डों में बारिश का पानी लोगों के घरों में घुस गया है. वार्ड नंबर 34 व 35, बौलिया रोड, नूरनगंज, प्रतापगंज, न्यू एरिया आदि में तो चार से पांच फुट पानी जमा हो गया है. माइको स्थित पुराने जीटी रोड पर पानी बह रहा है. सड़क के किनारे के चाट को लोग भर दिये हैं. पहले ये चाट बरसात के मौसम में बहुत उपयोगी साबित होते थे.
सासाराम ऐतिहासिक शहर है. आजादी से पहले मुगल काल या जमींदारी के समय इस शहर को हर दृष्टिकोण से सुरक्षित व सुविधायुक्त बनाया गया था. शहर के चारों तरफ नदी का निर्माण कराया गया था. बरसात में इसी नदी से शहर के पानी को निकाला जाता था. अन्य मौसम में इस नदी के पानी से खेती होती थी. आज हालात बदल गये हैं. सभी पुरानी नदियों का अतिक्रमण हो गया है.
कहीं प्रशासन तो कहीं आम लोगों की महत्वाकांक्षा की भेंट चढ़ी नदियों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है. जानकार बताते हैं कि कभी कैमूर पहाड़ी से तीन नदियां निकलती थीं. जो शहर के गंदगी को समेट कर करगहर ,कोचस तो उधर, बिक्रमगंज होते हुए बक्सर गंगा नदी में मिल जाती थी. इसमें एक मात्र कोई नदी ही बरसात के दिनों में दिखती है. एक नदी धुआंकुंड से निकल दर्जनों गांवों को पार कर रौजा के आउटलेट से होते हुए फजलगंज तकिया से गुजरती थी. उसे चेत पांडेय का नदी कहा जाता है. इसका अस्तित्व अब समाप्ती के कगार पर है.
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