रहमत बरकत और मगफिरत का महीना है रमजान
Updated at : 08 May 2019 6:50 AM (IST)
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कुमारखंड : रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना सोमवार को चांद देखने के बाद शुरू हो गया. पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों, बरकतों की बारिश का महीना है, बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसालोगों नियत का संदेश भी देता है. माह-ए-रमजान का चांद दिखने के बाद खुदा की इबादत का पाक महीना […]
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कुमारखंड : रमजानुल मुबारक का पवित्र महीना सोमवार को चांद देखने के बाद शुरू हो गया. पाक महीना माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों, बरकतों की बारिश का महीना है, बल्कि समूची मानव जाति को प्रेम भाईचारे और इंसालोगों नियत का संदेश भी देता है.
माह-ए-रमजान का चांद दिखने के बाद खुदा की इबादत का पाक महीना शुरू हो जाता है. इस महीने को नेकी कमाने का महीना माह-ए-रमजान भी कहते हैं. रमजान शुरू होने के साथ ही रोजेदार दिन-रात अल्लाह की इबादत में डूबे हैं.
गुनाहों की माफी के लिए इबादत शुरू हो गयी है. रमजान का संदेश खुद को खुदा की राह में समर्पित कर देने का प्रतीक है. माह-ए-रमजान न सिर्फ रहमतों और बरकतों की बारिश का वकफा है. इस संबंध में हाफिज खुर्शीद कहते हैं कि मौजूदा हालात में रमजान का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है.
इस पाक महीने में अल्लाह अपने बंदों पर रहमतों का खजाना लुटाता है व भूखे-प्यासे रहकर खुदा की इबादत करने वालों के गुनाह माफ हो जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस माह में दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं व जन्नत की राह खुल जाती है.
इस दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने, किसी की निंदा करने और हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना अनिवार्य है. रोजे रखने का असल मकसद महज भूख-प्यास पर नियंत्रण रखना नहीं है, बल्कि रोजे की रूह दरअसल आत्म संयम, नियंत्रण, अल्लाह के प्रति आस्था और सही राह पर चलने के संकल्प व उस पर मुस्तैदी से अमल करना चाहिये.
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