सासाराम : जिले में 11 पीएचसी, पर एक जगह भी महिला डॉक्टर नहीं

सासाराम कार्यालय : रोहतास जिले के सभी 19 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) महिला डॉक्टर विहीन हैं. पीएचसी में संस्थागत प्रसव की जिम्मेदारी नर्स संभाल रही हैं. वैसे पूरे जिले में मात्र छह महिला डॉक्टर हैं, जिनमें दो सदर अस्पताल सासाराम और दो-दो अनुमंडल अस्पताल डेहरी व बिक्रमगंज में. एक महिला डॉक्टर रेफरल अस्पताल नौहट्टा में […]
सासाराम कार्यालय : रोहतास जिले के सभी 19 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) महिला डॉक्टर विहीन हैं. पीएचसी में संस्थागत प्रसव की जिम्मेदारी नर्स संभाल रही हैं. वैसे पूरे जिले में मात्र छह महिला डॉक्टर हैं, जिनमें दो सदर अस्पताल सासाराम और दो-दो अनुमंडल अस्पताल डेहरी व बिक्रमगंज में. एक महिला डॉक्टर रेफरल अस्पताल नौहट्टा में वर्ष 2016 से योगदान के बाद से ही बिना सूचना गायब हैं.
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण का ही क्यों कहे शहरी क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में महिला रोगियों का इलाज कैसे होता होगी? वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग जनसंख्या नियंत्रण पखवारा मना रहा है. इसमें 375 महिलाओं के बंध्याकरण व 10 पुरुषों के नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है. सदर अस्पताल सासाराम, अनुमंडल अस्पताल डेहरी व बिक्रमगंज को मिला कर मात्र एक सर्जन महिला डॉक्टर है. ऐसे में महिलाओं के बंध्याकरण का लक्ष्य कैसे पूरा होगा?
इसके जवाब में सिविल सर्जन डॉ जनार्दन शर्मा ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण पखवारा में महिलाओं के बंध्याकरण के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं से सहयोग लिया जा रहा है. सिविल सर्जन का बयान ही बता रहा है कि सरकारी अस्पताल में महिला रोगियों की सेवा किस तरह होती होगी. जो सरकारी अस्पताल को अपने काम के लिए दूसरों पर निर्भर है, वह गरीब मरीजों की सेवा कैसे करता होगा.
कैसे होगा करीब 14 लाख महिलाओं का इलाज
बहरहाल स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डाले तो जिले की जनसंख्या 32,80,440 है, इसमें करीब 14 लाख महिला हैं. इतनी बड़ी संख्या के लिए मात्र छह महिला डॉक्टर हैं और वो सभी शहरी क्षेत्र के अस्पतालों में पदस्थापित हैं, तो ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं का इलाज कैसे होता होगा?
पीएचसी के पास झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार
जानकारों की माने तो अधिकतर पीएचसी के समीप निजी नर्सिंग होम व झोला छाप डॉक्टरों की भरमार है. जहां ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं इलाज कराने के लिए मजबूर हैं.
जो अत्यंत गरीब हैं, वे पीएचसी में नर्स के भरोसे प्रसव को बेमन से तैयार होती हैं, तभी तो वर्ष 2017-18 में सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के लक्ष्य 54461 में मात्र 26096 प्रसव ही हो सके. यह आंकड़ा दर्शाता है कि सरकारी अस्पतालों में प्रसव के लिए जाने से महिलाएं कतराने लगी हैं.
सिविल सर्जन डॉ. जनार्दन शर्मा ने कहा कि हमारे यहां महिला डॉक्टरों की बहुत ही कमी है. किसी तरह शहर के तीनों अस्पतालों में दो-दो डॉक्टर रख काम चलाया जा रहा है. महिला डॉक्टर के पदस्थापन के लिए कई बार विभाग से पत्र व्यवहार किया गया है, लेकिन कुछ हो नहीं रहा है.
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