48 हजार की एक सुई लगाने के बाद मरीज की मौत, 6 घंटे में डेढ़ लाख खर्च कराने का आरोप

मौत पर निजी अस्पताल के बाहर जुटी भीड़ को समझाती पुलिस
Patient Death Controversy: पूर्णिया के प्रमुख मेडिकल हब लाइन बाजार स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा काटा. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने महज 6 घंटे के भीतर डेढ़ लाख रुपये खर्च करवा लिए और 48 हजार रुपये का एक महंगा इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद मरीज की जान चली गई.
पूर्णिया से विकास वर्मा की रिपोर्ट
Patient Death Controversy: पूर्णिया शहर के चिकित्सा केंद्र माने जाने वाले लाइन बाजार के एक निजी अस्पताल में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गई, जब सांस फूलने की बीमारी से पीड़ित एक अधेड़ मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई. मरीज की मौत से आक्रोशित और स्तब्ध परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और ऑन-ड्यूटी डॉक्टरों पर चिकित्सा में घोर लापरवाही बरतने और गलत ट्रीटमेंट करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है. मृतक की पहचान श्रीनगर प्रखंड निवासी 55 वर्षीय सागर महतो के रूप में की गई है. इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई.
“महंगा इंजेक्शन देते ही बिगड़ी तबीयत, मौत के बाद भी दी गई गलत जानकारी”: परिजन
मृतक के परिजनों ने रोते-बिलखते हुए अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- महंगे वायल का खेल: परिजनों का दावा है कि डॉक्टरों ने मरीज की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए एक बेहद कीमती लाइफ-सेविंग इंजेक्शन लाने को कहा, जिसकी बाजार कीमत लगभग 48,000 रुपये थी. परिजनों ने आनन-फानन में भारी-भरकम रकम का इंतजाम कर वह सुई डॉक्टरों को सौंप दी.
- तत्काल मौत का आरोप: परिजनों का सीधा आरोप है कि जैसे ही वह 48 हजार रुपये का इंजेक्शन मरीज के शरीर में इन्जेक्ट किया गया, उसकी स्थिति सुधरने की बजाय और ज्यादा बिगड़ गई और कुछ ही मिनटों में उसने दम तोड़ दिया.
- 6 घंटे में 1.5 लाख की चपत: मृतक के पुत्र आनंद ने अस्पताल प्रबंधन पर वित्तीय शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि भर्ती करने के महज 6 घंटे के भीतर दवा, बेड चार्ज और जांच के नाम पर करीब डेढ़ लाख रुपये जमा करवा लिए गए, लेकिन उनके पिता को सही इलाज नसीब नहीं हुआ. इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि मौत हो जाने के काफी देर बाद तक अस्पताल प्रशासन ने उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगने दी.
पुलिस और विधायक प्रतिनिधि ने कराया शांत
मरीज की मौत की खबर जैसे ही अस्पताल से बाहर निकली, श्रीनगर और लाइन बाजार क्षेत्र से बड़ी संख्या में ग्रामीणों और शुभचिंतकों का हुजूम अस्पताल पहुंचने लगा. उग्र भीड़ को देखते हुए अस्पताल के कई कर्मी मौके से खिसक गए. मामले की संवेदनशीलता और हंगामे को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी तुरंत घटना स्थल पर पहुंचे. पुलिस ने उग्र परिजनों को काफी समझा-बुझाकर शांत कराया.
निष्पक्ष जांच का मिला भरोसा
घटना की जानकारी मिलते ही कसबा विधायक प्रतिनिधि प्रशांत झा समेत कई स्थानीय जनप्रतिनिधि भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर इस दुखद घड़ी में उन्हें ढांढस बंधाया और उचित कानूनी कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया. प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मृतक के परिजनों से लिखित आवेदन प्राप्त कर लिया गया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया के साथ-साथ एक मेडिकल बोर्ड का गठन कर पूरे इलाज की पर्ची और दिए गए इंजेक्शन की सत्यता की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने व डॉक्टरों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सख्त कार्रवाई होगी.
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लेखक के बारे में
By दिव्यांशु प्रशांत
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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