इस साल भी डूबेगा नेहरू शिशु उद्यान

Published at :04 Jul 2016 2:53 AM (IST)
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इस साल भी डूबेगा नेहरू शिशु उद्यान

प्रशासन व नगर पर्षद की बेरुखी बनी कारण बच्चों के खेलनेवाला स्थान भी सुरक्षित नहीं है. प्रशासन व नगर पर्षद की बेरुखी के कारण नेहरू शिशु उद्यान में पानी जमा होने लगा है. पिछले साल भी बरसात में इस पार्क की यही स्थिति थी. पानी जमा होने के कारण पार्क के 30 पेड़ सूख चुके […]

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प्रशासन व नगर पर्षद की बेरुखी बनी कारण

बच्चों के खेलनेवाला स्थान भी सुरक्षित नहीं है. प्रशासन व नगर पर्षद की बेरुखी के कारण नेहरू शिशु उद्यान में पानी जमा होने लगा है. पिछले साल भी बरसात में इस पार्क की यही स्थिति थी. पानी जमा होने के कारण पार्क के 30 पेड़ सूख चुके हैं.
सासाराम कार्यालय : शहर में बच्चों के खेलने व बुजुर्गों के टहलने व योग करने के लिए एकमात्र स्थान नेहरू शिशु उद्यान है. वर्तमान में इस पार्क की हालत भी बदतर हो गयी है़
नगर पर्षद व जिला प्रशासन की बेरुखी के कारण पार्क में जलजमाव होने लगा है. पिछले वर्ष जलजमाव के कारण पार्क के उत्तर दिशा में लगे करीब 30 पेड़ सूख चुके हैं. अभी हल्की ही बारिश में पार्क में जलजमाव शुरू हो गया है़ अधिक बारिश होने पर पार्क के पानी में डूबने का खतरा बढ़ जायेगा. इसका कारण पार्क के पास की जल निकासी की व्यवस्था का घ्वस्त होना है. नगर पार्षद जलनिकासी की मुकम्मल व्यवस्था कराने में विफल साबित हुए है़
बाबू जगजीवन राम ने दिलाई थी जमीन
वर्ष 1967 में सासाराम लोकसभा क्षेत्र के सांसद व रेल मंत्री बाबू जगजीवन राम ने रेलवे से नगर पर्षद को करीब डेढ़ एकड़ जमीन लीज पर बच्चों के पार्क निर्माण के लिए दिलायी थी. इस जमीन पर पार्क बना, जो अब भी शहर का एक मात्र पार्क का तगमा निये हुए है.
पार्क में जलजमाव से सूख चुके हैं 30 पेड़, हरियाली गायब
खूबसूरत बनाने में योगदान
80 के दशक में डीएम रहे एसएनपीएन सिन्हा ने पार्क में लॉन टेनिस का कोर्ट बनवाया था. पार्क परिसर में स्वीमिंग पुल के लिए गडढ़े खोदे गये थे, हालांकि वह पूरे नहीं हुए. उन्हीं की देख-रेख में पार्क परिसर में लाइब्रेरी खुली थी. कई तरह के पौधे लगाये गये थे.
90 के दशक में पार्क बन गया था कूड़ा डंपिंग स्थल
90 के दशक में पार्क का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका था. न गेट बचा था और न ही पौधे थे. नगर पर्षद उसको कूड़ा डंपिंग स्थल बना चुका था. 1996 में तत्कालीन डीएम समीमुद्दीन अहमद व डीडीसी अरुणीश चावला की उपस्थिति में नगर विकास समिति ने पार्क में सब्जी बाजार बनाने का निर्णय लिया था. इसका शहर के कुछ लोगों ने विरोध किया था.
हाइकोर्ट के आदेश पर बचा पार्क
नगर विकास समिति के निर्णय के खिलाफ समाजसेवी दशरथ दूबे ने हाइकोर्ट में सीडब्लूजेसी 3777/96 दाखिल किया था. श्री दूबे ने बताया कि उस समय के मुख्य न्यायाधीश बाधवा ने निर्णय दिया कि जमीन बच्चों के पार्क के लिए है और वहां पार्क ही बनेगा. इसके बाद पार्क की वर्तमान रूपरेखा तैयार हुई और आज सभी आयु के लोग पार्क का आनंद उठाते हैं.
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