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पूर्णिया विवि को करनी पड़ सकती है नये परीक्षा नियंत्रक की तलाश

Updated at : 22 Jun 2025 6:27 PM (IST)
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पूर्णिया विवि को करनी पड़ सकती है नये परीक्षा नियंत्रक की तलाश

स्वास्थ्य और घरेलू कारणों से पद छोड़ना चाहते हैं वर्तमान परीक्षा नियंत्रक

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-स्वास्थ्य और घरेलू कारणों से पद छोड़ना चाहते हैं वर्तमान परीक्षा नियंत्रक पूर्णिया. परीक्षा विभाग को लेकर पूर्णिया विवि की चुनौतियां बढ़नेवाली हैं. निकट भविष्य में उसे नये परीक्षा नियंत्रक की तलाश करनी पड़ सकती है. दरअसल, वर्तमान परीक्षा नियंत्रक प्रो. अरविंद कुमार वर्मा अब इस पद को छोड़ना चाहते हैं. इसके लिए उन्होंने विवि प्रशासन से आग्रह भी किया है. इसके पीछे का कारण परीक्षा नियंत्रक प्रो. अरविंद कुमार वर्मा की ओर से स्वास्थ्य संबंधी और घरेलू कठिनाई दर्शाया गया है. इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक प्रो अरविंद कुमार वर्मा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न होने के कारण वे परीक्षा विभाग का दायित्व वहन करने आये हैं. विवि प्रशासन को उनके स्वास्थ्य संबंधी और घरेलू कठिनाई के बारे में पता है. इसलिए सीमित अवधि के लिए ही उन्हें यह जवाबदेही दी गयी है. इसलिए परीक्षा नियंत्रक के दायित्व से मुक्त करने के लिए उन्होंने विवि प्रशासन से आग्रह किया है. वैसे विवि प्रशासन जबतक चाहेगा तबतक वे इस पद पर रहते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे. गौरतलब है कि बीते 6 अप्रैल को प्रो. अरविंद वर्मा को विवि प्रशासन ने परीक्षा नियंत्रक की जवाबदेही सौंपी थी. वे काफी अनुभवी शिक्षक हैं. फारबिसगंज कॉलेज को लंबे काल तक अपनी सेवा दी है. बीच के दौर में नवस्थापित अनुमंडल डिग्री महाविद्यालय बायसी को भी अपना अनुभव प्रदान किया. उनके अनुभव को देखते हुए ही उनकी सेवा पूर्णिया विवि ने अपने पास ली और इतिहास विभाग के पीजी विभागाध्यक्ष के रूप में वे कार्यरत किया. वर्तमान में वे डीन की भूमिका में भी हैं. परीक्षा विभाग में कनीय पदाधिकारी का दबदबा पद छोड़ने के पीछे परीक्षा नियंत्रक प्रो. अरविंद कुमार वर्मा स्वास्थ्य और घरेलू कारण बता रहे हैं. मगर शैक्षणिक परिसरों में चर्चा है कि परीक्षा नियंत्रक प्रो. अरविंद कुमार वर्मा को जहां सिर्फ सीमित अवधि के लिए पद संभालने के लिए तैयार किया गया था वहीं आगे चलकर परीक्षा विभाग में उनकी भूमिका भी सीमित कर दी गयी. चर्चा है कि एक कनीय पदाधिकारी का परीक्षा विभाग में दबदबा है और वे विवि प्रशासन के काफी करीब भी हैं. कनीय पदाधिकारी के मंतव्य पर ही परीक्षा विभाग में कई बड़े कार्य संचालित होने की भी चर्चा शैक्षणिक परिसरों में छायी हुई है. परीक्षा नियंत्रक बनने से डीन का महत्व घटा शैक्षणिक परिसरों में छायी चर्चा के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक बन जाने से प्रो. अरविंद कुमार वर्मा का महत्व उस रूप में नहीं रह गया जैसा कि एक डीन स्तर के पदाधिकारी का होता है. एक डीन सहज ही परीक्षा बोर्ड का सदस्य होता है जो परीक्षा विभाग की नियंत्री संस्था है. इसलिए जब से एक डीन को परीक्षा नियंत्रक बनाया गया है, तब से शैक्षणिक परिसरों में नियम-परिनियम को लेकर मगजमारी चल रही है . वर्तमान परीक्षा नियंत्रक की उपलब्धि वैसे तो परीक्षा नियंत्रक के रूप में प्रो. अरविंद कुमार वर्मा के ढाई महीने ही हुए हैं. मगर इस अवधि में उन्होंने एक अहम कार्य किया कि परीक्षा संबंधी कार्यों में कॉलेजों की भूमिका सुनिश्चित की. इससे परीक्षा विभाग में लगनेवाली भीड़ खुद-ब-खुद नियंत्रित हो गयी. उनके कार्यकाल में पैट 2023 परीक्षा का पुन: मूल्यांकन कराया गया. वर्ततान में यूजी, पीजी और बीएड की परीक्षाओं की प्रक्रिया चल रही है. स्नातक तृतीय खंड ओर्ल्ड कोर्स की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए मूल्यांकन केंद्र पर सख्त निगरानी बरती गयी. ऐसा पहली बार हुआ कि खुद परीक्षा नियंत्रक नियमित रूप से मूल्यांकन केंद्र का निरीक्षण करते रहे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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