शव गल कर बन गया कंकाल, पर नहीं नसीब हुआ चिता

Updated at : 25 Jun 2019 6:53 AM (IST)
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शव गल कर बन गया कंकाल, पर नहीं नसीब हुआ चिता

सासाराम नगर : मुजफ्फरपुर की तरह सासाराम सदर अस्पताल के शव गृह में आठ दिनों से छह लावारिस लाशें सड़ रही हैं. ऐसी स्थिति पहली बार नहीं देखा जा रहा है. जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से लाये गये लावारिस लाशों को पोस्टमार्टम के बाद उसी स्थिति में छोड़ दिया जाता हैं. जबकि, नियम है […]

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सासाराम नगर : मुजफ्फरपुर की तरह सासाराम सदर अस्पताल के शव गृह में आठ दिनों से छह लावारिस लाशें सड़ रही हैं. ऐसी स्थिति पहली बार नहीं देखा जा रहा है. जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से लाये गये लावारिस लाशों को पोस्टमार्टम के बाद उसी स्थिति में छोड़ दिया जाता हैं. जबकि, नियम है कि 72 घंटे के बाद पहचान नहीं होने पर शव का दाह संस्कार कर देना होता हैं. लेकिन, नियम को सदर अस्पताल में ठेंगा दिखाया जा रहा है.

पोस्टमार्टम के बाद शव तेजी से खराब होता हैं. तीन दिन के बाद शव गल कर पानी की तरह बह जाता है. सदर अस्पताल का शव गृह रिहायशी इलाके से सटे हैं. इससे लोगों को काफी परेशानी होती हैं. जब लोग इसका विरोध करते हैं, तो अस्पताल प्रबंधन सड़े गले शव और कंकालों को निकाल कर शहर से दूर ले जाकर दफनाता हैं.
पुलिस की लापरवाही से हो रही शवों की दुर्दशा :
शवों की दुर्दशा पुलिस की लापरवाही से हो रही है. सदर अस्पताल में लावारिस शव लाने के बाद पुलिस भूल जाती है कि पहचान नहीं होने पर उक्त शव का दाह संस्कार भी करना है. अस्पताल प्रबंधन बार-बार फोन कर शव हटाने के लिए आग्रह करता हैं, तब जाकर संबंधित थाने की पुलिस शव को सदर अस्पताल से हटाती हैं. इसमें आठ से 10 दिन लग जाता हैं, तब तक शव गल कर पूरी तरह कंकाल बन जाता हैं.
संसाधन विहीन है सदर अस्पताल का मर्चरी
शव गृह के बगल में पांच साल पहले ही मरचरी भवन बन कर तैयार हैं. लेकिन, उसमें संसाधन नहीं हैं. मरचरी में 25 शव रखने के लिए योजना हैं. पांच वर्षों से अस्पताल प्रबंधन मरचरी में एसी बॉक्स लगाने के लिए मुख्यालय में पत्राचार कर रहा हैं.
वर्ष 2017 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव ने सदर अस्पताल के निरीक्षण के दौरान दो माह में मरचरी भवन संसाधन युक्त बनाने का आश्वासन दिया था. इसके बाद वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने भी सासाराम में आधुनिक शव गृह और मरचरी बनाने का आश्वासन दिये थे. जानकार बताते हैं कि सरकार व जिला प्रशासन की लापरवाही से शवों की दुर्दशा हो रही है. अस्पताल प्रशासन को स्थानीय लोगों का कोप भाजन बनना पड़ रहा है
बोले अस्पताल उपाधीक्षक
शवों की दुर्दशा का पुलिस जिम्मेदार हैं. पहचान नहीं होने पर 72 घंटे के बाद शव का दाह संस्कार कर दिया जाये, तो ऐसी स्थिति नहीं होगी. इस मामले में डेहरी थाना ज्यादा लापरवाह है. डेहरी थाने से 16 व17 जून को दो लावारिस शव लाया गया था. पोस्टमार्टम के बाद अभी तक शव यहीं पड़ा हुआ हैं. आठ दिन बाद इस गर्मी में शव गल कर कंकाल बन जाता हैं. शव गृह से इतनी बदबू उठती है कि आसपास के लोग परेशान हो जाते हैं.
डाॅ केएन तिेेेवारी, डीएस
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