शराब की जगह पी रहे गुलाबजल!

Published at :14 Apr 2016 8:26 AM (IST)
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शराब की जगह पी रहे गुलाबजल!

बिक्रमगंज : शराब पीना व पीलाना दोनों अपराध है. नीतीश सरकार के इस फैसले को मानने में इनसान के साथ देवताओं की भी रजामंदी दिख रही है. शायद यही कारण है कि सालो भर शराब के नशे में चूर रहने वाले ब्रह्मबाबा सरीखे देवता भी अब शराब पीना छोड़ चुके हैं और देसी-बिदेशी शराब की […]

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बिक्रमगंज : शराब पीना व पीलाना दोनों अपराध है. नीतीश सरकार के इस फैसले को मानने में इनसान के साथ देवताओं की भी रजामंदी दिख रही है. शायद यही कारण है कि सालो भर शराब के नशे में चूर रहने वाले ब्रह्मबाबा सरीखे देवता भी अब शराब पीना छोड़ चुके हैं और देसी-बिदेशी शराब की बोतलों की जगह अब सुगंधित गुलाब जल पी रहे है.
भले ही देसी-बिदेशी शराब की बोतले नहीं मिलती हो, पर ब्रह्म बाबा के अनुयायी उनके भक्त गुलाब जल के प्रसाद को दो बूंद पी कर भूतों को सबक सिखाते हुए उसी स्थल पर बांध देते हैं. यह कारनामा भूतों के प्रसिद्ध मेला सांझौली के घिन्हुब्रह्म स्थान के पास हो रहा है. नीतीश सरकार का पूर्ण शराबबंदी पर मेला परिसर काफी शांत है. कोई ओझा बिना शराब पीये ही पचरा गाता है और अपने इष्ट देव का आह्वान करता है. जब ओझा के इष्ट देव उनके शारीर में प्रवेश करते हैं, तो वह तपावन मांगते हैं, यह तपावन वर्षों पहले तक बोतल में होता था. समय बीतने पर यही तपावन पाउच में आने लगा और फिर बोतल में आया.
पहली अप्रैल वर्ष 2016 से लागू पूर्ण शराब बंदी की घोषणा होते ही पहले तो लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि आखिर कैसे इतना बड़ा फैसला लागू होगा. फैसला लागू हुआ और शराब इस कदर हमारे जेहन से गायब होगी इसकी कल्पना शायद ही किसी ने सोची होगी. खैर सरकार का फैसला है लोगों को मानना ही पड़ा. अब जब भूतों के मेले में शराब की बात ओझा-गुणी लोग करते हैं तो पास बैठे बाबा के अनुयायी कहते हैं कि सरकार ने शराब बंद कर दिया है बाबा, तो ओझा जिनके ऊपर ब्रह्म बाबा का साया होता है कहते हैं कि कोई बात नहीं गुलाब जल पीलाओ. अब भागते हुए लोग गुलाब जल लाते हैं और बाबा पी कर भूतों को सही दिशा दिखाते हैं.
क्या होता है इस मेले में : संझौली थाने के खैरा, रवनी, पतरावल, इसरपुरा, चांदी गावों के बीच एक टीलेनुमा स्थान पर स्थित घिंहुब्रम्ह बाबा का एक प्राचीन मंदिर है, जिसे भूतों का देवता कहा जाता है. वहां चैती व दशहरी नवरात्र में नौ दिनों का तक मेला लगता है.
इसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड व बंगाल से भूतों से परेशान लोग अपने दुखों को शांत कराने यहां आते हैं. प्रसिद्ध घिन्हुब्रह्म बाबा के मेले की सरजमी को छूते ही इनसान के ऊपर बैठी प्रेत आत्माएं चिल्लाने लगती है और यहां से भागना चाहती है. पर, यहां आये प्रेत बाधा से ग्रसित लोग के ऊपर की बुरी आत्मा यही पर हो कर रह जातीहै. पतरावल निवासी मनोज सिंह कहते हैं कि यहां आते तो हैं पागलों की तरह मगर लौटते वक्त सामान्य इनसान की तरह.
करगहर : प्रखंड मुख्यालय पर बुधवार को बाल विकास परियोजना के तत्वाधान में पूर्ण शराबबंदी को लेकर जागरूकता रैली निकाली. रैली प्रखंड मुख्यालय से प्रारंभ होकर स्थानीय बाजार तथा सिरिसिया पुल होते हुए प्रखंड मुख्यालय पर समाप्त हो गयी. रैली में शामिल लोगों द्वारा आम लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए नारे लगाये गये. रैली का नेतृत्व सीडीपीओ रीना श्रीवास्तव ने किया.
रैली में प्रवेक्षिका निर्मला कुमारी, आरती कुमारी, फरजाना खातून, गीतांजलि कुमारी, प्रियंका कुमारी, सेविका इन्द्रमुन्नी, कुमारी रीता सिंह, लाली देवी, शारदा कुमारी सहित कई लोग शामिल थे. वही, मध्य विद्यालय बभनी व उर्दू प्राथमिक विद्यालय बभनी में भी बुधवार को स्कूल के छात्र छात्राओं द्वारा रैली निकाली गयी. रैली बभनी बाजार होते हुए गांव की गलियों से निकाली गयी. रैली में प्रधानध्यापक उपेंद्र कुमार सिंह, अमित कुमार सिंह आदि शामिल थे.
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